Pahalgam Terror Attack: "गाइड बना फरिश्ता" बीजेपी कार्यकर्ता ने बताया 'नजाकत ने बच्चों और पत्नी की बचाई जान'

Pahalgam Terror Attack: पहलगाम में जब पर्यटकों पर हमला हुआ तो छत्तीसगढ़ भाजपा युवा विंग के कार्यकर्ता अरविंद अग्रवाल वहां मौजूद थे। उन्होंने बताया कि इस दौरान वहां स्थानीय गाइड नजाकत अहमद शाह उपस्थित थे। उन्होंने मेरे परिवार की जान बचाई।

द इंडियन एक्सप्रेस के अनुसार अरविंद अग्रवाल ने बताया कि जब मंगलवार को हमला हुआ तो वे अपने कैमरे से शांत पहलगाम की खूबसूरती कैद कर रहे थे। उनकी पत्नी पूजा और चार साल की बेटी उनसे कुछ ही दूरी पर थीं, जिनके साथ नजाकत मौजूद था। इसी दौरान आतंकियों ने अंधाधुंध फायरिंग शुरू कर दी। उन्होंने कहा कि एक घंटे तक उन्हें नहीं पता था कि उनका परिवार सुरक्षित है या नहीं। बाद में अस्पताल में जाकर उन्होंने आखिरकार अपनी पत्नी और बेटी को देखा। अग्रवाल ने कहा, "मुझे नहीं पता कि अगर नज़ाकत वहां नहीं होता तो क्या होता। मेरी पत्नी के कपड़े फटे हुए थे, लेकिन स्थानीय लोगों ने उसे पहनने के लिए कपड़े दिए।"

Pahalgam Terror Attack

नजाकत ने बच्चों और पत्नी की बचाई जान: अरविंद अग्रवाल

उन्होंने कहा कि नजाकत ने न केवल अग्रवाल के परिवार को बचाया, बल्कि दूसरों को भी सुरक्षित स्थान तक पहुंचाया। लेकिन इस बहादुरी की कीमत उसे बहुत भारी पड़ी। हमले में उसका चचेरा भाई सैयद आदिल हुसैन शाह मारा गया - जो पर्यटकों को घोड़े पर सैर कराता था। लोगों ने बताया कि आदिल आतंकियों को रोकने की कोशिश कर रहा था जब उन्हें गोली मार दी गई।

इस हमले में 25 पर्यटकों और 1 स्थानीय नागरिक की मौत हुई, और दर्जनों लोग घायल हुए। लेकिन इस भयावह त्रासदी में नजाकत जैसे लोगों की इंसानियत, बहादुरी और बलिदान ने धरती का स्वर्ग कहे जाने वाले कश्मीर में कश्मीरियत की नई परिभाषा गढ़ दी।

आतंकवादियों के हमारे पास आने से पहले ही हम वहां से भाग निकले: नजाकत

नजाकत ने इंडियन एक्सप्रेस को बताया, "हम जहां खड़े थे, वहां से करीब 20 मीटर दूर जिपलाइन के पास गोलीबारी हो रही थी। मैंने सबसे पहले अपने आस-पास के सभी लोगों से जमीन पर लेटने को कहा। फिर मैंने बाड़ में एक दरार देखी और बच्चों को उस ओर ले गया। आतंकवादियों के हमारे पास आने से पहले ही हम वहां से भाग निकले।"

नजाकत ने इंडियन एक्सप्रेस को बताया कि उन्हें सुरक्षित जगह पर पहुंचाने के बाद, "मैं वापस लौटा तो अग्रवाल जी की पत्नी दूसरी दिशा में भाग गई थीं। मैंने उन्हें करीब डेढ़ किलोमीटर दूर पाया और अपनी कार में वापस लाया। मैं उन्हें सुरक्षित श्रीनगर ले गया।"

पर्यटन हमारी रोज़ी-रोटी है: नजाकत

उन्होंने कहा कि पर्यटन हमारी रोज़ी-रोटी है। इसके बिना हम बेरोज़गार हैं और हमारे बच्चों की शिक्षा इस पर निर्भर करती है। आतंकवादी हमला हमारे दिल पर हमला जैसा है। हमने अपनी दुकानें और व्यवसाय बंद कर दिए हैं और विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। हम अपने आतिथ्य के लिए जाने जाते हैं और मुझे विश्वास है कि पर्यटक आएंगे।

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