Opinion: लाइफ साइंस के क्षेत्र में ग्लोबल हब बनकर उभरा है हैदराबाद
दुनिया में लाइफ साइंस और फार्मा कंपनियों के लिए आज यदि किसी जगह का नाम लिया जाएगा तो उसमें तेलंगना की राजधानी हैदराबाद भी शुरू में ही शामिल रहेगा। यह शहर इस क्षेत्र का ग्लोबल हब बनकर उभरा है।

तेलंगाना की राजधानी हैदराबाद को अभी तक दुनिया में आईटी सिटी के तौर पर ही ज्यादा पहचान मिली हुई थी। लेकिन, यह शहर अब लाइफ साइंस के क्षेत्र में भी पथ प्रदर्शक बन चुका है। दवा के उत्पादन के मामले में तो यह एशिया के सबसे बड़े शहर के तौर पर उभर रहा है। इसी बात का प्रमाण है कि सिर्फ 7 वर्षों में हैदराबाद को सिर्फ फार्मा सेक्टर में 25 हजार करोड़ रुपए से ज्यादा का निवेश मिला है। हाल ही संपन्न हुए बायोएशिया कॉन्फ्रेंस इसकी कामयाबी की दास्तां बताने के लिए काफी है। यूं समझ लीजिए कि इस समय देश में हैदराबाद निवेश के लिए एक सुरक्षित और सुव्यवस्थित प्लेटफॉर्म बन चुका है। दुनिया की 10 सबसे बड़ी फार्मा कंपनियों में से 4 तेलंगाना में काम कर रही हैं। स्वाभाविक है कि हैदराबाद दुनिया में फार्मा सेक्टर का बड़ा हब बनकर उभरा है, तो निवेश का सिलसिला भी लगातार बढ़ता जा रहा है।

लाइफ साइंस के क्षेत्र में ग्लोबल हब बना हैदराबाद
हैदराबाद आज लाइफ साइंस के क्षेत्र में ग्लोबल हब बन चुका है। तेलंगाना के मंत्री केटी रमा राव ने इस बात की जानकारी दी है कि हेल्थ टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में हैदराबाद को विश्व में पहले स्थान पर लाने के लिए किस तरह के कदम उठाए जा रहे हैं। हालांकि, स्वास्थ्य विज्ञान के क्षेत्र में इसने विश्व में अपनी एक विशेष पहचान पहले ही स्थापित कर रखी है। लेकिन, तेलंगाना की बीआरएस सरकार यहीं ठहरने के लिए तैयार नहीं है। वह हैदराबाद को स्वास्थ्य तकनीक के मामले में दुनिया में नंबर वन बनाना चाहती है। सिर्फ 7 वर्षों में 25 हजार करोड़ रुपए का निवेश मिलना अपनी कहानी खुद बयां कर रहा है। तेलंगाना के निगम प्रशासन और शहरी विकास और उद्योग एवं वाणिज्य मंत्री केटीआर ने बताया है कि किस तरह से हैदराबाद को वैश्विक आवश्यकताओं के अनुसार फार्मा इंडस्ट्री के लिए प्लेटफॉर्म के रूप में तैयार करने के फैसलों की तामील कराई जा रही है। फार्मा क्षेत्र की दिग्गज कंपनियों ने हैदराबाद में मिल रहे अवसरों के बारे में बताया कि कैसे 15 साल पहले वे यह कैपिसिटी सेंटर बनाने आए थे और अब उनका काम 10 गुना बढ़ चुका है। हैदराबाद में 20 से ज्यादा लाइफ साइंस और मेडटेक से जुड़े इनक्यूबेटर हैं। दुनिया की 10 सबसे बड़ी फार्मा कंपनियों में से 4 तेलंगाना में भी काम कर रही हैं।

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हैदराबाद में आई निवेश की बाढ़
हैदराबाद में जो बायो एशिया कॉन्फ्रेंस आयोजित किया गया, उसमें कई दिग्गज संगठनों के प्रतिनिधियों ने केटीआर के साथ खुलकर चर्चा की। इनके बीच निवेश को लेकर विस्तार से बातचीत हुई। एसजीडी और कॉर्निंग जैसी नामी कंपनियों ने 500 करोड़ रुपए के निवेश के साथ फार्मास्युटिकल पैकेजिंग कंपनी लगाने का ऐलान किया। 200 करोड़ रुपए का निवेश करके फॉक्स लाइफ साइंसेज पहले से ही हैदराबाद में काम कर रही है। इसी तरह से पीएसएल ने प्रदेश में 20 करोड़ डॉलर निवेश करने की बात कही है। वहीं अमेरिकी कंपनी Jubilant 1,000 करोड़ रुपए और फ्रेंच कंपनी Sanofi 250 करोड़ रुपए के निवेश के लिए तैयार है। केटीआर ने तेलंगाना सरकार की ओर से सभी कंपनियों को उद्योगों की स्थापना और उनके विस्तार में पूरा सहयोग देने का वादा किया है।

लाइफ साइंस सेक्टर को 250 करोड़ डॉलर तक पहुंचाने का लक्ष्य
लाइफ साइंस और हेल्थ टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में हैदराबाद को नंबर वन बनाने का लक्ष्य यूं ही नहीं रखा गया है। इसके लिए मुख्यमंत्री के चंद्रशेखर राव के कैबिनेट मंत्री केटीआर के पास पूरा रोडमैप तैयार है। इसी आधार पर उन्होंने फार्मा उद्योग को हर तरह से मदद करने का वादा भी किया है। उन्होंने लाइफ साइंस के क्षेत्र के दिग्गजों को बताया है कि सरकार का लक्ष्य 2030 तक लाइफ साइंस को बढ़ाकर 100 अरब डॉलर तक ले जाने का था। लेकिन, केटीआर का कहना है कि 2022 तक ही यह 80 अरब डॉलर तक पहुंच चुका है। इसलिए, 2030 तक के लिए लक्ष्य को बढ़ाकर 250 अरब डॉलर कर दिया गया है। आंकड़े बताते हैं कि पिछले दो साल में लाइफ साइंस सेक्टर में यहां 23 फीसदी का विकास दर्ज हुआ है। मंत्री के मुताबिक लाइफ साइंस और फार्मा सेक्टर इको सिस्टम के लिए तेलंगाना पहले ही गढ़ बन चुका है। फार्मा कंपनियां भी राज्य सरकार से मिल रही सहयोग से खुश हैं।












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