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26/11 अटैक: पीयूष गोयल बोले- 'हिंदू टेरर' के नाम पर कांग्रेस ने देश को गुमराह किया

नई दिल्ली। मुंबई पुलिस के पूर्व कमिश्नर राकेश मारिया की आत्मकथा 'राकेश मारिया-लेट मी से इट नाउ' को लेकर विवाद शुरू हो गया है। राकेश मारिया ने आतंकी अजमल कसाब को लेकर एक बड़ा खुलासा किया है। उन्होंने अपनी किताब में लिखा है कि पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी कसाब को एक हिंदू के तौर पर मारना चाहती थी। किताब पर प्रतिक्रिया देते हुए केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने कहा कि कांग्रेस ने हिंदू आतंकवाद के नाम पर देश को गुमराह करने की कोशिश की थी। पीयूष गोयल ने शीर्ष पुलिसकर्मी पर हमला बोलते हुए पूछा कि जब वह पुलिस आयुक्त थे, तब उन्होंने जानकारी साझा क्यों नहीं की?

पूर्व पुलिस कमिश्नर पर बीजेपी सवाल खड़े किए

पूर्व पुलिस कमिश्नर पर बीजेपी सवाल खड़े किए

पीयूष गोयल ने कहा कि, मारिया जी ने ये सब बातें अभी क्यों बोलीं, उन्हें तब ये बातें बोलनी चाहिए। इस पर एक्शन लेना चाहिए था। जब वो पुलिस कमिश्नर थे तब उन्हें ये सब बातें बोलनी चाहिए। वास्तव में सर्विस रूल्स में अगर कोई जानकारी वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के पास है तो उनके उसके ऊपर एक्शन लेना चाहिए था। मेरे खयाल से कांग्रेस द्वारा बहुत गहरी साजिश रची गई थी।

BJP ने कांग्रेस पर लगाया हिंदू टेरर फैलाने का आरोप

BJP ने कांग्रेस पर लगाया हिंदू टेरर फैलाने का आरोप

गोयल ने कहा कि, उन्होंने (मारिया) चिदंबरम साहब के कहने पर हिंदू टेरर का मुद्दा खड़ा करने की कोशिश की थी। मैं कांग्रेस की निंदा करता हूं जो हिंदू टेरर के झूठे आरोपों पर देश को गुमराह करते हैं। उसका खामियाजा उन्हें 2014 में और 2019 में...देश की जनता ने उन्हें पूरी तरह से हराया। मैं समझता हूं टेरर का कोई धर्म नहीं होता। टेरेरिस्ट, टेरेरिस्ट होता है और झूठे आरोपों पर कुछ लोगों को जो फंसाने की कोशिश कांग्रेस ने की थी उसकी हमारी सरकार घोर निंदा करती है।

कसाब के पास मिले थे हिंदू आईकार्ड

कसाब के पास मिले थे हिंदू आईकार्ड

बता दें कि, मारिया ने अपनी इस किताब नें लिखा कि, पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई ने 26/11 हमले को हिंदू आतंकवाद का चोला पहनाने कोशिश की थी। उन्होंने ये भी बताया है कि कसाब के हाथ पर कलावा क्यों बांधा गया था, क्योंकि पाकिस्तानी एजेंसी उसे एक हिंदू के तौर पर साबित करना चाहती थी। इसीलिए उसे समीर दिनेश चौधरी के नाम से आईडी कार्ड दिया गया था। मारिया ने अपनी किताब में बताया है कि कसाब को जिंदा रखना उनके लिए काफी अहम हो गया था, क्योंकि मुंबई पुलिस में भी उसके लिए नफरत और गुस्सा था।

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