कोरोना का ना भूलने वाला 'दर्द', आज कर्ज चुकाने के लिए गिड़गिड़ाने को मजबूर परिवार
नई दिल्ली, 02 अगस्त: कोरोना वायरस ने पूरे देश को भारी नुकसान पहुंचाया है। लाखों लोगों ने इस वायरस की चपेट में आकर अपनी जिंदगी गंवा दी। वहीं हजारों ऐसे लोग भी हैं, जिसको ना भूलने वाला दर्द मिला हैं। कई परिवार इस जानलेवा वायरस की चपेट में आकर तबाह हो गए। तो कई परिवारों को आर्थिक नुकसान झेलना पड़ा। लोगों ने अपने परिवार के सदस्यों को बचाने के लिए क्या कुछ नहीं किया। ऐसे में जहां उनके लोग तो बच गए, लेकिन अब वो पैसों की तंगी से जंग लड़ रहे हैं। ऐसी कई कहानी है, जो कोरोना के इलाज कराने के लिए कर्ज से शुरू हुई। हालांकि उनके परिवार का मेंबर तो सलामत है, लेकिन अब वो कर्ज चुकाने के लिए गिड़गिड़ाने को मोहताज हो गए हैं।

दिल्ली के एक बड़े अस्पताल में अपने 25 साल के बेटे का कोरोना का इलाज कराने के बाद कमोबेश अनिल शर्मा के कुछ ऐसे ही हालात हैं। आज के मौजूदा वक्त में वो कर्ज में पूरी तरह से डूबे हुए हैं। उन्होंने अपने बेटे की जान बचाने के लिए कुछ नहीं सोचा और पैसों का इंतजाम कर अपने बेटे को सही सलामत घर लाने के लिए हर वो प्रयास किया, जो एक पिता करता है, हालांकि अब उनका बेटा घर पर हैं और कोरोना से रिकवरी कर रहा है, लेकिन वो कर्ज से पूरी तरह से घिर चुके हैं। उन्होंने बताया कि जब उनका अस्पताल में एडमिट हुआ तो डॉक्टर ने बताया कि उसकी स्थिति काफी गंभीर है। वो कोरोना से पूरी तरह से संक्रमित था।
33 लाख कर्ज में डूबे अनिल शर्मा
अनिल शर्मा के मुताबिक बेटे की स्थिति बहुत दयनीय थी, जो सबसे पहले 6 लाख रुपए इकट्ठे करके अस्पताल मेंं भर्ती कराया और इलाज शुरू कराया। फिर इसके बाद पैसों की और जरूरत पड़ी तो कुछ और दोस्तों से मदद मांगी, जिसके बाद उन्होंने करीब 18 लाख रुपए फिर अपने बेटे के इलाज में खर्च किए। आज के वक्त में वो करीब 33 लाख के कर्ज के बोझ में दबे हुए हैं।
कर्ज लेकर बहन का शव छुड़ाया
ऐसी ही एक दर्दनाक कहानी नार्थ ईस्ट की है, जहां डायना खुमानथेम ने कर्ज लेकर और घर से जेवरात गिरवी रखकर अपनी बहन का शव अस्पताल से लिया था। भारत में ऐसी सैकड़ों परिवार हैं, जो कोरोना के बाद कर्ज में डूबे हुए हैं। डायना ने बताया कि उनको लगा कि अस्पताल में एक दिन का खर्चा 10 हजार के करीब होगा, लेकिन जब पता लगा कि वो खर्चा एक लाख रुपए था, जो बहुत ज्यादा था।
Video में देखें कर्ज से जूझते परिवार की कहानी
कोरोना ने लोगों को ऐसे बुरे वक्त का सामना करवाया है, जिसका दोष वो अपनी किस्मत को भी नहीं दे सकते। एक इंसान अपनी आंखों के सामने अपने परिवार के सदस्य को दम तोड़ना कभी नहीं देख सकता, लेकिन ना जानें देश में ऐसे कितने परिवार होंगे, जिन्होंने इस मंजर को अपनी आंखों से देखा और सहन किया होगा। देश में अपनों को बचाने के लिए कर्ज में डूबे परिवारों की कहानी हमारे इर्द-गिर्द घूम रही है। लाखों परिवार को कोरोना ने ना भरने वाला जख्म दिया है।
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