दूर हुई सारी मुश्किलें, भारत और अमेरिका के बीच हुई न्‍यूक्लियर डील

नई दिल्‍ली। जिस बात की उम्‍मीद थी, रविवार को उससे जुड़ी अच्‍छी खबर आ ही गई। विदेश मंत्रालय की ओर से इस बात की जानकारी दी गई है कि भारत और अमेरिका के बीच न्‍यूक्लियर डील को लेकर जो भी मुश्किलें थीं, वह अब दूर हो चुकी हैं।

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विदेश मंत्रालय की ओर से बताया गया कि दोनों देशों के बीच यह डील हो गई है। इसका मतलब है कि अब भारत में अमेरिकी कंपनियां नागरिक आपूर्ति के लिए जरूरी न्‍यूक्लियर रिएक्‍टर्स भारत में लगा सकेंगी।

आर्थिक, रक्षा और रणनीतिक मुद्दों पर बड़ी विजय

विदेश सचिव सुजाता सिंह की ओर से दी गई जानकारी के मुताबिक राष्‍ट्रपति बराक ओबामा और पीएम मोदी के बीच हुई मुलाकात के बाद भारत को आर्थिक, रक्षा और रणनीतिक मुद्दों पर विजय बड़ी हासिल हुई है।

उन्‍होंने बताया कि भारत और अमेरिका दोनों ही देशों ने न्‍यूक्लियर डील से जुड़ी सभी बाधाओं को दूर कर लिया है। दोनों ही देश इस डील के जरिए एक नई आपसी समझ पर पहुंच सके हैं।

उन्‍होंने इस बात की जानकारी दी कि भारत ने अमेरिकी समूह के साथ इस डील में मुश्किलें पैदा करने वाले सेक्‍शन 17 पर चर्चा की गई। इसके अलावा कुछ और बातों पर भी चर्चा हुई है।

विदेश सचिव की ओर से इस बारे में भी जानकारी दी गई कि भारत और अमेरिका दोनों ही देश भारत के 123 समझौते को सिविल न्‍यूक्लियर लायबिलिट और एडमिनिस्‍ट्रेटिव अरेंजमेंट्स के लिए लागू करने पर राजी हो गए हैं।

वहीं इस प्रेस कांफ्रेंस में अमेरिका में भारतीय राजदूत जयशंकर भी मौजूद थे। उन्‍होंने जानकारी दी कि डीटीटीआई के तहत अमेरिका भारत में जेट इंजन के विकास से जुड़ी संभावनाओं को तलाशने में बड़ी भूमिका अदा करेगा।

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