Odisha: ओडिशा में पुलिस की नजर ने नहीं बच पाएंगे क्रिमिनल्स, नई तकनीकी का होगा प्रयोग
ओडिशा में भुवनेश्वर के डीसीपी प्रतीक सिंह ने सख्त निर्देश दिए हैं। राज्य में चुनावों के दौरान अधिकारियों को संवेदनशील बूथों और राजनीतिक हिंसा का रिकॉर्ड रखने वाले असामाजिक लोगों की पहचान करने और उन पर कड़ी नजर रखने को कहा गया है। इसके लिए ओडिशा पुलिस नई तकनीकी का प्रयोग करने की जा रही है।
लोकसभा चुनाव 2024 की राज्यों में प्रशासनिक स्तर पर तैयारियां शुरू हो चुकी हैं। चुनाव होने में अब कुछ महीने शेष बचे हैं। ईसीआई जल्द ही तारीखों का ऐलान कर सकता है। ऐसे में ओडिशा पुलिस ने चुनावी माहौल के दौरान अपराधियों पर नकेल कसने के लिए कमिश्नरेट पुलिस ने चुनावों से पहले हिंसा और अन्य घटनाओं से निपटने के लिए अपनी तैयारियों की समीक्षा की है। मासिक अपराध समीक्षा बैठक में डीसीपी प्रतीक सिंह ने अधिकारियों से भुवनेश्वर में बूथों के स्थान और वहां की सुरक्षा व्यवस्था पर चर्चा की गई।

बैठक के दौरान अपराधियों पर नजर रखने के लिए नई तकनीकी के व्यापक प्रयोग पर चर्चा हुई। इस दौरान अधिकारियों को नए फिंगरप्रिंट-स्कैनिंग उपकरण के बारे में जानकारी दी गई, जिसका उपयोग शहर में गश्त या जांच के दौरान संदिग्ध व्यक्तियों के क्रिमिनल हिस्ट्री की जांच के लिए किया जा सकता है। यह उपकरण शहर पुलिस को राज्य अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो ने उपलब्ध कराया। इसके अलावा बैठक में डीसीपी ने चुनाव के दौरान हिंसक झड़पों से जुड़े पुराने मामलों की जांच जल्द पूरी करने और कोर्ट में चार्जशीट दाखिल करने का निर्देश दिया।
बता दें कि राजधानी भुवनेश्वर में करीब 1,167 बूथ हैं, जहां चुनावों को दौरान ओडिशा पुलिस कड़ी निगरानी रखने का प्लान बना रही है। दरअसल, 2022 में जारी एनसीआरबी के आंकड़ों के मुताबिक राजनीतिक और चुनावी रंजिश के चलते ओडिशा हत्याओं के मामले में देश में दूसरे स्थान पर है। यहां पिछले साल मारे गए 1,402 लोगों में से आठ लोग राजनीतिक कारणों से ओडिशा में मारे गए। जबकि झारखंड इन मामलों में शीर्ष पर बना हुआ है यहां राजनीतिक कारणों से हत्या के मामले में झारखंड 17 मौतों दर्ज की गई हैं।












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