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FATF: कंगाल पाकिस्तान को इसके बाद कर्ज के भी पड़ेंगे लाले

बेंगलुरु।अब वो दिन दूर नहीं जब दुनिया भर में कटोरा लेकर भीख मांगने वाले कंगाल पाकिस्तान को कोई देश कर्ज भी नहीं देगा। जिसके बाद देश की जनता का हक मार कर आतंकवाद को फंडिंग करने वाला पाक चाह कर भी आर्थिक बदहाली से उबर नहीं पाएगा। पाकिस्तान की तबाही पर यह आखिरी कीला फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स (एफएटीएफ) द्वारा उस ब्लैकलिस्ट किए जाने पर होगा।

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बता दें आतंकी फंडिंग मामले को लेकर पाकिस्तान के गले पर एफएटीएफ की काली सूची में डाले जाने की तलवार लंबे समय से लटक रही हैं। पाकिस्‍तान को ब्‍लैक लिस्‍ट करने के सबंध में अंतिम फैसला अक्‍टूबर में एफएटीएफ की बैठक में लिया जाएगा। एफएटीएफ ने पिछले साल पाकिस्तान को ग्रे लिस्ट में डाल दिया था। पाकिस्तान पर आतंकी फंडिग और मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े मामले में कार्रवाई ना करने का आरोप है।अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आतंकी फंडिंग पर नजर रखने वाले एफएटीएफ की 13 से 18 अक्टूबर तक पेरिस में अहम बैठक होने वाली है। इसमें आतंकी फंडिंग पर अंकुश लगाने के लिए पाकिस्तान द्वारा उठाए गए कदमों का आकलन किया जाएगा। इसमें खरा नहीं पाए जाने पर उसे काली सूची में डाला जा सकता है।अभी वह एफएटीएफ की ग्रे सूची (निगरानी) में है।

पाक की अर्थव्यवस्था को होगा 10 अरब डॉलर का नुकसान

अब तक कि रिपोर्टों के अनुसार पाकिस्तान का ब्लैकलिस्ट होना लगभग तय है। यदि एफएटीएफ भी एपीजी के फैसले पर अपनी मुहर लगा देता है तो पाकिस्तान को कर्ज के लाले पड़ा जाएंगे। विदेशी देश और अंतरराष्ट्रीय वित्तीय संस्थाएं उसे कर्ज देना बंद कर देंगी। पिछले दिनों अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) की प्रतिनिधि टेरीजा सांचेज ने कहा था कि अगर पाकिस्तान एफएटीएफ की ग्रे लिस्ट यानी निगरानी सूची से बाहर नहीं निकला तो उसका हालिया स्वीकृत लोन भी खतरे में पड़ जाएगा। पहले पाक के विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी ने भी चिंता जताई थी कि अगर उनका देश एफएटीएफ द्वारा ब्लैक लिस्ट किया गया तो पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था को 10 अरब डॉलर का नुकसान होगा।

कोई संस्‍था नहीं देगी ऋण

अर्थशास्‍त्री की मानें तो एफएटीएफ द्वारा पाकिस्‍तान को ब्‍लैक लिस्‍ट करने का फैसला उसके लिए दीर्घ और अल्‍पकाल के लिए बेहद बुरा होगा। इस फैसले के बाद पाकिस्‍तान न तो कहीं से ऋण ले सकेगा और न ही उसको कोई संस्‍था ऋण दे सकेगी। इसका एक असर ये भी होगा कि इस फैसले के बाद मूड़ी एस एंड पी (स्‍टेंडर्ड एंड पूअर्स) जैसी वैश्विक वित्‍तीय संस्‍थाएं पाकिस्‍तान की रेटिंग को गिरा देंगी। यह रेटिंग तय करती हैं कि उस देश में निवेश करना कितना सही होता है। रेटिंग गिरने की वजह से वहां पर हो रहा बाहरी निवेश बंद हो जाएगा। इसका सीधा असर उसकी अर्थव्‍यवस्‍था पर पड़ेगा। इस फैसले के बाद अब आईएमएफ समेत वर्ल्‍ड बैंक से पाकिस्‍तान कोई भी ताजा ऋण नहीं ले सकेगा। ये इसलिए बेहद खास है क्‍योंकि पाकिस्‍तान की अर्थव्‍यवस्‍था वर्षों से ऋण या मदद पर टिकी हुई है।

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ब्लैकलिस्ट होने के बाद पाक का ये होगा हाल

अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष, विश्व बैंक, एशियाई विकास बैंक सहित वैश्विक वित्तीय संस्थाएं इस देश की साख को गिरा देंगी। इससे इसे कर्ज मिलना मुश्किल हो जाएगा। मूडी, एस एंड पी और फिच जैसी क्रेडिट रेटिंग एजेंसियां देश की रेटिंग गिरा सकती हैं। इससे इसकी अर्थव्यवस्था डामाडोल हो सकती है। निवेशक पीछे हट सकते हैं। वहां का वित्तीय क्षेत्र ढह सकता है। 126 शाखाओं वाला सबसे बड़ा अंतरराष्ट्रीय बैंक स्टैंडर्ड चार्टर्ड सहित सिटी बैंक, ड्यूश बैंक अपना कारोबार समेट सकते हैं।विदेशी लेनदेन और विदेशी मुद्रा प्रवाह में कमी के चलते पहले से ही सिर से ऊपर चढ़ा पाकिस्तान का चालू खाता घाटा और बढ़ सकता है। विदेशी निवेशकों और कंपनियों को यहां कारोबार करने से पहले हजार बार सोचना पड़ सकता है। लिहाजा विदेशी निवेश के नाम पर धेला न मिलने के लिए भी इस देश को तैयार रहना होगा। यूरोपीय देशों को निर्यात किए जाने वाले चावल, कॉटन, मार्बल, कपड़े और प्याज सहित कई उत्पादों पर प्रतिकूल असर पड़ेगा। लिहाजा घरेलू उत्पादकों को भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है।

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पाक की बर्बादी पर एपीजी लगा चुका है मुहर

पिछले दिनों एफएटीएफ से संबंधित संस्‍था एशिया पेसेफिक ग्रुप (एपीजी) ने टेरर फंडिंग मामले में पाकिस्‍तान को ब्‍लैक लिस्‍ट करने की सिफारिश की थी। बैठक के दौरान एपीजी के सदस्‍यों ने उसको आतंकवाद पर लगाम कसने में विफल पाया जिसके बाद ही उसको काली सूची में डालने का फैसला लिया गया था। यह इस लिहाज से भी बेहद खास है क्‍योंकि इस फैसले का असर अक्‍टूबर में होने वाली एफएटीएफ की बैठक में देखने को जरूर मिलेगा। एफएटीएफ के 27 प्वाइंट एक्शन प्लान की 15 महीने की समय-सीमा खत्म हो रही है। आस्‍ट्रेलिया के कैनबरा में चली एपीजी की बैठक में यह पाया गया कि आतंकवाद की फंडिंग रोकने को लेकर जो 40 मानक बनाए गए थे उनमें से 32 का पालन पाकिस्‍तान ने नहीं किया। इतना ही नहीं वित्तीय पोषण और धन शोधन के 11 में से 10 मानकों को भी वह पूरा नहीं कर सका। एशिया पेसेफिक ग्रुप द्वारा पाकिस्‍तान को ब्‍लैक लिस्‍ट करने का सिफारिश अक्‍टूबर में होने वाली FATF की बैठक पर जरूर पड़ेगा। यह फैसला उसकी आर्थिक कमर को तोड़कर रख देगा।

एफएटीएफ की बस मुहर लगनी है बाकी

बता दें कि एपीजी पूरी दुनिया में आतंकवाद को होने वाली फंडिंग पर निगाह रखता है और इस उस आधार अपनी रिपोर्ट एफएटीएफ को सौंपता है। इसके बाद ही एफएटीएफ संबंधित देश पर कार्रवाई करते हुए उसको काली सूची में डालता है। यहां पर ये भी बता दें कि एफएटीएफ ने फिलहाल पाकिस्‍तान को ग्रे लिस्‍ट में डाल रखा है। ग्रे लिस्‍ट में डालने का अर्थ इस तरह से भी समझा जा सकता है कि एफएटीएफ ने माना है कि पाकिस्‍तान आतंकवाद को फंडिंग कर रहा है, लेकिन उसको इस पर कार्रवाई करने की चेतावनी देते हुए कुछ समय दिया गया था। इस दौरान चेतावनी स्‍वरूप उसको ग्रे लिस्‍ट में शामिल किया गया है। लेकिन अब जबकि एपीजी ने पाकिस्‍तान को काली सूची में डाल दिया है तो उसका एफएटीएफ द्वारा इस पर ही मुहर लगाना तय माना जा रहा है।

पाकिस्तान को सता रहा डर

आतंकी फंडिंग मामले को लेकर पाकिस्तान को एफएटीएफ की काली सूची में डाले जाने का अंदेशा हो चुका है। इसी डर से पाकिस्तान का 20 सदस्यीय दल बैंकॉक में वित्तीय कार्रवाई कार्य बल (एफएटीएफ) के सामने पेश होगा। पाकिस्तानी दल और एफएटीएफ की आमने-सामने की बैठक होगी। मनी लॉन्ड्रिंग और आतंकी फंडिंग पर धन लगाने के लिए पाकिस्तान के साथ यह बैठक आयोजित की रही है। इस दल में पाकिस्तानी दल में आर्थिक मामलों के संघीय मंत्री हम्माद अजहर, संघीय जांच एजेंसी, स्टेट बैंक, फेडरल बोर्ड ऑफ रेवेन्यू, सिक्योरिटीज एंड एक्सचेंज कमीशन ऑफ पाकिस्तान, एंटी नारकोटिक्स फोर्स और खुफिया एजेंसियों के प्रतिनिधि शामिल हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि वार्ता का नतीजा 13 सितंबर तक जारी रहेगा। जिसमें यह तय होगा कि पाकिस्तान का नाम ग्रे सूची में रहेगा या इसे ब्लैक लिस्ट में जोड़ा जाएगा।

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एफएटीएफ में क्‍या होगा चीन का रुख

ऐसे में यह देखना होगा कि जिस तरह से दुनिया के दूसरे अंतरराष्ट्रीय मंचों पर चीन पाकिस्तान की मदद करता है उसी तरह एफएटीएफ में उसका बचाव करता है या नहीं। फिलहाल इसको भारत की बड़ी जीत भी कहा जा सकता है। गौरतलब है कि भारत काफी समय से एफएटीएफ में पाकिस्‍तान को ब्‍लैक लिस्‍ट करवाने की कोशिश के तहत आतंकवाद पर टे‍रर फंडिंग के सुबूत देता रहा है। इसके अलावा कई दूसरे देशों ने भी इस मुद्दे पर भारत का साथ दिया है। कई देश खुलेतौर पर पाकिस्‍तान को आतंकी देश बताते रहे हैं।

आतंकी संगठन सोने और बंध पत्रों के जरिए जुटाते हैं धन

महत्वपूर्ण हैं कि एफएटीएफ ने पाकिस्तान सरकार से आभूषणों की बिक्री और आर्थिक बंध पत्रों के जरिये लेन-देन पर नजर रखने के लिए कहा था। बंध पत्र सोने के बदले जारी किया जाता है और यह ग्राहक को नकद भुगतान की सुविधा देता है। पाकिस्तान में आतंकी संगठन सोने और बंध पत्रों के जरिये चंदा प्राप्त करते हैं और धन का भुगतान करते हैं। एफएटीएफ ऐसी फंडिंग पर नजर रखती है और ऐसी सरकारों के खिलाफ कार्रवाई करता है जो आतंकी संगठनों को पालती-पोसती हैं। पाकिस्तान में बंध पत्र वास्तव में वित्त मंत्रालय की लॉटरी जैसी व्यवस्था है और सरकार के भुगतान के वादे पर जारी किया जाता है। एफएटीएफ को सुबूत मिले थे कि आतंकी संगठन टेलीकॉम बैंकिंग के जरिये यह बंध पत्र जारी कराते हैं और इसके बाद उनके भुगतान से धन प्राप्त करते हैं।

एफएटीएफ

जी-7 देशों की पहल पर 1989 में गठित एफएटीएफ एक अंतर सरकारी संगठन है। गठन के समय इसके सदस्य देशों की संख्या 16 थी। 2016 में ये संख्या बढ़कर 37 हो गई। भारत भी इस संस्था का सदस्य देश है। शुरुआत में इसका मकसद मनी लॉड्रिंग पर रोक लगाना था, लेकिन 2001 में अमेरिका पर हुए आतंकी हमलों के बाद आतंकी संगठनों का वित्त पोषण भी इसकी निगरानी के दायरे में आ गया। एफएटीएफ दुनिया के उन देशों की दो सूची बनाती है जो मनी लॉड्रिंग और आतंकी संगठनों को मिलने वाले धन को रोकने या उसके खिलाफ कदम उठाने में पीछे रहते हैं। इस आशय की पहली सूची ग्रे और दूसरी ब्लैक होती है।

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