OPINION: तेलंगाना में बहुत ही रोचक हुआ चुनावी मुकाबला

तेलंगाना में अब प्रचार अभियान धुआंधार चरण में पहुंच चुका है। उम्मीदवारों के नाम फाइनल हैं। पूरा फोकस चुनाव प्रचार पर है। इस दौरान चुनावी समीकरण में भी बहुत तेजी से बदलाव होना शुरू हो गया है।

जहां सत्ताधारी बीआरएस मजबूत है, वहां कांग्रेस खास अभियान चला रही है। जहां कांग्रेस ने मजबूत उम्मीदवारों को टिकट दिया है, वहां बीआरएस ने जीत सुनिश्चित करने के लिए अपने खास नेताओं को जिम्मेदारियां सौंप दी हैं। इसी दौरान बीजेपी ने हाल में जो वादे किए हैं, उससे चुनाव बहुत ही दिलचस्प हो गया है।

telangana election 2023

बीआरएस को 95 सीटें जीतने का है भरोसा
बीआरएस की ओर से सीएम केसीआर, मंत्री केटीआर और हरीश राव स्वाभाविक तौर पर स्टार प्रचारकों के रोल में हैं। लेकिन, पिछले चुनावों के मुकाबले मुख्यमंत्री के चंद्रशेखर राव का अंदाज बदला हुआ है। वह प्रचार को भावनात्मक अपील की तरफ ले जाने के बजाए, वोटरों के सामने गहन विचार का मौका दे रहे हैं।

वह मतदाताओं को बताते हैं कि अगर बीआरएस नहीं जीतती है, तो उसका परिणाम क्या होगा। वैसे बीआरएस का दावा है कि वह 95 सीटें जीतेगी। पार्टी हर चुनाव क्षेत्र की ताजा स्थिति की इलेक्शन वॉर रूम से निगरानी कर रही है। जहां आवश्यकता है, फौरन आवश्यक निर्देश दिए जा रहे हैं। 22 विधानसभा क्षेत्र ऐसे हैं, जहां लगता है कि पार्टी की ओर से खास अभियान चलाया जा रहा है।

कांग्रेस को लग रही है अपनी जीत पक्की
दूसरी तरफ कांग्रेस अपनी जीत पक्की मान चुकी है। जुबानी दावे भी कांग्रेस के पक्ष में नजर आ रहे हैं। पार्टी निजामाबाद, आदिलाबाद, करीमनगर और वारंगल जैसे जिलों को बीआरएस का गढ़ मानकर वहां की हर सीटों पर खास रणनीतियों के मुताबिक अभियान चला रही है। पार्टी को लगता है कि अगर इन इलाकों में बीआरएस को रोक दिया तो फिर कर्नाटक के बाद तेलंगाना में भी उसकी अपनी सरकार निश्चित है।

पार्टी कामारेड्डी में अपने प्रदेश अध्यक्ष रेवंत रेड्डी को सीएम केसीआर के मुकाबले में तो उतार ही चुकी है। बीआरएस सरकार जिन मोर्चों पर पूरी तरह से सफल नहीं रही है, उसे वोटरों तक पहुंचाने के लिए कांग्रेस चतुराई से काम कर रही है। राहुल गांधी भी इस बार तेलंगाना में कांग्रेस के लिए फिर से अपना पूरा दम लगाए हुए हैं। रेवंत पूरे प्रदेश में महत्वपूर्ण सीटों पर तूफानी दौरे कर रहे हैं।

बीजेपी के दो वादों से तेजी से बदल रहा है चुनावी समीकरण
अब भाजपा भी तेलंगाना के चुनाव अभियान में मजबूती से ताल ठोक चुकी है। पिछड़े वर्ग का मुख्यमंत्री और अनुसूचित जातियों का उप-वर्गीकरण दो ऐसे मुद्दे हैं, जिनको लेकर भाजपा नेता सोच रहे हैं कि वोटिंग का पैटर्न उनके हक में बदल सकता है।

केंद्र में सत्ताधारी दल के इन दोनों बड़े वादों का कांग्रेस और बीआरएस के प्रदर्शन पर कितना असर पड़ेगा, यह 30 नवंबर के चुनाव के लिए बहुत बड़ा सवाल बन गया है। दोनों पार्टियां चुनाव अभियान में तो जुटी हैं, लेकिन भाजपा के वादों ने उन्हें सोचने को मजबूर जरूर कर दिया है।

अबतक तो लग रहा था कि मुकाबला कांग्रेस और बीआरएस के बीच में ही घमासान होने वाला है। लेकिन, पिछड़े वर्ग और अनुसूचित जातियों के वोटर अगर भाजपा के पक्ष में मुड़े तो परिणाम क्या होगा और किसकी लुटिया डूबेगी, यह देखना दिलचस्प हो गया है। इसलिए इस बार तेलंगाना विधानसभा चुनाव में एक-एक सीट का नतीजा बेहद महत्वपूर्ण हो गया है। हर सीट प्रतिष्ठित बन चुकी है।

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