बिजली की किल्लत: देश में 20% बढ़ी मांग, अब सभी इंपोर्टेड कोल पावर प्लांट पूरी क्षमता से चलेंगे
नई दिल्ली। देश में बिजली की किल्लत व कोयले की अपर्याप्त सप्लाई की समीक्षा के बाद केंद्र सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। केंद्रीय ऊर्जा मंत्रालय देश में घरेलू कोयले से चलने वाले सभी थर्मल प्लांट्स से अपनी जरूरत का कम से कम 10% कोयला आयात करने का निर्देश दिया है। साथ ही केवल इम्पोर्टेड कोल से चलने वाले प्लांट्स को निर्देश दिया गया है कि वे अपने प्लांट 100% क्षमता से चलाएं।

सरकार ने माना- कोयले की पर्याप्त सप्लाई नहीं
सरकार ने पहली बार यह माना है कि बिजली संयंत्रों की रोजाना की खपत के हिसाब से कोयले की पर्याप्त सप्लाई नहीं हो पा रही है। इसी के साथ केंद्र ने सभी इंपोर्टेड कोल पावर प्लांट्स को पूरी क्षमता से संचालित करने के लिए कहा है। और, केंद्रीय ऊर्जा मंत्रालय की ओर से सभी राज्यों और घरेलू कोयले पर आधारित सभी उत्पादन कंपनियों को कोयले की अपनी आवश्यकता का कम से कम 10% आयात करने का निर्देश दिया गया है। सरकार का यह आदेश 30 अक्टूबर तक के लिए है।
बिजली की मांग में 20% की वृद्धि हुई
विद्युत मंत्रालय ने इस जोर देते हुए कि बिजली की मांग में लगभग 20% की वृद्धि हुई है; कहा कि, बिजली की पर्याप्त व्यवस्था कराने के लिए कोल पावर प्लांट्स को पूरी क्षमता से संचालित करना होगा। मंत्रालय के आधिकारिक बयान में कहा गया, "ऊर्जा के संदर्भ में बिजली की मांग में लगभग 20 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। वहीं, घरेलू कोयले की आपूर्ति में भी वृद्धि हुई है, लेकिन आपूर्ति में वृद्धि बिजली की बढ़ी हुई मांग को पूरा करने के लिए पर्याप्त नहीं है। इससे विभिन्न क्षेत्रों में लोड शेडिंग हो रही है। इस असंतुलन को दूर करने के लिए जरूरी उपाय किए जा रहे हैं।"
मंत्रालय की ओर से कहा गया, "कोयले की अंतरराष्ट्रीय कीमत अभूतपूर्व ढंग से बढ़ी है। यह वर्तमान में लगभग 140 अमेरिकी डॉलर प्रति टन है। इसके परिणामस्वरूप, सम्मिश्रण के लिए कोयले का आयात, जो 2015-16 में 37 मिलियन टन के क्रम में था, वो अब नीचे चला गया है, जिससे घरेलू स्थिति दवाब में है। वहीं, इंपोर्टेड कोल आधारित उत्पादन क्षमता लगभग 17,600MW है। यदि उचित इंतजाम नहीं हुए तो बिजली की आपूर्ति से जनरेटरों को भारी नुकसान होगा और इसलिए जनरेटर उन संयंत्रों को चलाने के लिए तैयार नहीं होंगे। अब यह जरूरी है कि, सभी इंपोर्टेड कोल पॉवर प्लांट्स अपनी पूरी क्षमता से बिजली का संचालन और उत्पादन करेंगे।"
अब आमजन पर बढ़ेगा अनावश्यक बोझ!
मालूम हो कि, बीते 6 साल में बिजली का संकट सबसे खराब स्तर पर पहुंच चुका है। वहीं, बीते 38 साल में बिजली की मांग सबसे तेज रफ्तार से बढ़ रही है। ऊर्जा विशेषज्ञों का कहना है कि, सरकार के फैसले से आखिर में आम लोगों के बिजली के बिलों में असामयिक व गैर-जरूरी बढ़ोतरी होगी, तो एक तरह से यह जनता पर अनावश्यक बोझ होगा।












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