Opposition meet: लीड रोल में आ सकते हैं शरद पवार, सेट कर सकते हैं भाजपा-विरोधी एजेंडा
बिहार की राजधानी पटना में 23 जून को होने वाली विपक्षी दलों की बैठक का समय जैसे-जैसे नजदीक आ रहा है, इसको लेकर कुछ महत्वपूर्ण जानकारियां सामने आ रही हैं। इस विपक्षी एकता में अब धीरे-धीरे एनसीपी सुप्रीमो शरद पवार की भूमिका प्रभावी नजर होने लगी है।
वैसे तो विपक्षी दलों की यह बैठक बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की अध्यक्षता में होने वाली है। लेकिन, सूत्रों के अनुसार इसमें शरद पवार को विपक्ष का एजेंडा सेट करने की जिम्मेदारी मिल सकती है। गौरतलब है कि हाल ही में पवार ने अपनी पार्टी में अगली पीढ़ी का चेहरा तय करके अपना राजनीतिक भार कुछ कम किया है।

न्यूनतम साझा कार्यक्रम बना सकते हैं पवार!
पवार को विपक्षी गठबंधन के लिए न्यूनतम साझा कार्यक्रम (सीएमपी) की रूप-रेखा तैयार करने का महत्वपूर्ण काम सौंपे जाने की संभावना है। आमतौर पर किसी भी गठबंधन में न्यूनतम साझा कार्यक्रम तब तय किया जाता है, जब चुनाव के बाद राजनीतिक दल इकट्ठे होते हैं। लेकिन, अबकी बार पवार ही इसे पहले से पूरा करने की पैरवी कर रहे हैं।
भाजपा-विरोधी एजेंडा तय करेंगे शरद पवार!
लेकिन, पटना में विपक्षी दलों की पहली संयुक्त बैठक होने से पहले इसे तैयार करना काफी अहम है। कहा जा रहा है कि कॉमन मिनिमम प्रोग्राम पहले ही इसलिए तैयार करने की बात हो रही है, ताकि विपक्षी कुनबे को एकजुट रखने में आसानी हो और सहयोगी दलों को चुभने वाले मुद्दों को पहले ही उससे दूर कर दिया जाए। सबको एकजुट रखने के लिए इसमें भाजपा-विरोधी एजेंडे को प्राथमिकता मिलने की संभावना है।
पवार के नाम पर सहमति बनने की बात
पवार का नाम इस काम के लिए इसलिए सामने आ रहा है, क्योंकि वह राजनीति के माहिर खिलाड़ी हैं और सभी विपक्षी दलों में उनके नाम की स्वीकार्यता बाकियों से काफी ज्यादा प्रभावी है। सूत्रों के मुताबिक इस कार्य के लिए उनके नाम पर लगभग सहमति बन चुकी है।
16 विपक्षी दलों के पहुंचने की संभावना
23 जून की बैठक में अबतक विपक्ष के 16 दलों के पहुंचने की संभावना है। कांग्रेस को छोड़कर बाकी विपक्षी दलों में अबतक यही आम राय नजर आई है कि पहले बीजेपी और पीएम मोदी से लोकसभा चुनावों में मिलकर मुकाबला करें और प्रधानमंत्री उम्मीदवार के मुद्दे को उससे पहले कतई न छेड़ें। क्योंकि, यह विपक्षी दलों की ऐसी दुखती रग है जिसको छूते ही कोहराम मचने की आशंका है।
पवार पहले ही कर चुके हैं सीएमपी की पैरवी
ऐसी परिस्थतियों में पवार को गठबंधन की ओर से इतनी बड़ी जिम्मेदारी मिलने से मतदाताओं के बीच बहुत बड़ा संदेश जा सकता है। वैसे जहां तक पवार की बात है तो वह पिछले महीने ही विपक्षी गठबंधन बनने से पहले सीएमपी का मुद्दा उठा चुके हैं।
उन्होंने 6 मई, 2023 को कहा था, 'अगले 10-11 महीनों में कई जगहों पर चुनाव होने हैं.....नीतीश कुमार, अरविंद केजरीवाल, चंद्रशेखर राव और ममता बनर्जी जैसे नेता विपक्ष को एकजुट करने की कोशिश कर रहे हैं। मैं न्यूनतम साझा कार्यक्रम बनाकर विपक्ष को एकसाथ लाने में सहभागी बनूंगा।' वैसे यह पवार के लिए कम चुनौतीपूर्ण काम नहीं है। क्योंकि, यहां सिर्फ बीजेपी और मोदी-विरोध में ही एकजुटता है, बाकी कई मसलों पर दलों के बीच आपसी मतभेद बहुत ही गंभीर हैं।












Click it and Unblock the Notifications