Opinion: तेलंगाना में अपने कार्यों के दम पर लक्ष्य की ओर बढ़ रहे हैं केसीआर
तेलंगाना चुनाव के लिए तैयार हो रहा है। मुख्यमंत्री के चंद्रशेखर राव के सामने लगातार तीसरी बार चुनाव जीतने का लक्ष्य है। सरकार के दो कार्यकाल के बाद भी उनके हौसले देखकर विपक्ष की हिम्मत पस्त पड़ रही है। वह सेल्फ डिफेंस के मोड में दिखाई पड़ता है।
केसीआर के इस आत्मविश्वास की वजह प्रदेश में 10 वर्षों में हुआ विकास और जन कल्याण है। तरह-तरह के प्रोजेक्ट, विकास के कार्य और हैदराबाद में हुए निवेश के साथ-साथ अनेक कल्याणकारी योजनाओं ने पॉजिटिव वोट बैंक में कई गुना बढ़ोतरी की है।

काम के दम पर हैट्रिक की तैयारी में सीएम केसीआर
केसीआर सरकार की ओर से कल्याणकारी योजनाओं पर लगातार काम चल रहा है। इन योजनाओं की वजह से लाखों लाभार्थियों का कल्याण हो रहा है। हैदराबाद में हुए विकास की वजह से बदलाव साफ नजर आता है। चाहे पारिवारिक आय हो या प्रति व्यक्ति आय, यह नया राज्य हर नजरिए से प्रगति के पथ पर बढ़ चला है। राजस्व बढ़ा है। ऐसे में कोई वजह नहीं है कि सीएम केसीआर हैट्रिक के साथ तीसरी पारी खेलने की उम्मीद न करें।

डबल बेडरूम वाली स्कीम से बढ़ा है हौसला
अब ग्रेटर हैदराबाद इलाके में डबल बेडरूम वाले एक लाख घर गरीबों को आवंटित करने के लिए तेजी से पहल हो रही है। इसी लक्ष्य के साथ 24 विधानसभा क्षेत्रों में 11,700 लाभार्थियों को घरों के दस्तावेज सौंपे जा चुके हैं। सरकार की ओर से भरोसा दिया गया है कि चरणबद्ध तरीके से सभी योग्य लोगों को भी ये कागजात सौंप दिए जाएंगे।

ग्रेटर हैदराबाद में सरकार की ओर से जो एक लाख डबल बेडरूम दिए जाने हैं, उनमें से हाल ही में 68,632 घरों का निर्माण पूरा हो चुका है। बाकी के घरों के निर्माण का काम भी अंतिम चरण में है। लाभार्थियों के चुनाव के लिए ड्रॉ की प्रक्रिया अपनाई गई है। इसी के तरत पहले चरण में 11,700 लाभार्थियों की किस्मत की चाबी खुली है।

प्रत्येक आवास पर 8.65 लाख रुपए की लागत
शनिवार को ग्रेटर हैदराबाद क्षेत्र में 9 जगहों पर इसकी व्यवस्था की गई थी। पहले गरीबों को जो घर आवंटित होते थे, उसमें अब उसकी तुलना में काफी परिवर्तन आया है। अभी केसीआर सरकार जो घर लोगों को सौंप रही है, वह 560 वर्ग फीट प्लिंथ एरिया वाले हैं। सरकार के मुताबिक प्रत्येक घर के निर्माण पर 7.90 लाख रुपए की लागत आएगी। अन्य आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध करवाने पर 75 हजार रुपए खर्च होने हैं। इस तरह से प्रत्येक डबल बेडरूम वाले घर पर सरकार 8.65 लाख रुपए खर्च कर रही है। लेकिन, लाभार्थियों को एक पैसे खर्च नहीं करने हैं।

पहले की योजनाओं से कहीं बेहतर है मौजूदा स्कीम
पहले के कांग्रेस शासन में गरीबों को दिए गए वंबे हाउस राजीव गांधी गृहकल्प से कहीं बेहतर हैं। लेकिन, केसीआर सरकार की ओर से बनाए गए घरों से किसी की तुलना नहीं हो सकती। बीआरएस सरकार जो डबल बेडरूम घर उपलब्ध करवा रही है, उसके लिए लोगों पर किसी भी तरह का बोझ भी नहीं डाला जा रहा। कुछ इलाकों में आवंटन में देरी हुई है, लेकिन विपक्ष हल्ला कर रहा है कि ऐसा बड़े पैमाने पर हुआ है। जबकि, हकीकत ये है कि मौजूदा सरकार डबल बेडरूम आवासों का आवंटन सुव्यवस्थित तरीके से कर रही है, जो कि पहले के आवास योजनाओं में नहीं दिखता था।

बीआरएस के पक्ष में खड़ा हो रहा है मजबूत वोट बैंक
अब पूछने की बात नहीं है कि जिन गरीबों को घर मिलने जा रहा है, उन्हें अपने सपने साकार होते देखकर कितनी खुशी हो रही है। केसीआर सरकार लाखों रुपए वाले घर गरीबों को मुफ्त में दे रही है। सर्वे रिपोर्ट से पता चलता है कि चुनावों के दौरान गरीबों को जो डबल बेडरूम आवास मिलेंगे, उससे बीआरएस के पक्ष में एक मजबूत वोट बैंक खड़ा हो जाएगा।













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