जुलाई-अगस्त में जीनोम सीक्वेंसिंग के लिए भेजे गए 16,000 कोविड-19 सैंपल, केंद्र सरकार ने दी जानकारी
नई दिल्ली, सितंबर 06। दुनियाभर में कोरोना संक्रमण को फैले अबतक डेढ़ साल से अधिक का समय हो चुका है। इसके बावजूद भी इस वायरस की उत्पत्ति की सटीक जानकारी अबतक विशेषज्ञों के पास नहीं है। अब तक इस वायरस पर तरह-तरह के शोध जारी हैं। इसी बीच केंद्र सरकार ने सोमवार को बताया है कि कोविड-19 के करीब 16,000 सैंपल को व्होल जीनोम सीक्वेंसिंग (Whole Genome Sequencing) के लिए भेजा गया है।

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने दी जानकारी
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने इस संबंध में एक बयान जारी किया। बयान के मुताबिक, जुलाई और अगस्त में प्रहरी साइटों द्वारा 16,000 से अधिक कोविड -19 सैंपल SARS-COV-2 के वेरिएंट की जांच के लिए 'संपूर्ण जीनोम अनुक्रमण (WGS)' के लिए भेजे गए थे। मंत्रालय ने आगे यह भी कहा कि उन्होंने कुछ मीडिया रिपोर्ट्स देखी, जिसमें यह आरोप था कि भारत में कोरोना के मामले लगातार बढ़ने के बावजूद जीनोम सीक्वेंसिंग और कोविड-19 के विश्लेषण में तेजी से गिरावट आई है।
मंत्रालय ने बताया, जुलाई के बाद से, सैंपलों के विवरणों को सटीक रूप से साझा करने और WGS परिणामों के समय पर संचार के लिए, प्रहरी साइटों द्वारा WGS के लिए सैंपलों के डेटा को एकीकृत स्वास्थ्य सूचना मंच (IHIP) पोर्टल के माध्यम से साझा किया जा रहा है।
जुलाई और अगस्त में भेजे गए सैंपल
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के मुताबिक, यह पोर्टल सैंपलों के विवरण और WSG परिणामों का रियल टाइम जानकारी देना सुनिश्चित करता है। मंत्रालय ने बताया कि इसके लिए जुलाई में 9,066 और अगस्त में 9,969 सैंपल भेजे गए थे।मंत्रालय के बयान में यह भी बताया गया कि सैंपल हर तरह के भौगोलिक क्षेत्र से लिए गए हैं। आपको बता दें कि, SARS-COV-2 की जीनोमिक निगरानी वायरस के चिंताजनक वैरिएंट्स संबंधित घटनाक्रमों और इसकी व्यापकता की जानकारी प्राप्त करने के लिए महत्वपूर्ण है।












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