GST के दायरे में डीजल-पेट्रोल? निर्मला सीतारण ने कहा- चर्चा के लिए तैयार
नई दिल्ली। डीजल और पेट्रोल के दाम इन दिनों आसमान छू रहे हैं। देश के लगभग हर शहर में पेट्रोल और डीजल के दाम अबतक के किसी भी समय में सबसे ऊपर चल रहे हैं। विपक्ष मांग कर रही है कि डीजल और पेट्रोल को जीएसटी के दायरे में लाया जाए। इसे लेकर मंगलवार को केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि वह अगली परिषद बैठक में पेट्रोल और डीजल को जीएसटी के तहत लाने पर चर्चा के लिए तैयार हैं। लोकसभा में निर्मला सीतारमण ने कहा कि पेट्रोल और डीजल को जीएसटी में लाए जाने का बिंदु सदस्यों ने उठाया है। आज महाराष्ट्र में पेट्रोल और डीजल पर सबसे अधिक कर है। मैं यह नहीं बता रही हूं कि एक राज्य कम या ज्यादा है। बात यह है कि राज्यों में भी ईंधन पर टैक्स है।

सीतारमण ने कहा कि "केंद्र भी कर लगाता है, राज्य भी कर लगाते हैं। यदि यह चिंता ईंधन कर के बारे में है तो मैं ईमानदारी से कहना चाहती हूं कि इस एजेंडे पर चर्चा के लिए तैयार हूं। आपको बता दें कि पिछले हफ्ते, सीतारमण ने कहा था कि माल और सेवा कर (जीएसटी) के तहत कच्चे तेल, पेट्रोल, डीजल, जेट ईंधन (एटीएफ) और प्राकृतिक गैस लाने का कोई प्रस्ताव नहीं था। जब 1 जुलाई, 2017 को जीएसटी लागू किया गया था, तो एक दर्जन से अधिक केंद्रीय और राज्य शुल्क, पांच वस्तुओं - कच्चे तेल, प्राकृतिक गैस, पेट्रोल, डीजल और विमानन टरबाइन ईंधन (एटीएफ) को समाहित करते हुए राजस्व को दिए गए दायरे से बाहर रखा गया था। इस क्षेत्र पर केंद्र और राज्य सरकारों की निर्भरता है।
इसका मतलब यह था कि केंद्र सरकार उन पर उत्पाद शुल्क लगाती रही, जबकि राज्य सरकारें वैट वसूलती थीं। उत्पाद शुल्क के साथ, विशेष रूप से, इन करों को समय-समय पर उठाया गया है। हालांकि करों में कमी नहीं आई है, लेकिन वैश्विक स्तर पर तेल की कीमतों में बढ़ोतरी की मांग ने पेट्रोल और डीजल को एक सर्वकालिक उच्च स्तर पर धकेल दिया है जिसके चलते उसे जीएसटी के दायरे में लाने की मांग हो रही है।












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