देशी शराब पीकर नशे में टल्ली हो गए जंगल के 24 हाथी, जानें फिर क्या हुआ हाल
महुए से बनी देशी शराब गटक गए ओडिशा जंगल के 24 हाथी, नशे में धुत होकर घंटो सोते नजर आए सारे।
Elephants drank Deshi liquor: हाथी वाइल्ड लाइफ का ऐसा जानवर है जिसे हर कोई पसंद करता है। शेर अगर जंगल का राजा है तो हाथी जंगल के गजराज हैं। हाथी और उनके बच्चों की क्यूट हरकतें लोगों को खूब भाती है। वहीं ओडिशा के एक जंगल में रहने वाले हाथियों के बारे में एक मजेदार खबर सामने आई है, यहां रहने वाले 24 हाथी मिलकर कई लीटर देशी शराब पीकर टल्ली हो गए। आइए जानते हैं जंगली हाथियों को शराब कहां से मिली और उसको पीने के बाद उनका क्या हाल हो गया?

लीटरों देशी शराब गटक गए जंगल के हाथी
दरअसल ये हाथियों का झुंड जो लीटरों देशी शराब गटक गए वो सभी ओडिशा के क्योंझर जिले के शिलीपाड़ा काजू जंगल में रहते हैं। इन
24 हाथियों ने पारंपरिक देशी शराब 'महुआ' का जमकर आनंद लिया। जब गांव के पास रहने वाले लोग पहुंचे तो उनकी हालत देखकर हैरान हो गए।

देशी शराब के बर्तन खाली पड़े हुए थे
जंगल के पास रहने वाले ग्रामीण जंगल में महुआ से शराब बनाने के लिए गए थे, जब वो उस स्थान पर पहुंचे तो देखा महुआ की शराब बनाने के लिए जो बड़े-बड़े बर्तन रखे गए थे उसमें से महुआ के फूलों का नशीला पानी नदारत था और बर्तत टूटे फूटे पड़े हुए थे।

नशे में धुत होकर घंटो सोते रहे हाथी
ग्रामीणों ने देखा हाथियों का झुंड पहले से ही नशीले फूलों से तैयार किया पानी को पी चुके थे और उन खाली पड़े बर्तनों के पास में 24 हाथी नशे में धुत होकर सोए हुए पड़े हुए थे। ग्रामीण समझ गए थे कि उन बर्तनों में तैयार की जा रही देशी शराब उन्हीं 24 जंबो ने पी और नशे में आने के बाद सो रहे थे।

घंटों गहरी नींद में सोते रहे हाथी
ग्रामीणों ने देखा वो गहरी नींद में थे और घंटों सोते रहे। ग्रामीणों ने बताया कि "हम महुआ से शराब तैयार करने के लिए सुबह करीब 6 बजे जंगल में गए और पाया कि सभी बर्तन टूट गए थे और नशीले फूलों से सड़ाया गया ( fermented)पानी गायब था और पास में हाथी सो रहे थे। नरिया सेठी नाम के ग्रामीण ने बताया कि उन्होंने fermented पानी पी लिया और नशे में धुत हो कर सो गए।

जगाने पर नहीं जगे तो ढ़ोल पीटकर वन विभाग ने जगाया
वन रेंजर घासीराम पात्रा ने बताया ग्रामीणों ने हाथियों को जगाने की कोशिश की, लेकिन वो नहीं जगे तब वन विभाग को सूचित किया और हमारे कर्मियों को पटाना वन परिक्षेत्र अंतर्गत जंगल में मौके पर पहुंचकर झुंड को जगाने के लिए ढोल पीटना पड़ा। जिसके बाद वो जागे और घने जंगल में उन्हें भेजा गया।

वन विभाग ने बोली ये बात
वन विभाग अधिकारी ने कहा हमें अंदाजा नहीं था कि उन्होंने वो नशीला पानी पी कर नशे थे या नहीं। शायद वे वहीं आराम कर रहे थे। हालांकि वन विभाग जहां इस बात को स्वीकार नहीं किया वहीं ग्रामीणों ने दावे से कहा कि उन हाथियों ने महुए से तैयार किया गया वो नशीला पानी यानी देशी शराब ही पी है।












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