किसी को अपनी राष्ट्रभक्ति का सबूत देने की जरूरत नहीं- नरेंद्र मोदी
नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज राज्यसभा में चल रही असहिष्णुता के मुद्दे पर सदन में बोलते हुए कहा कि बिखरने की कई वजहें हो सकती हैं लेकिन इन वजहों के बीच जोड़ने की कोशिश करनी चाहिए। हमारा दायित्व है कि हम इन परिस्थितियों में भी जो़ड़ने की वजहें ढूंढ़े।

प्रधानमंत्री ने कहा कि संविधान की भावना लोगों को संपूर्ण विकास की वकालत करती है। उन्होंने कहा कि बाबा साहब औद्योगिकीकरण के पक्षधर थे लेकिन उनका मानना था कि इसके पीछ किसी का हक नहीं छिनना चाहिए।
प्रधानमंत्री के भाषण के मुख्य अंश
- मैक्समुलर ने कहा था कि अगर मैं ऐसा देश ढूंढने के लिए पूरी दुनिया को ढूंढूं जहां प्रकृति में स्वर्ग है तो मैं भारत की ओर इशारा करुंगा। यहां मानव मस्तिष्क ने सबसे ज्यादा यहीं लोगों ने विचार और समाधान निकाला है।
- देश में रहने वाले लोगों को राष्ट्रभक्ति का सबूत देने की जरूरत नहीं है।
- अगर हर राज्य दूसरे राज्य के पर्वों को मनाना शुरु और एक दूसरे राज्यों के शब्दों को सीखना शुरु करें।
- हमारा दायित्व है कि बिखरने की वजहों के बीच भी जोड़ने की वजहें ढूंढ़नी चाहिए।
- बिखरने के लिए तो कई बहाने मिल जायेंगे लेकिन जुड़ने की वजहों को नहीं छोड़ना चाहिए।
- अगर समाज में किसी के साथ अत्याचार होता है तो यह हमारे लिए कलंक है।
- दलितों को भी अवसर मिले उसे दिलाना हमारा दायित्व है।
- देश में समभाव और ममभाव दोनों ही होना चाहिए।
- अगर समाज अपने आप को बदलने के लिए तैयार नहीं होगा तो बाबा साहब अंबडकर का सपना अधूर है।
- भाई भतीजावाद और सत्ता की भूख को खत्म करना जरूरी है।
- शास्त्रों में जो कहा गया है वह भी उतना अहम है जितना संविधान में कही बातों का है।












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