PK बोले- रातोंरात नेशनल पार्टी नहीं बन सकती है AAP, राष्ट्रीय दल बनने में लगेंगे 20 साल
नई दिल्ली, 29 मार्च: राजनीतिक रणनीतिकार प्रशांत किशोर ने आम आदमी पार्टी को लेकर अहम भविष्यवाणी की है। पीके ने दैनिक भास्कर को दिए एक इंटरव्यू में कहा कि, एक या दो राज्यों में चुनाव जीतने के बाद कुछ हद तक शक्तिशाली ताकत के रूप में उभरना एक बात है, और लोकसभा चुनाव जीतना एक अलग बात है। थ्योरेटिकली तो कोई भी पार्टी नेशनल पार्टी बन सकती है। उन्होंने कहा कि आप को नेशनल लेवल की पार्टी बनने में कम से कम 20 साल लग जाएंगे।

पीके ने कहा कि, आम आदमी पार्टी को राष्ट्रीय दल बनने में 15 से 20 साल का वक्त लगेगा। उन्होंने कहा कि किसी भी दल को राष्ट्रीय पार्टी बनने के लिए 20 करोड़ वोट हासिल करने की जरूरत है, जबकि आम आदमी पार्टी को 2019 में 27 लाख मत हासिल हुए थे। उन्होंने कहा कि देश में अब तक कांग्रेस और भाजपा ही राष्ट्रीय दल के तौर पर उभर पाए हैं। उन्होंने कहा कि देश में कई दलों ने इसकी कोशिश की है, लेकिन वे उभर नहीं पाए हैं। ऐसा रातोंरात नहीं हो सकता और इसके लिए वक्त चाहिए।
प्रशांत किशोर ने आगे कहा कि, 'सैद्धांतिक तौर पर कोई भी दल राष्ट्रीय पार्टी बन सकता है, लेकिन इतिहास में आप झांकेंगे तो पता चलता है कि भाजपा और कांग्रेस ही पूरे भारत तक पहुंच पाए हैं। बीजेपी ऐसा करने में 50 साल लगे। बीजेपी ने 1978 से काम शुरू किया था। सालों बाद उन्हें एक मिली-जुली सरकार बनाने का मौका मिला। इसका मतलब यह नहीं है कि कोई दूसरा दल ऐसा नहीं कर सकता। लेकिन इसके लिए लगातार 15 से 20 सालों तक संघर्ष करने की जरूरत है। ऐसा कोई बदलाव रातोंरात नहीं हो सकता।'
प्रशांत किशोर ने चुनावी मुद्दों पर बात करते हुए कहा कि, महंगाई, बेरोजगारी जैसे मुद्दे नहीं हैं, ये कहना गलत है। 38% वोट पाकर अगर किसी को ऐसा लगता है कि पूरा देश उसके साथ है तो यह सही नहीं है, क्योंकि देश के 100 में से 38 लोग ही आपके साथ हैं। 62 लोगों के लिए तो महंगाई, बेरोजगारी ही बड़ा मुद्दा है। बस बात ये है कि उनके वोट बंट रहे हैं। पीएम नरेंद्र मोदी की लोकप्रियता को लेकर भी प्रशांत किशोर ने कहा कि आज भी उनके समर्थक डटे हुए हैं।
प्रशांत किशोर ने कहा कि किसी के लोकप्रिय होने का यह मतलब नहीं है कि वह चुनाव नहीं हाराया जा सकता है, जैसा कि बंगाल में हुआ है। इसके बाद उन्होंने अगला उदाहरण अखिलेश यादव का दिया। किशोर ने कहा कि अखिलेश यादव की सभाओं में खूब भीड़ आ रही थी और 30 फीसदी से ज्यादा वोट मिला, इसके बाद भी हार का सामना करना पड़ा। उन्होंने कहा कि, हिंदुत्व एक बड़ा फैक्टर है। इसका चुनाव में असर होता है।












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