Om Birla Caste: किस जाति से आते हैं लोकसभा स्पीकर ओम बिरला? संघ के सदस्य से संसद तक कैसे पहुंचे?
Om Birla Caste: भारतीय राजनीति के एक बड़े और प्रभावशाली चेहरे ओम बिरला राजस्थान के कोटा से आते हैं। वे देश की 17वीं लोकसभा के अध्यक्ष के रूप में जाने जाते हैं और साल 2024 में एक बार फिर इस अहम पद पर चुने गए। फिलहाल 63 साल के ओम बिरला के खिलाफ विपक्ष ने अविश्वास प्रस्ताव का नोटिस दिया है। जिसके बाद उन्होंने लोकसभा में न जाने का फैसला लिया है। आइए जानते हैं उनके बारे में सब कुछ।
जन्म, शिक्षा और जाति
ओम बिरला का जन्म 23 नवंबर 1962 को राजस्थान के कोटा में हुआ था। उन्होंने अपनी शुरुआती पढ़ाई कोटा से की और बाद में गवर्नमेंट कॉमर्स कॉलेज, कोटा से शिक्षा प्राप्त की। इसके बाद अजमेर स्थित महर्षि दयानंद सरस्वती विश्वविद्यालय से कॉमर्स में M.Com की डिग्री हासिल की। वे भारतीय नागरिक हैं और हिंदू धर्म को मानते हैं। सामाजिक रूप से वे बनिया (वैश्य) समुदाय से आते हैं।

छात्र जीवन से राजनीति में एंट्री
ओम बिरला की राजनीति में दिलचस्पी बचपन से ही रही। उन्होंने अपने राजनीतिक सफर की शुरुआत भारतीय जनता युवा मोर्चा (BJYM) से की। साल 1987 में वे जिला अध्यक्ष बने, 1991 में राज्य अध्यक्ष और 1997 में उन्हें राष्ट्रीय उपाध्यक्ष की जिम्मेदारी सौंपी गई। यह दौर उनके राजनीतिक करियर की मजबूत नींव साबित हुआ।
राजस्थान विधानसभा में तीन बार जीत
ओम बिरला ने कोटा दक्षिण विधानसभा सीट से तीन बार राजस्थान विधानसभा सदस्य के रूप में चुनाव जीता। उन्होंने 2003, 2008 और 2013 में यह सीट हासिल की। 2013 के विधानसभा चुनाव में उन्होंने कांग्रेस उम्मीदवार पंकज मेहता को हराया। विधानसभा में रहते हुए उन्होंने संगठन और प्रशासन दोनों स्तरों पर सक्रिय भूमिका निभाई।
लोकसभा चुनाव और ऐतिहासिक जिम्मेदारी
साल 2014 में ओम बिरला ने कोटा लोकसभा सीट से 16वीं लोकसभा का चुनाव लड़ा और कांग्रेस के इज्यराज सिंह को हराया। इसके बाद 2019 में वे फिर उसी सीट से 17वें लोकसभा में जीतकर आ गए। 19 जून 2019 को उन्होंने 17वें लोकसभा अध्यक्ष के रूप में पदभार संभाला। 2024 में तीसरी बार कोटा लोकसभा सीट जीतकर वे दोबारा लोकसभा अध्यक्ष बने।
निजी जीवन और परिवार
ओम बिरला का विवाह डॉ. अमिता बिरला से हुआ है। उनकी दो बेटियां हैं। बड़ी बेटी आकांक्षा एक चार्टर्ड अकाउंटेंट हैं, जबकि छोटी बेटी अंजलि ने साल 2019 में अपने पहले ही प्रयास में यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा पास कर देश की सिविल सेवक बनने का गौरव हासिल किया। उनके पिता का नाम श्रीकृष्ण बिरला और माता का नाम शकुंतला देवी है। उनके दामाद अनीश रजानी एक व्यवसायी हैं।
RSS और संगठनों से जुड़ाव
राजनीति के साथ-साथ ओम बिरला राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) से भी जुड़े रहे हैं। उन्होंने राष्ट्रीय सहकारिता उपभोक्ता महासंघ लिमिटेड के उपाध्यक्ष के रूप में काम किया। इसके अलावा जून 1992 से जून 1995 तक वे कंफेड, जयपुर के अध्यक्ष भी रहे। सांसद के रूप में अपने पहले कार्यकाल में वे ऊर्जा संबंधी स्थायी समिति, याचिका समिति और सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय की सलाहकार समिति के सदस्य रहे।
समाज सेवा
ओम बिरला सिर्फ राजनीति तक सीमित नहीं हैं, बल्कि समाज सेवा में भी सक्रिय रहे हैं। साल 2012 में उन्होंने "परिधान" कार्यक्रम की शुरुआत की, जिसके तहत जरूरतमंद लोगों को कपड़े और किताबें बांटी जाती हैं। इसके अलावा उन्होंने ब्लड डोनेशन कैम्प, निःशुल्क भोजन कार्यक्रम और गरीबों को मुफ्त दवाएं उपलब्ध कराने के लिए दवा बैंक की भी शुरुआत की।
संपत्ति और आय का विवरण
2019 तक के आंकड़ों के अनुसार ओम बिरला की कुल संपत्ति लगभग 4.83 करोड़ रुपये आंकी गई है। इसमें करीब 47 लाख रुपये की कृषि भूमि, बैंकों और वित्तीय संस्थानों में लगभग 20 लाख रुपये जमा, कंपनियों में 16 लाख रुपये के बॉन्ड, डिबेंचर और शेयर शामिल हैं। उनके पास करीब 7 लाख रुपये के आभूषण भी हैं। उनका मासिक वेतन और भत्तों सहित लगभग 1,25,000 रुपये है। उनके पास मारुति वैगन आर, मारुति रिट्ज और ऑप्ट्रा जैसी गाड़ियां हैं।
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