AB और B ब्लड ग्रुप वाले लोगों को कोरोना होने का खतरा ज्यादा - सीएसआईआर रिसर्च
वैज्ञानिक और औद्दोगिक अनुसंधान परिषद (CSIR) ने एक रिसर्च पेपर प्रकाशित किया है जो यह दर्शाता है कि AB और B ब्लड ग्रुप वाले लोग अन्य ग्रुप वाले लोगों की अपेक्षा कोविड-19 के प्रति अतिसंवेदनशील हैं।
नई दिल्ली, 11 मई। वैज्ञानिक और औद्दोगिक अनुसंधान परिषद (CSIR) ने एक रिसर्च पेपर प्रकाशित किया है जो यह दर्शाता है कि AB और B ब्लड ग्रुप वाले लोग अन्य ग्रुप वाले लोगों की अपेक्षा कोविड-19 के प्रति अतिसंवेदनशील हैं। वहीं रिसर्च पेपर में आगे कहा गया है कि 'O' ब्लड ग्रुप वाले लोग कोरोना वायरस के प्रति सबसे कम संवेदनशील हैं। इस समूह के लोगों में या तो कोरोना के लक्षण दिखाई नहीं देते या उन्हें बहुत ही कम कोरोना वायरस होता है।
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मांस का सेवन करने वाले लोग ज्यादा संवेदनशील
इसके अतिरिक्त सीएसआईआर द्वारा कराई गई राष्ट्रव्यापी सेरोपॉजिटिविटी सर्वेक्षण रिपोर्ट कहती है कि मांस का सेवन करने वाले लोग शाकाहारी लोगों की तुलना में कोरोना के प्रति ज्यादा संवेदनशील हैं। इस अंतर का मुख्य कारण शाकाहारी भोजन में शामिल की जाने वाली उच्च फाइबर सामग्री है। उच्च फाइवर युक्त भोजन सूजनरोधी होता है जोकि संक्रमण के बाद की जटिलताओं को रोक सकता है और संक्रमण को स्वयं प्रकट होने से भी रोक सकता है।
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10 हजार लोगों पर किया गया अध्ययन
सीएसआईआर ने देशभर के 10 हजार लोगों पर यह अध्ययन किया है और इस अध्ययन का आकलन 140 डॉक्टरों के समूह ने किया है। सर्वे में यह भी सामने आया कि AB और B ब्लड ग्रुप वाले लोग कोरोना के संपर्क में ज्यादा आए जबकि o ब्लड ग्रुप के लोग सबसे कम संक्रमित मिले।
इस विषय पर ज्यादा जानकारी देते हुए आगरा में पैथोलॉजिस्ट डॉ. अशोक शर्मा ने कहा कि सब कुछ व्यक्ति के ढांचे पर निर्भर करता है। उदाहरण के तौर पर उन्होंने कहा कि थैलेसीमिया से पीड़ित लोग मलेरिया से शायद ही प्रभावित हों। इसी प्रकार देखा गया है कि परिवार के सभी लोग कोरोना से संक्रमित हुए लेकिन एक व्यक्ति नहीं हुआ। यह सब अनुवांशिक ढांचे के ही कारण होता है।
उन्होंने कहा कि इस बात की पूरी संभावना है कि o ब्गड ग्रुप के लोगों की प्रतिरोधक क्षमता AB और B ग्रुप के लोगों के मुकाबले कोविड के प्रति ज्यादा बेहतर हो, हालांकि इस शोध पर अभी और अध्ययन करने की जरूरत है।इस बात का मतलब ये कतई नहीं कि O ब्लड ग्रुप वाले लोग कोविड प्रोटोकॉल का पालन करना छोड़ दें। ऐसा बिल्कुल नहीं है कि O ब्लड ग्रुप के लोगों को कोरोना नहीं हुआ।
इस रिसर्च पर प्रतिक्रिया देते हुए सीएसआईआर के वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. एस के कालरा कहते हैं कि यह केवल एक सैंपल सर्वे है न की पीयर रिव्यू वैज्ञानिक शोध पत्र। इसलिए बिना वैज्ञानिक समझ के इस सर्वे के आधार पर एकदम सटीक आकलन नहीं लगाया जा सकता है कि विभिन्न ब्लड ग्रुप के लोगों में यह असमानताएं क्यों हैं। यह कहना अभी जल्दबाजी होगी की O ब्लज ग्रुप के लोगों की प्रतिरोधक क्षमता अन्य के मुकाबले अच्छी होती है। उन्होंने आगे कहा कि यदि और बड़े पैमाने पर इस सर्वे को किया जाए तो एक नई तस्वीर सामने आ सकती है।












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