पीएम मोदी ने बारिश के पानी के संरक्षण के लिए ग्राम प्रधानों को लिखा पत्र, दिए कई सुझाव

नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मानसून के दौरान होने वाली बारिश के पानी के संरक्षण के लिए शनिवार को ठोस पहल की। पीएम मोदी ने ग्राम प्रधानों को व्यक्तिगत लैटर लिखकर जल संरक्षण करने की अपील की। ग्रामीण क्षेत्रों जल संकट लगातार चिंता का विषय बना हुआ है। पीएम मोदी के हस्ताक्षर वाले पत्रों को जिलों में संबधित जिला मजिस्ट्रेटों और कलेक्टरों को ग्राम प्रधानों को सौंपा गया।

पीएम मोदी ने लिखा सरपंचों को लैटर

पीएम मोदी ने लिखा सरपंचों को लैटर

पीएम मोदी ने हिंदी में लिखे अपने पत्र में लिखा कि 'प्रिय सरपंचजी, नमस्कार। मुझे उम्मीद है कि आप और पंचायत के मेरे सभी भाई और बहनें पूरी तरह स्वस्थ होंगे। बारिश का मौसम शुरू होने वाला है। हम ईश्वर के आभारी हैं कि हमें पर्याप्त वर्षाजल का आशीर्वाद मिला है। हमें इस आशीर्वाद (जल) के संरक्षण के लिए सभी प्रयास और व्यवस्था करनी चाहिए। एक पेज के अपने पत्र में पीएम मोदी ने कहा कि गांव में पानी के संरक्षण के तरीकों पर चर्चा होनी चाहिए। मुझे आप सभी पर भरोसा है कि बारिश के पानी की हर बूंद को बचाने के लिए पर्याप्त इंतजाम किए जाएंगे।

पानी के संरक्षण के लिए करेंगे व्यक्तिगत प्रयास

पानी के संरक्षण के लिए करेंगे व्यक्तिगत प्रयास

पूर्वी उत्तर प्रदेश के सोनभद्र में 637 ग्राम प्रधानों को पीएम मोदी का ये लैटर मिला है। इस लैटर में पीएम मोदी ने सभी ग्राम प्रधानों ने अपील की है कि वो व्यक्तिगत स्तर मानसून में होने वाली बारिश के पानी को संरक्षण करने का प्रयास करेंगे। सोनभद्र उनके संसदीय क्षेत्र वाराणसी के पास स्थित है। उन्होंने पत्र में ग्राम प्रधानों से उनका संदेश गांव वालों को पढ़ाने के लिए कहा। उन्होंने बारिश के पानी के संरक्षण के लिए पानी चैकडेम और तालाब बनाने का सुझाव दिया।

नीति आयोग की मटिंग में जल संरक्षण पर होगी बात

नीति आयोग की मटिंग में जल संरक्षण पर होगी बात

सूत्रों के अनुसार 15 जून को नीति आयोग की परिषद की बैठक के दौरान पीएम मोदी देश के प्रमुख हिस्से में ग्रामीण क्षेत्रों को प्रभावित करने वाले जल संकट से निपटने के लिए वर्षा जल संचयन की आवश्यकता को रेखांकित करेंगे। मोदी ने प्रधानमंत्री के तौर पर दूसरा कार्यभार संभालने के बाद गजेन्द्र सिंह शेखावत को देश का पहला जल शक्ति मंत्रालय बनाया। इस मंत्रालय के गठन के लिए जल संसाधन, नदी विकास और गंगा कायाकल्प और पेयजल और स्वच्छता मंत्रालय का विलय कर दिया। प्रधानमंत्री के निर्देश पर जल शक्ति मंत्री ने देश के जल संकट की समीक्षा के लिए हाल ही में सभी राज्यों के मंत्रियों की एक अंतर-राज्यीय बैठक की थी।

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