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Pegasus Case: ‘स्पाइवेयर होना गलत नहीं, Use किसके खिलाफ हो रहा ये अहम’, SC का बड़ा बयान, टाइमलाइन में सबकुछ

Pegasus Spyware Case Update: पेगासस मामला फिर चर्चा में है, और इस बार खुद सुप्रीम कोर्ट ने बेहद अहम टिप्पणी दी है। 29 अप्रैल 2025 को सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने कहा कि किसी देश के पास राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए स्पाइवेयर (Spyware)होना कोई अपराध नहीं है, लेकिन असली चिंता इस बात की है कि इसका इस्तेमाल 'किसके खिलाफ' और 'किस मकसद से' किया जा रहा है।

यह बात न्यायमूर्ति सूर्यकांत और न्यायमूर्ति कोटिश्वर सिंह की बेंच ने कही, जब पत्रकारों, वकीलों और कार्यकर्ताओं की जासूसी के आरोपों पर आधारित याचिकाओं की सुनवाई हो रही थी। कोर्ट ने इस केस की अगली सुनवाई 30 जुलाई 2025 को तय की है।

Pegasus Spyware Case Update

क्या है पेगासस केस की जड़ में?

पेगासस एक इजराइली स्पाइवेयर है जिसे सिर्फ सरकारों को बेचा जाता है। 2021 में जब अंतरराष्ट्रीय मीडिया रिपोर्ट्स में यह खुलासा हुआ कि भारत में कई पत्रकारों, नेताओं, यहां तक कि राहुल गांधी, प्रशांत किशोर और जज रंजन गोगोई से जुड़ी महिला जैसे लोगों के फोन पेगासस से निगरानी के लिए टारगेट किए गए, तब देश में बड़ा राजनीतिक भूचाल आ गया।

अब तक की जांच में क्या निकला?

  • सुप्रीम कोर्ट ने 2021 में जस्टिस रवींद्रन की अध्यक्षता में टेक्निकल पैनल बनाया था।
  • इस पैनल ने 29 डिवाइसेस की जांच की, जिनमें से 5 में मैलवेयर मिला, लेकिन पेगासस की पुष्टि नहीं हुई।
  • केंद्र सरकार ने यह बताने से इनकार किया कि उसने पेगासस खरीदा या इस्तेमाल किया।

अब क्या कह रही है कोर्ट?

  • सुप्रीम कोर्ट ने साफ कहा कि सिर्फ राष्ट्रीय सुरक्षा के नाम पर सब कुछ छिपाया नहीं जा सकता।
  • रिपोर्ट का राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा हिस्सा सार्वजनिक नहीं होगा, लेकिन कोर्ट इस बात पर विचार कर रहा है कि प्रभावित व्यक्तियों को रिपोर्ट का संपादित हिस्सा दिया जा सकता है।

सुनवाई के दौरान कौन-क्या बोला?

  • कपिल सिब्बल ने अमेरिकी कोर्ट में व्हाट्सएप बनाम NSO केस का हवाला दिया, जिसमें भारत को हैकिंग के प्रभावित देशों में बताया गया।
  • याचिकाकर्ताओं ने मांग की कि रवींद्रन समिति की रिपोर्ट सार्वजनिक की जाए या कम से कम प्रभावित लोगों को दी जाए।
  • सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि 'आतंकवादी निजता का दावा नहीं कर सकते' और सरकार को स्पाइवेयर रखने से नहीं रोका जा सकता।

क्यों है यह मामला इतना संवेदनशील?

इस केस में कई नाम सामने आए, जिनमें पत्रकार, नेता, पूर्व चुनाव आयुक्त, जज और ब्यूरोक्रेट शामिल हैं। रिपोर्ट्स के अनुसार, राहुल गांधी, प्रशांत किशोर, अशोक लवासा, रंजन गोगोई से जुड़े लोग, और कई वरिष्ठ पत्रकार टारगेट थे। NSO ने व्हाट्सएप के जरिए 2019 में 1400 लोगों के फोन हैक किए थे, भारत उनमें से एक था।

सुप्रीम कोर्ट की तीन अहम टिप्पणियां...

1. स्पाइवेयर का होना गलत नहीं है।
2. मुद्दा ये है कि उसका इस्तेमाल किसके खिलाफ हो रहा है।
3. नागरिक की निजता का अधिकार संविधान द्वारा सुरक्षित है।

Pegasus Case Timeline: पेगासस जासूसी केस टाइमलाइन

Pegasus Spyware Case Timeline

पेगासस एक बार फिर भारत में निजता और राष्ट्रीय सुरक्षा की बहस के केंद्र में है। सुप्रीम कोर्ट ने यह स्पष्ट कर दिया है कि केवल 'राष्ट्रीय सुरक्षा' कहकर सबकुछ ढका नहीं जा सकता। अब पूरा फोकस इस पर है कि क्या पेगासस का इस्तेमाल भारत में अपने ही नागरिकों के खिलाफ हुआ, और अगर हां, तो किसने किया और क्यों किया?

पेगासस स्पाइवेयर क्या है?

पेगासस एक इजरायली कंपनी NSO ग्रुप द्वारा बनाया गया स्पाइवेयर है जो मोबाइल डिवाइस को चुपचाप हैक करके उसमें मौजूद डेटा और एक्टिविटी पर नजर रख सकता है।

पेगासस विवाद भारत में कैसे शुरू हुआ?

2019 में WhatsApp ने कहा कि पेगासस के जरिए भारत सहित कई देशों में पत्रकारों और कार्यकर्ताओं के फोन हैक किए गए। 2021 में एक अंतरराष्ट्रीय मीडिया जांच में 300 से अधिक भारतीय नंबर संभावित टारगेट पाए गए।

कौन-कौन इस मामले में याचिकाकर्ता हैं?

परंजॉय गुहा ठाकुरता, एन. राम, शशि कुमार, जॉन ब्रिटास, एडिटर्स गिल्ड, और अन्य कई पत्रकार, सामाजिक कार्यकर्ता और विपक्षी नेता।

सुप्रीम कोर्ट ने क्या कदम उठाया था?

2021 में सुप्रीम कोर्ट ने जस्टिस आरवी रवींद्रन के नेतृत्व में एक टेक्निकल पैनल गठित किया। पैनल ने 29 डिवाइसेस की जांच की, जिनमें 5 में मैलवेयर मिला, पर पेगासस की पुष्टि नहीं हुई।

अब कोर्ट का क्या रुख है?

29 अप्रैल 2025 को कोर्ट ने कहा कि स्पाइवेयर का इस्तेमाल गलत नहीं, लेकिन उसका टारगेट कौन है, यही असली सवाल है। कोर्ट रिपोर्ट का सुरक्षा से जुड़ा हिस्सा सार्वजनिक नहीं करेगा, लेकिन प्रभावित लोगों को कुछ जानकारी दी जा सकती है।

क्या भारत सरकार ने पेगासस खरीदने की बात मानी है?

सरकार ने सीधे तौर पर स्वीकार या इनकार नहीं किया, लेकिन अमेरिकी रिपोर्ट्स में कहा गया है कि 2017 में भारत ने NSO से यह सॉफ्टवेयर खरीदा था।

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