'हमारे लिए राष्ट्रहित सबसे पहले, RSS भारत की संस्कृति का अक्षय वटवृक्ष', नागपुर में PM मोदी ने की संघ की तारीफ
Narendra Modi News: राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के 100 साल पूरा होने पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी नागपुर स्थित आरएसएस के मुख्यालय में पहुंचे। पीएम नरेंद्र मोदी हिंदू नववर्ष की शुरुआत के अवसर पर आरएसएस प्रतिपदा कार्यक्रम के लिए नागपुर में हैं। पीएम मोदी भारत के ऐसे पहले प्रधानमंत्री हैं, जिन्होंने आरएसएस मुख्यालय का दौरा किया है। पीएम मोदी ने संघ के संस्थापक डॉ. हेडगेवार और गुरुजी गोलवलकर को पुष्पांजलि अर्पित कर वहां स्वयंसेवकों के निस्वार्थ सेवा भाव की जमकर तारीफ की।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि 'राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ भारत की अमर संस्कृति का आधुनिक अक्षय वट है। ये अक्षय वट आज भारतीय संस्कृति को... हमारे राष्ट्र की चेतना को निरंतर ऊर्जावान बना रहा है।'

पीएम मोदी ने कहा, 'संघ सेवा के इस पवित्र तीर्थ नागपुर में आज हम एक पून्य संकल्प के सेवा विस्तार के साक्षी बन रहे हैं। अभी हमने माधव नेत्रालय के कुल गीत में सुना, अध्यात्म, ज्ञान, गौरव गुरुता का ये अद्भुत विद्यालय है, मानवतारत है ये सेवा मंदिर कण कण में देवालय है। माधव नेत्रालय एक ऐसा संस्थान है जो अनेक दशकों से पूज्य गुरूजी के आदर्शों पर लाखों लोगों की सेवा कर रहा है।'
पीएम नरेंद्र मोदी ने कहा- संघ के स्वयंसेवक नि:स्वार्थ भाव से काम करते हैं
पीएम नरेंद्र मोदी ने कहा, ''हम देव से देश और राम से राग के जीवन मंत्र लेकर चले हैं। अपना कर्तव्य निभाते चलते हैं। इसलिए बड़ा छोटा कैसा भी काम हो, कोई भी क्षेत्र हो... संघ के स्वयंसेवक नि:स्वार्थ भाव से काम करते हैं।''
पीएम मोदी ने कहा, ''हमारा शरीर परोपकार के लिए ही है, सेवा के लिए ही है और जब ये सेवा संस्कारों में आ जाती है तो सेवा ही साधना बन जाती है। यही साधना तो हरेक स्वयंसेवक की प्राणवायु होती है। ये सेवा संस्कार, ये साधना, ये प्राणवायु... पीढ़ी दर पीढ़ी हर स्वयंसेवक को तप-तपस्या के लिए प्रेरित कर रही है। ये सेवा साधना हर स्वयंसेवक को निरंतर गतिमान रखती है, ये कभी थकने और रुकने नहीं देती है।''
पीएम मोदी ने आगे कहा, ''जब प्रयासों के दौरान मैं नहीं हम का ध्यान होता है, जब राष्ट्र प्रथम की भावना सर्वोपरि होती है, जब नीतियों में, निर्णयों में देश के लोगों का हित ही सबसे बड़ा होता है, तो सर्वत्र उसका प्रभाव भी नजर आता है। आज हम देख रहे हैं कि भारत कैसे गुलामी की मानसिकता को तोड़ कर आगे बढ़ रहा है।''












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