सुरेन्द्र कोली को फांसी देने के लिए तैयार जल्लाद पवन की कहानी
नई दिल्ली(विवेक शुक्ला)नोएडा के निठारी कांड के अभियुक्त सुरेंद्र कोली को फांसी देने के लिए जल्लाद पवन कुमार तैयार है। वह अपने बुजुर्गों से फांसी देने की कला के बारे में पूछता रहा है। उसका यह पुश्तैनी पेशा है। इस फांसी को सही तरह से अंजाम देने के लिए प्रदेश का पुलिस महकमा सारी व्यवस्था कर रहा है। कोली को मेरठ जेल में फांसी दी जानी है।

चार पीढ़ियों से जल्लाद-
मेरठ के वरिष्ठ पत्रकार विजय प्रकाश ने बताया कि पवन कुमार के पिता मम्मू और दादा कल्लू भी जल्लाद थे। पवन का परिवार चार पीढ़ियों से जल्लाद का काम कर रहा है। दादा कल्लू जल्लाद ने1981 में रंगा और बिल्ला को फांसी दी थी। इंदिरा गांधी के हत्यारे सतवंत सिंह और केहर सिंह को भी कल्लू जल्लाद ने ही फांसी का फंदा पहनाया था। उसके दादा कल्लू ने राजधानी के सत्तर के दशक में हुए गीता-संजय चोपड़ा के हत्यारों को फांसी दी थी।
40 साल के बाद फांसी-
जानकारों ने बताया कि जब कोली को मेरठ जेल में फांसी दी जाएगी तो करीब 40 साल के बाद इधर फिर किसी को फांसी पर लटकाया जाएगा। यहां की जेल में फांसी पर लटकने वाला कोली 18वां अपराधी होगा।
मेरठ जेल में आजादी के बाद 1951 में पहली फांसी दी गई थी। नैनीताल के काशीपुरा निवासी रूपकिशोर को यह फांसी दी गई थी। मेरठ जेल में आखिरी फांसी साल 1975 में कर्मसिंह निवासी मुजफ्फरनगर को दी गई थी।
पवन तैयार है-
पवन कुमार से कल यानी गुरुवार को मेरठ के आला अफसरों ने जेल में बात की। जल्लाद पवन ने फांसीघर का निरीक्षण किया गया। इस दौरान कुछ खामियां दिखीं। जैसे कि फांसी देने वाले प्लैटफॉर्म की थोड़ी मरम्मत की जाएगी क्योंकि उसका एक हिस्सा कमजोर हो चुका है। फंदे वाली रस्सी की भी तलाश कराई गई।












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