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तिब्बत की सीमा पर चीन ने जहां की थी घुसपैठ, अरुणाचल के सीएम पेमा खांडू ने जवानों को दिया बड़ा संदेश

अरुणाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री पेमा खांडू तवांग जिले के उस सीमा पर पहुंचकर जवानों का हौसला बढ़ाया, जहां चीन ने घुसपैठ की कोशिश की थी।

तवांग, 28 अक्टूबर: चीन की सेना ने हाल ही में अरुणाचल प्रदेश में भी घुसपैठ की कोशिश की थी, लेकिन भारतीय सेना ने उनके नापाक मंसूबों को ध्वस्त कर दिया था। अब अरुणाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री पेमा खांडू अपने अफसरों के साथ पैदल चलकर उन मोर्चों पर पहुंचे हैं, जहां पर तैनात जवानों ने पीएलए के सैनिकों को सरपट भागने को मजबूर कर दिया था। उन्होंने अपने जवानों की ना सिर्फ हौसला अफजाई की है, बल्कि यह भी बताया है कि किस तरह से सीमावर्ती इलाकों के बुनियादी ढांचे को दुरुस्त करने के लिए सभी एजेंसियां तालमेल के साथ काम कर रही हैं।

सीएम ने सीमा पर पहुंचकर जवानों की हौसला अफजाई की

सीएम ने सीमा पर पहुंचकर जवानों की हौसला अफजाई की

अरुणाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री पेमा खांडू ने अपने वरिष्ठ अधिकारियों के साथ तिब्बत से सटे भारतीय सीमा का दौरा किया है। वह यांगत्से भी गए हैं, जहां जानकारी के मुताबिक हाल ही चीन की सेना ने घुसपैठ की कोशिश की थी। अरुणाचल प्रदेश सरकार के प्रवक्ता के मुताबिक मुख्यमंत्री पैदल चलकर तवांग जिले के दूर-दराज आउटपोस्ट तक गए हैं, जिसका प्राथमिक मकसद जवानों का मनोबल बढ़ाना है। लेकिन, इससे भी बड़ी बात यह है कि वह भारतीय सैनिकों को इस बात के लिए धन्यवाद देने पहुंचे कि उन्होंने पीपुल्स लिब्रेशन आर्मी (पीएलए) के जवानों को भारतीय क्षेत्र से भागने को मजबूर कर दिया। भारतीय और चीनी सैनिकों के बीच यांगत्से बॉर्डर पर हाल ही आमना-सामना होने की जानकारी आई थी।

जनता जवानों की हमेशा ऋणी रहेगी- पेमा खांडू

जनता जवानों की हमेशा ऋणी रहेगी- पेमा खांडू

खांडू ने अंतरराष्ट्रीय सीमा पर चुना में जवानों से बातचीत करते हुए कहा कि 'हम सुरक्षित हैं क्योंकि आप हमारी सीमाओं की पूरी ईमानदारी से रक्षा करते हैं। भारत खासकर अरुणाचल प्रदेश की जनता और उसमें से भी विशेष रूप से तवांग जिले के लोग आप सबका हमेशा ऋणी रहेंगे। ' वह इस अंतरराष्ट्रीय सीमा को भारत-तिब्बत सीमा कहकर संबोधित करना पसंद करते हैं। उन्होंने जानकारी दी कि केंद्र और राज्य सरकार ने सीमावर्ती इलाकों के विकास को प्राथमिकता दे रखी है और हाल के वर्षों में बुनियादे ढांचे के विकास में तेजी आई है। इसका श्रेय उन्होंने सीमा सड़क संगठन (बीआरओ), सेना (इंडियम आर्मी), भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (आईटीबीपी) और राज्य सरकार के विभागों के तालमेल को दिया है, जो कि पहले अलग-अलग काम करते थे।

नई टुकड़ियों के गठन की भी दी जानकारी

नई टुकड़ियों के गठन की भी दी जानकारी

उन्होंने यह भी बताया कि सीमा की सुरक्षा के लिए अरुणाचल स्कॉउट्स की चार और भारतीय सेना की राज्य में आधारित एक इनफैंट्री रेजिमेंट स्थापित की जाएगी। अभी अरुणाचल स्कॉउट्स के दो बटालियन हैं। यांगत्से वह पहली पोस्ट है, जहां मुख्यमंत्री 24 अक्टूबर से शुरू हुए अपने तीन-दिवसीय दौरे पर पहुंचे। उनके साथ चीफ सेक्रेटरी नरेश कुमार और योजना आयुक्त प्रशांत लोखंडे भी मौजूद थे। वह सीमा पर मौजूद त्से चु, मागो और थिंग्बु गांवो तक गए। उन्होंने यांग्की -1 सीमा चौकी का भी दौरा किया, जहां बौद्ध स्थल 108 वॉटरफॉल्स और तुलुंग ला में एक युद्ध स्मारक मौजूद है।

अरुणाचल सीमा पर भी सेना ने बढ़ाई है मुस्तैदी

अरुणाचल सीमा पर भी सेना ने बढ़ाई है मुस्तैदी

गौरतलब है कि अरुणाचल में चीन की घुसपैठ की कोशिश को भारत ने नाकाम तो कर दिया है, लेकिन वह कौन सी नई चालबाजी को अंजाम देगा अंदाजा लगाना नामुमकिन है। इसलिए भारतीय सेना ने हाल ही में अरुणाचल सीमा पर पर एल-70 एंटी-एयरक्राफ्ट गन, एम-777 हॉवित्जर और स्वीडिश बोफोर्स तोप तैनात किए हैं। आर्मी एयर डिफेंस के कैप्टन सरिया अब्बासी के अनुसार एल-70 लड़ाकू विमानों, हेलीकॉप्टर और आधुनिक विमानों को भी मार गिराने में सक्षम है। (सभी तस्वीरें- फाइल)

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