Odisha News: कैसे जमीन से जुड़े मुख्यमंत्री की सक्रियता ने बदली ओडिशा में शासन की तस्वीर
Odisha News: ओडिशा की जनता ढाई दशकों तक शासन की निष्क्रियता झेल चुकी है। अब प्रदेश को मोहन माझी के रूप में एक ऐसे मुख्यमंत्री मिले हैं, जो हर संवेदनशील मसलों पर खुद ही सक्रिय हो जाते हैं और उनकी सक्रियता की वजह से पूरी सरकार भी एक्शन मोड में नजर आती है। मुश्किल से तीन महीने में ही ओडिशा के शासन-प्रशासन में आ रहे बदलावों के अनेकों उदाहरण मौजूद हैं।
ओडिशा में 25 वर्षों के कुशासन की बात यूं ही नही कही जाती है। सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बावजूद यहां के थानों में सीसीटीवी नहीं लगाए जा सके। लेकिन, अब हवा का रुख बदल चुका है। मुख्यमंत्री मोहन माझी ने महकमे से दो टूक कह दिया है कि सबकुछ के लिए समय-सीमा सुनिश्चित की जाए। आने वाले समय में पुलिस मुख्यालय से ही ओडिशा के सभी थानों की निगरानी शुरू हो जाएगी।

ओडिशा ने पिछले ढाई दशकों में कैसे झेला कुशासन का दौर?
इस साल मार्च में एक मीडिया रिपोर्ट आई थी। इसमें दावा किया गया था कि ओडिशा की तत्कालीन सरकार ने अपने वन विभाग की एक रिपोर्ट को कथित तौर पर नजरअंदाज करके सुंदरगढ़ में ग्रीनफिल्ड इंडस्ट्रियल यूनिट के लिए एक निजी कंपनी को पेड़ काटने की अनुमति दे दी थी। जबकि, वह जमीन जैव विविधता के लिए बहुत महत्वपूर्ण बताई गई थी।
इसी तरह से पिछले साल संबलपुर में हुई हिंसा की घटना को लेकर तत्कालीन सरकार पर आरोप लगे थे कि अगर वह अपनी इंटेलिजेंस की चेतावनी पर ध्यान दे देती तो हिंसा टाली जा सकती थी। ये सिर्फ कुछ उदाहरण हैं, जिससे एक निष्क्रिय सरकार के कार्यकाल के हालात उजागर होते हैं।
मुख्यमंत्री की सक्रियता से बदल रही ओडिशा सरकार की तस्वीर
वर्षों में ओड़िशा की एक ऐसे राज्य के तौर पर पहचान बनी, जहां महिलाओं के खिलाफ अपराध पर नियंत्रण पाना सरकार के लिए बड़ी चुनौती थी। लेकिन, अब प्रदेश को एक ऐसी सरकार मिली है, जो त्वरित कार्रवाई करने के लिए जानी जाने लगी है। ओडिशा की राजनीति और राज्य के इतिहास में पहली बार ऐसा होने लगा है, जब मुख्यमंत्री खुद ही मामले के समाधान में जुट जाते हैं और अपने मंत्रियों को भी उसके लिए फौरन सक्रिय कर देते हैं।
विपक्ष को भी करनी पड़ रही माझी सरकार की सराहना
आज वही ओडिशा है, जहां सरकार की कार्रवाई की जनता के साथ-साथ विपक्ष भी करने लगा है। जैसे एक मामले में सरकार तुरंत ही सबसे अनुभवी जज की अगुवाई में एक न्यायिक जांच बिठा दी है।
मुख्यमंत्री ने सेना बनाम पुलिस विवाद में न सिर्फ खुद पीड़ितों से मुलाकात की, बल्कि इस घटना की न्यायिक जांच का आदेश देने से पहले उपमुख्यमंत्री केवी सिंह देव और पार्वती परिदा समेत राजस्व मंत्री सुरेश पुजारी, कानून मंत्री पृथ्वी विराज हरिचंदन और वरिष्ठ अधिकारियों के साथ उच्चस्तरीय बैठक भी की।
आंगनवाड़ी कार्यकर्ता वाली घटना में दिखी जमीन से जुड़े सीएम वाली छवि
मुख्यमंत्री मोहन माझी किस तरह से जमीन पर काम करने वाले लोगों से जुड़कर चल रहे हैं, इसका एक और बेहतरीन उदाहरण बालासोर जिले में एक आंगनवाड़ी कार्यकर्ता के साथ कथित मारपीट की घटना है।
मुख्यमंत्री को जैसे ही पता चला कि एक आंगनवाड़ी कार्यकर्ता को उसकी ड्यूटी में रुकावट डालने की कोशिश की गई है, उन्होंने उपमुख्यमंत्री पार्वती पारिदा से पीड़ित से संपर्क करने को कहा।
डिप्टी सीएम ने भी सीएम के निर्देशानुसार न सिर्फ पीड़िता से फोन पर बात की, बल्कि मुख्य जिला चिकित्सा पदाधिकारी और पुलिस अधीक्षक को भी इस मामले में उचित कार्रवाई करने को कहा, जिसके आधार पर तीन आरोपी महिलाएं पकड़ी भी गईं।
ओडिशा के सीएम माझी किस तरह से त्वरित कार्रवाई में यकीन करते हैं, इसे पूरे देश में चर्चा में आ चुके सेना बनाम पुलिस वाले विवाद के हल में देखा जा सकता है। सीएम बाहर थे और जिस रात वे राजधानी भुवनेश्वर लौटे, उन्होंने इस विवाद का शांतिपूर्ण समाधान निकाल लिया।
सीएम ने तत्काल ही वरिष्ठ मंत्रियों को काम पर लगा दिया गया। तड़के 2 बजे तक बैठकों का दौर चला। इन सबमें सबसे बड़ी बात ये रही है कि एक-एक घटनाक्रम पर सीएम की खुद की नजर रही और उन्होंने विवाद को सुलझाने में निजी तौर पर जिस तरह की सक्रियता दिखाई, उसी के चलते इतना बड़ा मसला बहुत जल्द ही सुलझा लिया गया।












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