"मौनव्रत", कांग्रेस ने शशि थरूर का नाम सदन की वक्ताओं की लिस्ट में नहीं किया शामिल, क्या कर दिया है बॉयकाट?
Operation Sindoor Shashi Tharoor and Congress : संसद के मानसून सत्र के छठें दिन 28 जुलाई 2025 को पहलगाम आतंकी हमले के बाद पाकिस्तान के खिलाफ भारत द्वारा शुरू किए गए ऑपरेशन सिंदूर पर चर्चा हुई। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने ऑपरेशन सिंदूर से जुड़े विवरण सदन के रखा। इसके बाद विपक्ष की ओर से कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई ने मोर्चा संभाला और पहलगाम हमले और ऑपरेशन सिंदूर को लेकर रक्षा मंत्री राजनाथ से कई सवाल करते हुए मोदी सरकार को घेरा।
सोमवार के मानसून सत्र में सबसे हैरान करने देने वाली बात विपक्षी कांग्रेस पार्टी सांसद शशि थरूर की चुप्पी थी। माना जा रहा था कि ऑपरेशन सिंदूर पर सदन में चर्चा के दौरान शशि थरूर कांग्रेस की ओर से अहम भूमिका निभाएंगे लेकिन ऐसा नहीं हुआ। इसकी वजह थी कि कांग्रेस ने उन्हें अपने वक्ताओं की लिस्ट में शामिल ही नहीं किया और उन्हें बहस में बोलने का मौका नहीं दिया। कांग्रेस के इस रवैये के बाद सवाल उठ रहा है कि आखिर क्या सच में पार्टी ने शशि थरूर का बॉयकाट कर दिया है? उनको पार्टी से अलग-थलग कर दिया है?

कांग्रेस ने वक्ताओं की लिस्ट में शामिल किए ये नाम
कांग्रेस पार्टी ने मानसून सत्र में ऑपरेशन सिंदूर और पहलगाम हमले पर चर्चा करने के लिए अपने पांच नेताओं के नाम वक्ताओं की सूची में शामिल किया। जिसमें कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई, प्रियंका गांधी वाड्रा, दीपेंद्र हुड्डा, प्राीणिति एस शिंदे, सप्तगिरी उलाका और बिजेंद्र एस ओला शामिल है।

"मौनव्रत", शशि थरूर के इस जवाब के क्या है मायने?
बता दें मानसून सत्र में ऑपरेशन सिंदूर पर अहम चर्चा के दिन के लिए कांग्रेस ने अपने सांसदों को व्हिप जारी किया था और अपने सदस्यों को अगले तीन दिनों तक सदन में सक्रिय भागीदारी करने की हिदायत दी थी। जिसके बाद कांग्रेस सांसद भी मानसून सत्र में हिस्सा लेने के लिए सोमवार की दोपहर संसद पहुंचे तो मीडिया ने ऑपरेशन सिंदूर पर चर्चा को लेकर सवाल किए तो उन्होंने मुस्कुराते हुए दो शब्द बोले- मौनव्रत, मौनव्रत। इसके बाद शशि थरूर को लेकर तमाम अटकलें लगनी शुरू हो गई है।
क्या सच में पार्टी ने कर दिया है बॉयकाट?
ध्यान देने योग्य बात ये है, कांग्रेस पार्टी के वरिष्ठ नेता के. मुरलीधरन ने तिरुवनंतपुरम के सांसद शशि थरूर को लेकर 21 जुलाई को बड़ा बयान दिया था। उन्होंने साफ कहा था कि राष्ट्रीय सुरक्षा पर अपना रुख नहीं बदलते, उन्हें तिरुवंतपुरम में किसी भी कांग्रेस कार्यक्रम में आमंत्रित नहीं किया जाएगा। पूर्व केंद्रीय मंत्री मुरलीधरन ने कहा था, "थरूर अब हमारे नहीं रहे। अब पार्टी का राष्ट्रीय नेतृत्व यह तय करेगा कि थरूर के खिलाफ क्या कार्रवाई की जाए।" इसके बाद अब वक्ताओं की लिस्ट से नाम नहीं शामिल नहीं किए जाने पर साफ है कि कांग्रेस अपने दिग्गज नेता का बॉयकाट कर चुकी है।

शशि थरूर से क्यों नाराज है कांग्रेस?
गौरतलब है कि कांग्रेस सांसद शशि थरूर का लंबे समय से मिजाज़ केंद्र सरकार और कांग्रेस के लिए बदला हुआ है। कई मौकों पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की शशि थरूर तारीफ कर चुके हैं। इसके अलावा भारत-पाकिस्तान युद्ध के समय भी शशि थरूर ने केंद्र सरकार के साथ खड़े नजर आए। इस दौरान उन्होंने ऑपरेशन सिंदूर के तहत पाकिस्तान के आतंकी ठिकानों को तबाह करने के लिए की गई सर्जिकल स्ट्राइक की भी सराहना की थी।
शशि थरूर द्वारा मोदी सरकार की प्रशंसा करने के कारण कांग्रेस पार्टी में उनका विरोध हुआ। यहां तक शशि थरूर के भाजपा में शामिल होने के दावे किए जाने लगे थे। हालांकि शशि थरूर ने साफ कर दिया था कि उनका ऐसा कोई इरादा नहीं है। साथ ही उन्होंने कहा था, "पार्टी मेरे विचार पार्टी लाइन से अलग हो सकते हें ओर इससे उन्हें कोई फर्क नहीं पड़ता।"
शशि थरूर ने प्रतिनिधि मंडल का किया था नेतृत्व
गौरतलब है कि मोदी सरकार द्वारा ऑपरेशन सिंदूर पर भारत का पक्ष अन्य देशों में रखने के लिए एक विशेष प्रतिधिमंडल गठित किया गया था। जिसमें से एक प्रतिनिधि मंडल का नेतृत्व कांग्रेस सांसद शशि थरूर को सौंपा गया था। उनहोंने अमेरिका समेत अन्य देशों में ऑपरेशन सिंदूर और भारत-पाकिस्तान संघर्ष को लेकर भारत देश का पक्ष बड़ी मजबूती से रखा। जिसके लिए मोदी सरकार से उन्हें खूब सराहना भी मिली थी।












Click it and Unblock the Notifications