वन नेशन-वन इलेक्शन पर JPC की बैठक: पूर्व CJI बोले- चुनाव आयोग को नहीं मिलने चाहिए असीमित अधिकार!
One Nation, One Election: 'वन नेशन, वन इलेक्शन' बिल को लेकर बनी संसद की संयुक्त समिति के सामने शुक्रवार (11 जुलाई) को भारत के दो पूर्व मुख्य न्यायाधीशों - जगदीश सिंह खेहर (जेएस खेहर) और डीवाई चंद्रचूड़ - ने अपनी राय रखी। दोनों ने इस विचार को संविधान की मूल भावना के खिलाफ नहीं बताया, लेकिन चुनाव आयोग को प्रस्तावित कानून के तहत मिलने वाले "असीमित अधिकारों" पर गंभीर आपत्ति जताई है।
जॉइंट पार्लियामेंट्री कमेटी (JPC) की बैठक में आज कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी, भाजपा सांसद अनुराग ठाकुर, संबित पात्रा समेत JPC के अन्य सदस्य भी शामिल हुए थे। 129वें संविधान संशोधन विधेयक पर चर्चा और सुझाव जुटाने के लिए संसद ने पूर्व केंद्रीय मंत्री पीपी चौधरी की अध्यक्षता में 39 सदस्यीय संयुक्त संसदीय समिति (JPC) का गठन किया है। इस समिति का उद्देश्य विधेयक पर व्यापक मंथन करना, विभिन्न हितधारकों और विशेषज्ञों से संवाद स्थापित करना और सरकार को अपनी सिफारिशें सौंपना है। अब तक समिति की चार बैठकें आयोजित की जा चुकी हैं।

क्या कहा पूर्व मुख्य न्यायाधीशों ने?
संसदीय समिति की आठवीं बैठक के दौरान दोनों पूर्व न्यायमूर्तियों ने अपने विचार रखे और संविधान विधेयक 2024 तथा केंद्र शासित प्रदेश कानून (संशोधन) विधेयक 2024 पर प्रस्तुति दी। एनडीटीवी सूत्रों के मुताबिक, उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग को प्रस्तावित कानून के तहत बिना निगरानी और संतुलन के अत्यधिक शक्तियां दी जा रही हैं, जो लोकतंत्र के लिए खतरनाक हो सकता है। दोनों पूर्व CJI ने "चेक्स एंड बैलेंस" यानी नियंत्रण और संतुलन की प्रणाली की सिफारिश की है, जिससे चुनाव आयोग की शक्तियों पर निगरानी रखी जा सके।
'सरकार का 5 साल का कार्यकाल 'गुड गवर्नेंस' के लिए जरूरी'
सूत्रों के मुताबिक, एक न्यायाधीश ने समिति के सामने कहा कि किसी भी निर्वाचित सरकार का पांच साल का कार्यकाल "गुड गवर्नेंस" के लिए आवश्यक है और इसे किसी भी स्थिति में छोटा नहीं किया जाना चाहिए।
पूर्व CJI डीवाई चंद्रचूड़ ने पहले भी यह कहा था कि अगर सरकार का कार्यकाल एक साल या उससे कम रह जाए, तो आचार संहिता लागू हो जाती है और इससे सरकार कोई ठोस कार्य नहीं कर पाती।
संसदीय समिति के अध्यक्ष बीजेपी सांसद पीपी चौधरी ने कहा कि देश के अलग-अलग हिस्सों में अध्ययन के दौरान ज्यादातर लोग और नेता 'वन नेशन, वन इलेक्शन' के पक्ष में नजर आए। हालांकि कुछ राजनीतिक दलों ने चिंता जताई कि इससे राष्ट्रीय मुद्दों और राज्यीय मुद्दों का अंतर धुंधला हो सकता है।
पूर्व CJI गोगोई भी जता चुके हैं चिंता
इससे पहले पूर्व मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई ने भी इस बात पर चिंता जताई थी कि प्रस्तावित संशोधन कानून चुनाव आयोग को अत्यधिक अधिकार सौंपता है। उन्होंने समिति से कहा था कि इन अधिकारों पर पारदर्शी नियंत्रण जरूरी है।
क्या कहते हैं आलोचक?
विपक्षी दलों ने इस प्रस्ताव पर आपत्ति जताई है, उनका कहना है कि 'वन नेशन, वन इलेक्शन' संविधान की मूल संरचना के खिलाफ है। लेकिन समिति के सामने पेश हुए पूर्व न्यायाधीशों का कहना है कि संविधान में यह कहीं नहीं लिखा कि लोकसभा और राज्य विधानसभा चुनाव अलग-अलग होने चाहिए।












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