Pilibhit Lok Sabha Election: जितिन प्रसाद पर इतनी मेहरबान क्यों हुई BJP? पीलीभीत सीट देकर चला बड़ा दांव
Pilibhit Lok Sabha Election News 2024: कांग्रेस पार्टी से बीजेपी में आने के बाद जिन नेताओं का कद पार्टी में अप्रत्याशित रूप से बढ़ा है, उनमें जितिन प्रसाद भी शामिल हैं। अभी वे यूपी में योगी आदित्यनाथ सरकार में पावरफुल पीडब्ल्यूडी विभाग में कैबिनेट मंत्री हैं, लेकिन बीजेपी ने उन्हें वरुण गांधी की हाई-प्रोफाइल पीलीभीत सीट से टिकट दिया है।
जितिन प्रसाद कांग्रेस के उन नेताओं में शामिल हैं, जिनकी तीन पीढ़ी कांग्रेस से जुड़ी रही है। खुद जितिन प्रसाद कांग्रेस पार्टी के वास्तविक सुप्रीमो राहुल गांधी के बेहद करीबी नेताओं में शामिल रहे हैं और इस वजह से शुरुआती दिनों से उनपर 10 जनपथ का भी आशीर्वाद था।

भाजपा में शामिल होते ही बढ़ने लगा जितिन प्रसाद का कद
2021 में जबसे जितिन प्रसाद भाजपा में शामिल हुए हैं, पार्टी में उनका कद लगातार बढ़ा है। यूपी में योगी सरकार के पहले कार्यकाल में ही उन्हें पार्टी में आने के कुछ महीने बाद एमएलसी बनने का मौका मिला और अहम जिम्मेदारी दे दी गई। जब दूसरे कार्यकाल में योगी मुख्यमंत्री बने तो उन्हें पीडब्ल्यूडी जैसा अहम विभाग दिया गया।
यह विभाग कभी राज्य के डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मॉर्य जैसे नेताओं के पास था। सपा-बसपा सरकार में भी यह विभाग किसी कद्दावर नेता को ही नसीब होता था, जैसे कि शिवपाल यादव और नसीमुद्दीन सिद्दीकी।
वरुण गांधी की जगह राहुल गांधी के पूर्व करीबी पर दांव
अब जिस तरह से गांधी-नेहरू परिवार के भाजपाई चेहरे वरुण गांधी का टिकट काटकर पार्टी ने जितिन प्रसाद पर भरोसा जताया है, तो इसके कई कारण नजर आ रहे हैं। वे युवा हैं, उनकी छवि साफ-सुथरी है और केंद्र में मंत्री से लेकर राज्य में कद्दावर विभाग संभालने का उनके पास अब लंबा अनुभव भी हो चुका है।
एक तरह से वरुण गांधी की रिप्लेसमेंट के लिए पार्टी ने कांग्रेस के उसी परिवार के करीबी रहे नेता पर दांव लगाने की कोशिश की है। इसके माध्यम से भाजपा ने यह भी दिखाना चाहा है कि अन्य दलों के असंतुष्ट नेता को भी जब पार्टी गले लगाती है तो उसे शीर्ष तक पहुंचने का अवसर देने को भी तैयार रहती है।
ठाकुर-ब्राह्मण की राजनीति के समीकरण में फिट
ठाकुर-ब्राह्मण की राजनीति के लिए चर्चित यूपी में मुख्यमंत्री योगी के पसंदीदा ब्राह्मण चेहरे पर दांव लगाना भी पार्टी का बड़ा मकसद हो सकता है। पिछले वर्षों में लगातार विरोधियों ने योगी सरकार की छवि ब्राह्मण विरोधी पेश करने की कोशिश की है, लेकिन जितिन प्रसाद जैसा चेहरा उस नरेटिव की काट माना जा सकता है।
2022 के यूपी विधानसभा चुनाव में साबित कर चुके हैं उपयोगिता
जितिन ने भाजपा में शामिल होते ही 2022 के यूपी विधानसभा चुनावों में अपनी उपयोगिता साबित कर दी थी। बेहद मृदुभाषी छवि वाले जितिन की लोगों से सहजता के साथ मिलने की आदत भी उन्हें जनता के बीच लोकप्रियता दिलाने के काम आती रही है। बीजेपी में आते ही उन्होंने विभिन्न प्रबुद्ध सम्मेलनों के माध्यम से पार्टी के पक्ष में ऐसा माहौल खड़ा किया था कि बीजेपी को उसका जबर्दस्त लाभ मिला।
कई सीटों पर जितिन प्रसाद की अच्छी पकड़
2022 का विधानसभा चुनाव करीब साल भर लंबे चले चर्चित किसान आंदोलन के तत्काल बाद करवाया गया था। उसी दौरान लखीमपुर में एक अप्रिय घटना घटी थी, जिसकी वजह से यूपी से लेकर केंद्र की बीजेपी सरकार तक विपक्ष के निशाने पर थी। लेकिन,माना जाता है कि भाजपा के खिलाफ नकारात्मक माहौल बनाने की कोशिशों को मिटाने में जितिन की भूमिका ने अहम भूमिका निभाई।
लखीमपुर खीरी जिले की धौरहरा सीट से ही जितिन 2009 में सांसद रह चुके हैं। माना जाता है कि विधानसभा चुनाव में लखीमपुर खीरी, पीलीभीत, सीतापुर, शाहजहांपुर, बहराइच और बरेली में बीजेपी ने सभी आशंकाओं को मिटाते हुए जो बेहतर प्रदर्शन किया तो इसमें उनका भी बड़ा योगदान था। वे अपना पहला लोकसभा चुनाव अपनी जन्मभूमि शाहजहांपुर से ही जीत चुके हैं।
जितिन प्रसाद पर इतनी मेहरबान क्यों हुई बीजेपी?
ऐसे में बीजेपी के लिए कई बार असहज स्थिति पैदा करने वाले पीलीभीत के मौजूदा सांसद और गांधी-नेहरू परिवार के ही एक सदस्य वरुण गांधी की रिप्लेसमेंट के लिए जितिन प्रसाद से बेहतर उम्मीदवार कौन हो सकता था? शायद यही वजह है कि पार्टी ने उनपर इतनी मेहरबानी दिखाई है।
उनके जरिए भाजपा यह भी संदेश देना चाहती है कि कांग्रेस पार्टी में जो विकास और ईमानदारी की छवि वाले लोग हैं, बीजेपी उन्हें भी अपने साथ लेकर चलने के लिए तैयार है।












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