चंद मिनटों में बदल गई खुशियां, पहलगाम आतंकी हमले में मरने वाले परिवारों की दिल दहला देने वाली दास्तान

Pahalgam Terror Attack Survivor Stories: 22 अप्रैल का दिन जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में तब खौफनाक मंजर लेकर आया, जब कई परिवार घाटी की हसीन वादियों में अपनी जिंदगी के सुकून के पल बिता रहे थे। उन्हें कहां पता था कि यहां से उनके लिए दुनिया बदल जाएगी। सुकून और सैर-सपाटे के लिए पहलगाम पहुंचे लोग कायराना हरकत के चलते ताबूतों में लौटे हैं।

आतंकियों की इस बर्बरता ने एक बार फिर साबित कर दिया कि आतंक का कोई मजहब नहीं होता। जब वो दरकती है तो अपने पीछे सिर्फ आंसू, लाशें और बिखरे किरदार छोड़ जाती है।

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Pahalgam Terror Attack: जब इंसानियत बिलख पड़ी...

पहलगाम टेरर अटैक में कई ऐसी कहानियां हैं जिसके किरदार पत्थर को पिघला सकते हैं। यहां पर चंद मिनटों में ही खुशियां मातम में बदल गईं और कई परिवार पूरी तरह से उजड़ गए। दहशतगर्दों का शिकार बनने वाले सभी लोग आम नागरिक हैं और अपनी खुशियां मनाने यहां आएं थे। कोई हनीमून मना रहा था, कोई शादी की सालगिरह तो कई अपने दोस्तों के साथ घूमने आए थें।

यह हमला सिर्फ गोलियों से नहीं हुआ, बल्कि यह उन उम्मीदों पर हुआ जो हर यात्री अपने दिल में लेकर निकलता है। ये कहानी सिर्फ आतंकवाद की क्रूरता नहीं, बल्कि उन लोगों की भी है जो आखिरी सांस तक अपने परिवार, अपने धर्म और अपने प्यार के लिए खड़े रहे।

हर तस्वीर में मुस्कुराते चेहरे थे, और अब हर परिवार में एक तस्वीर के नीचे दीपक जल रहा है। यहां आपको पहलगाम आतंकी हमले के उन छ: किरदारों से परिचय हैं जिनकी खुशियां छीन ली गई...

1. सात दिन की दुल्हन, आंखों के सामने सूनी हुई मांग

करनाल (हरियाणा) के रहने वाले भारतीय नौसेना के लेफ्टिनेंट विनय नरवाल (26) ने अभी सात दिन पहले ही गुरुग्राम की हिमांशी नरवाल से शादी की थी। प्यार में डूबी एक नई शुरुआत, जो पहलगाम के शांत वातावरण में एक खूबसूरत हनीमून की तरह शुरू हुई थी। लेकिन 22 अप्रैल को विनय को आतंकियों ने AK-47 से गोली मार दी सीने, गले और बांह पर गोलियों की बौछार कर दी और सपनों की उड़ान अधूरी रह गई।

हिमांशी, जो कुछ दिन पहले दुल्हन बनी थी, अब विधवा बन चुकी है। विनय के परिवार का गम, हिमांशी के टूटे सपने और राष्ट्र की शान का यूं बर्बर अंत, पूरे देश को झकझोर गया। नौसेना प्रमुख एडमिरल दिनेश के. त्रिपाठी ने एयरपोर्ट पर उन्हें अंतिम सलामी दी। हिमांशी की आँखों से बहता आंसू हर किसी के दिल पर चोट कर रहा था।

2. अपनी जान देकर बचाई पत्नी की जिंदगी

सुशील नथानियल, इंदौर के वीणा नगर निवासी, एक सरल और सच्चे इंसान थे। वे एलआईसी की सैटेलाइट शाखा में कार्यरत थे और परिवार के साथ कश्मीर घूमने गए थे। आतंकियों ने पहले उन्हें घुटनों पर बैठाया और जब उन्होंने अपना धर्म 'ईसाई' बताया, तो उन्हें कलमा पढ़ने के लिए मजबूर किया गया। उन्होंने इनकार किया... और फिर गोलियों की बौछार से सुशील को खत्म कर दिया गया।

लेकिन इससे पहले, उन्होंने अपनी पत्नी जेनिफर को छिपा दिया और खुद सामने खड़े हो गए। उनकी बेटी आकांक्षा को पैर में गोली लगी, लेकिन उनकी बहादुरी ने उनके परिवार को बचा लिया। एक इंसान, जिसने धर्म के नाम पर हिंसा के आगे न झुकते हुए, अपने परिवार के लिए बलिदान दे दिया।

3. रायपुर के दिनेश को मिला सालगिरह पर मौत का साया

रायपुर के स्टील कारोबारी दिनेश मिरानिया (45) अपनी शादी की सालगिरह मनाने परिवार समेत बैसरन घाटी गए थे। लेकिन वो जश्न, बारूद में बदल गया। आतंकियों ने दिनेश को उनकी पत्नी और बच्चों के सामने गोली मार दी। पत्नी के चेहरे पर बारूद के छींटे गहरे घाव छोड़ गए। उनकी आंखों में अब भी वो मंजर तैरता होगा-पति की मौत, बच्चों का चीखना, और इंसानियत की हार।

4. IB ऑफिसर मनीष रंजन की शहादत

बिहार के मनीष रंजन, हैदराबाद में IB (इंटेलिजेंस ब्यूरो) के सेक्शन ऑफिसर थे। अपने परिवार के साथ छुट्टियां मनाने आए थे। लेकिन आतंकियों ने उन्हें भी चुन लिया। उनकी पत्नी और बच्चे सब कुछ देखते रहे, लेकिन कुछ कर नहीं सके। अरुही गांव का यह लाल अब तिरंगे में लिपटकर लौटा है।

5. दो साल की शादी, और अधूरी प्रेम कहानी

नीरज उधवानी, जयपुर निवासी, जो UAE में कार्यरत थे, कुछ दिन पहले ही पत्नी संग कश्मीर आए थे। उनकी शादी को दो साल ही हुए थे। पत्नी होटल में थी, और नीरज कभी वापस नहीं लौटे। उनकी शव यात्रा अब जयपुर लौटेगी, लेकिन साथ लौटेगा अधूरा प्रेम, और एक जीवन भर का सन्नाटा।

6. गुजरात के तीन उजड़े घर

गुजरात के सूरत और भावनगर से पहलगाम पहुंचे 20 लोगों के समूह में से तीन लोग-शैलेशभाई कलथिया, यतीशभाई परमार और उनका बेटा स्मित अब इस दुनिया में नहीं रहे। आतंकियों ने काजलबेन को तो छोड़ दिया, लेकिन उनके पति और बेटे को मार डाला। उनके लौटने की उम्मीदें, पहलगाम की बर्फ में हमेशा के लिए दफन हो गईं।

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