किसी को मोदी ने रातों-रात बनाया स्टार, तो किसी के इस्तीफे ने हिला दिया, ये 5 नेता क्यों बने साल की बड़ी खबर
Politics Year Ender 2025: यह सच है कि 2014 के बाद से भारतीय राजनीति में नरेंद्र मोदी सबसे बड़ा चेहरा रहे हैं। 2025 में भी उपलब्धियों की बात करें तो उनका असर हर जगह दिखा। बिहार में नीतीश कुमार की जीत हो या दिल्ली में बीजेपी की वापसी, दोनों जगह मोदी फैक्टर निर्णायक रहा। लेकिन साल 2025 भारतीय राजनीति के लिए कई मायनों में यादगार रहा। कहीं सत्ता के समीकरण बदले, कहीं ऐसे चेहरे सामने आए जिनकी किसी ने कल्पना तक नहीं की थी, तो कहीं ऐसे फैसले हुए जिन्होंने सियासी गलियारों में महीनों तक चर्चा को हवा दी।
इस पूरे घटनाक्रम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह की रणनीति कई जगह निर्णायक दिखी, लेकिन इस बार कहानी सिर्फ मोदी तक सीमित नहीं रही। बिहार से दिल्ली और संसद के गलियारों से तमिलनाडु की सियासत तक, पांच ऐसे नेता रहे जिनके नाम ने 2025 की राजनीति को परिभाषित किया। किसी को मोदी-शाह ने बड़ा सरप्राइज दिया, तो किसी का फैसला पूरे सिस्टम को हैरान कर गया। आइए जानें वो 5 नेता कौन हैं?

🟡 1. नितिन नबीन: विधायक से संगठन के शीर्ष तक की छलांग
बीजेपी अक्सर कहती है कि पार्टी में एक सामान्य कार्यकर्ता भी शीर्ष तक पहुंच सकता है। नितिन नबीन का उभार इस दावे को जमीन पर उतारता नजर आया। लंबे समय तक संगठन में काम करने वाले नितिन नबीन अचानक राष्ट्रीय राजनीति के केंद्र में आ गए। जिस तरह उन्हें बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई, उसने कई सीनियर नेताओं को भी चौंका दिया।
धर्मेंद्र प्रधान, भूपेंद्र यादव और अनुराग ठाकुर जैसे नामों के बीच नितिन नबीन का आगे आना मोदी-शाह की उस रणनीति को दिखाता है, जिसमें भविष्य के नेताओं को समय से पहले तैयार किया जाता है। 2025 में नितिन नबीन बीजेपी के भीतर उभरते भरोसे का चेहरा बन गए।
🟡 2. नीतीश कुमार: कठिन हालात में भी सियासी बाजीगर
नीतीश कुमार के लिए 2025 का विधानसभा चुनाव आसान नहीं था। सेहत, प्रशासन और अजीबो-गरीब बयानों को लेकर वे लगातार निशाने पर रहे। इसके बावजूद बिहार की 243 सीटों में से 202 सीटें एनडीए के खाते में जाना बड़ी उपलब्धि मानी गई। खास बात यह रही कि राष्ट्रीय जनता दल को सिर्फ 25 सीटों पर समेट दिया गया।
चुनाव से पहले जेडीयू के खत्म हो जाने की भविष्यवाणियां हो रही थीं, लेकिन नतीजों ने सबको गलत साबित कर दिया। नीतीश ने अपनी पार्टी को बीजेपी के बराबर खड़ा कर दिया और विरोधियों को कोई विकल्प नहीं बचा। 2025 में नीतीश कुमार ने एक बार फिर साबित किया कि अनुभव और धैर्य बिहार की राजनीति में अब भी सबसे बड़ा हथियार है।
🟡 3. सीपी राधाकृष्णन: उपराष्ट्रपति चुनाव से बदली सियासी तस्वीर
उपराष्ट्रपति पद के लिए सीपी राधाकृष्णन का नाम सामने आते ही विपक्ष की रणनीति लड़खड़ा गई। जगदीप धनखड़ के स्वास्थ्य कारणों से इस्तीफे के बाद विपक्ष आक्रामक था और कई नाम चर्चा में थे। लेकिन बीजेपी ने ऐसा उम्मीदवार चुना जिसने गणित पूरी तरह बदल दिया।
तमिलनाडु बीजेपी के अध्यक्ष रह चुके सीपी राधाकृष्णन का चयन सिर्फ दिल्ली की राजनीति नहीं, बल्कि 2026 में होने वाले तमिलनाडु विधानसभा चुनाव से भी जुड़ा माना गया। यह फैसला बीजेपी के लिए राजनीतिक, सामाजिक और क्षेत्रीय तीनों स्तरों पर फायदेमंद साबित हुआ। 2025 में सीपी राधाकृष्णन का नाम सत्ता संतुलन के नए अध्याय के तौर पर दर्ज हुआ।
🟡 4. जगदीप धनखड़: इस्तीफा जिसने सवालों की आंधी खड़ी कर दी
21 जुलाई 2025 को संसद का मॉनसून सत्र शुरू हुआ। दिन में उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने राज्यसभा की कार्यवाही चलाई और रात होते-होते उनके इस्तीफे की खबर आ गई। आधिकारिक बयान में सेहत का हवाला दिया गया, लेकिन राजनीति में शायद ही कोई इस वजह को पूरी तरह मान पाया।
जस्टिस यशवंत वर्मा के मामले में विपक्ष के प्रस्ताव को मंजूरी देना, दिसंबर 2024 का अविश्वास प्रस्ताव और सरकार की रणनीति से अलग रुख, ये सब कारण गिनाए जाते रहे। खुद धनखड़ ने इस्तीफे के बाद कोई सफाई नहीं दी। उनके इस फैसले ने 2025 की राजनीति में सबसे बड़ा सस्पेंस पैदा किया।
🟡 5. रेखा गुप्ता: गुमनाम पार्षद से दिल्ली की मुख्यमंत्री
दिल्ली की राजनीति में रेखा गुप्ता का उभार किसी फिल्मी कहानी से कम नहीं रहा। पहली बार विधायक बनते ही मुख्यमंत्री बन जाना अपने आप में बड़ी बात है। हालांकि दिल्ली में ऐसा पहले भी हो चुका है, लेकिन रेखा गुप्ता इससे पहले कोई बड़ा नाम नहीं थीं।
नगर निगम की पार्षद के तौर पर काम करने वाली रेखा गुप्ता को मुख्यमंत्री बनाना बीजेपी की उस रणनीति का हिस्सा दिखा, जिसमें नए और अपेक्षाकृत अनजान चेहरों पर भरोसा किया गया। मोहन यादव, भजनलाल शर्मा और विष्णुदेव साय की तरह रेखा गुप्ता भी 2025 में मोदी-शाह के सरप्राइज पैकेज का बड़ा उदाहरण बनीं।
2025 की राजनीति ने यह साफ कर दिया कि भारतीय सियासत अब सिर्फ बड़े नामों तक सीमित नहीं है। कहीं रणनीति ने खेल पलटा, कहीं अनुभव काम आया और कहीं अचानक फैसलों ने सबको चौंका दिया। इन पांच नेताओं ने मिलकर 2025 को ऐसा साल बना दिया, जिसे राजनीति के इतिहास में लंबे समय तक याद रखा जाएगा।












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