संसद के विशेष सत्र में आ सकता 'एक देश, एक चुनाव' बिल: सूत्र
संसद के विशेष सत्र को लेकर इस बार कयास लगाए जा रहे हैं कि केंद्र सरकार 'वन नेशन- वन इलेक्शन' ला सकती है। इसको लेकर लॉ कमीशन ने इस साल जनवरी में राजनीतिक दलों से 6 सवालों पर जवाब भी मांगे थे।
वन नेशन- वन इलेक्शन पर चर्चा लंबे समय से चल रही है। केंद्र सरकार इस बिल के लागू करना चाह रही है। जबकि विपक्षी दल इसके विरोध में है। इस साल जनवरी में लॉ कमीशन ने राजनीतिक दलों से इसको लेकर कई मुद्दों पर जवाब मांगे थे। राजनीतिक दलों को कुल 6 शवालों को जवाब देने थे। वहीं अब संसद के विशेष सत्र में एक देश एक चुनाव बिल लाया जा सकता है। रिपोर्ट्स के मुताबिक सरकार ने बिल को लेकर तैयारी लगभग पूरी कर ली है।

भारत में 'एक देश, एक चुनाव'का कॉन्सेप्ट वर्ष 1983 में चुनाव आयोग ने ही केंद्र के समक्ष रखा था। 1951-52 में पहली बार लोकसभा और विधानसभा चुनाव पूरे देश में एक ही साथ ही हुए थे। 1957, 1962 और 1967 में ऐसा ही हुआ। लेकिन बाद में ये चक्र टूटा। जिसकी वजह थी कुछ राज्यों में विधानसभाओं का भंग होना। दरअसल, राज्यों में बार- बार चुनाव होने से बड़ी मात्र में सरकारी धन का खर्च होता है। बजट का एक बड़ा हिस्सा चुनाव आयोग को इसी पर खर्च करना होता है। इसमें समय भी खर्च होता है। ऐसे में जब लोकसभा और राज्यसभा चुनाव एकसाथ होंगे विकास कार्यों में आचार संहिता की बाधा भी नहीं नहीं आएगी।
विपक्षी दल क्यों कर रहे विरोध?
विपक्षी दलों को मानना है कि कि अगर लोकसभा और विधानसभा चुनाव एकसाथ होते हैं तो केंद्र के मुद्दों को राज्य स्तरीय मुद्दों पर असर हो सकता है। राज्य की समस्याएं दब सकती हैं। दूसरी बात ये भी है कि अगर पांच साल में सिर्फ एक बार चुनाव होता है तो दलों के नेता जनता से दूर हो जाएंगे। ऐसे में जनता के साथ किए वादों को जवाबदेही भी तय नहीं हो पाएगी।
शिवसेना (UBT) सांसद प्रियंका चतुवेर्दी ने कहा कि संसदीय कार्यमंत्री प्रह्लाद जोशी ने चोरी-चोरी, चुपके-चुपके यह निर्णय लेकर ट्वीट किया है। उन्होंने कहा, "मेरा सवाल है कि देश का एक बहुत ही महत्वपूर्ण त्योहार गणेश चतुर्थी है, तो हम जानना चाहते हैं कि यह हिंदू विरोधी काम क्यों हो रहा है? यह फैसला किस आधार पर लिया गया है? क्या यही उनकी 'हिन्दुत्ववादी' मानसिकता है?"
संसद के विशेष सत्र के बुलाए जाने की जानकारी होते ही विपक्षी दलों के नेताओं ने केंद्र को निशाने पर लिया है। कांग्रेस सांसद दीपेंद्र एस.हुड्डा ने कहा कि पहले लोकसभा अध्यक्ष और राज्यसभा सभापति के माध्यम से सदस्यों को सूचनाएं मिलती थीं, अब प्रह्लाद जोशी के ट्वीट से पता चलता है। अब जब मानसून सत्र समाप्त हो गया है, तो सितंबर में इस सत्र की क्या वजह क्या है? सरकार बताए कि इस अर्जेंट सत्र की वजह क्या है?












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