विशाखापत्तनम में बंदरगाह में लगी आग को लेकर आंध्र प्रदेश में चुनाव से पहले गरमाई राजनीति
आंध्र प्रदेश में 2024 की शुरूआत में विधानसभा चुनाव होने वाले हैं। राज्य में बड़ी संख्या में मछुआरा समुदाय है और राज्य के तीन विधानसभा क्षेत्रों के उम्मीदवारों के भाग्य का निर्णय मछुआरा समुदाय ही करते हैं। चुनाव से पहले मछली पकड़ने के बंदरगाह में आग लगने से राज्य की राजनीति गरमा गई है। राजनीतिक नेता लाभ हासिल करने का कोई मौका नहीं छोड़ना चाहते है। विशाखापत्तनम में इस मुद्दे को लेकर राजनीति गरमा चुकी है। सभी प्रमुख दल प्रभावित मछुआरों के परिवारों का समर्थन करने के लिए एकजुट हो गए हैं।

बता दें 20 नवंबर को मछली पकड़ने वाले बंदरगाह पर जीरो जेट्टी में लगी आग के कारण कम से कम 30 नावें राख हो गईं और 19 अन्य क्षतिग्रस्त हो गईं। 800 से अधिक परिवार, जो प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से मछली पकड़ने वाली नौकाओं पर निर्भर हैं, वो प्रभावित हुए हैं, जिनकी नावें इस आगजनी में जल गई हैं।
हालांकि इस घटना के संज्ञान में आते ही मुख्यमंत्री वाईएस जगन मोहन रेड्डी ने घोषणा की कि नाव की लागत का 80 प्रतिशत प्रभावित मालिकों को मुआवजे के रूप में दिया जाएगा।बता दें आंध्र प्रदेश में इस मुद्दे को लेकर नेता काफी सक्रिय नजर आ रहे है। आलम ये है कि राजीनीतिक दलों के बीच बंदरगाह की आग से प्रभावित मछुआरों के बचाव में आने की होड़ में हैं। वाईएसआरसी सरकार ने नेतृत्व करते हुए घटना के तीन दिनों के भीतर प्रभावित परिवारों को 7.11 करोड़ रुपये के वादे का 80 प्रतिशत मुआवजा वितरित किया।
हालांकि कई रिपोर्ट में दावा किया जा रहा है कि वाईएसआरसी और पवन कल्याण की जन सेना पार्टी ने मछली पकड़ने के बंदरगाह की निर्धारित यात्रा से एक दिन पहले केवल उनकी यात्रा बंद होने से हुए नुकसान के कारण उनको किसी चीज की कमी ना हो इसके लिए राहत वितरित की। वहीं पवन कल्याण की जेएसपी ने प्रत्येक प्रभावित नाव मालिकों को 50,000 रुपये वितरित कर वहां रहने वाले लोगों का
आईटी मंत्री गुडिवाडा अमरनाथ ने आरोप लगाया कि 2024 में होने वाले चुनावों को ध्यान में रखकर विपक्षी पार्टी कांग्रेस और भाजपा इस आग कांड का पूरा राजनीतिक लाभ ले रहे हैं। उन्होंने दावा किया कि जगन ने प्रभावित नाव मालिकों को तेजी से सहायता पहुंचाकर मछुआरों का दिल जीत लिया।












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