दिल्ली में अफगानिस्तान पर होने वाली बैठक में 8 देश होंगे शामिल, चीन ने बनाया नया 'बहाना'
नई दिल्ली, 8 नवंबर: इसी साल अगस्त में तालिबान ने अफगानिस्तान की सत्ता पर कब्जा करते हुए वहां पर अंतरिम सरकार की घोषणा कर दी थी। हालांकि भारत ने तालिबानी सरकार को अभी मान्यता नहीं दी है, लेकिन 10 नवंबर को दिल्ली में 'अफगानिस्तान पर दिल्ली क्षेत्रीय सुरक्षा वार्ता' का आयोजन हो रहा है। इस बैठक को राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल लीड करेंगे। इसमें अफगानिस्तान के भविष्य, सुरक्षा आदि पर चर्चा होगी।

मामले में सूत्रों ने कहा कि भारत अफगानिस्तान और सीमा पर आतंकवाद, कट्टरता, नशीली दवाओं की तस्करी आदि को लेकर चिंतित है। जिस पर डोभाल की बैठक में चर्चा होगी। इसके अलावा अमेरिका ने जो खतरनाक हथियार अफगानिस्तान में छोड़े हैं, उसको लेकर भी भारत चिंतित है। वहीं चीन के भी इस बैठक में हिस्सा लेने की संभावना थी, लेकिन उसकी ओर से साफ कर दिया गया है कि रीशेड्यूलिंग की समस्या की वजह से वो शामिल नहीं होंगे। एक्सपर्ट इसे चीन का बहाना बता रहे हैं।
सूत्रों ने आगे कहा कि NSA अजीत डोभाल 10 नवंबर को अफगानिस्तान पर एनएसए स्तर की बातचीत से पहले उज्बेकिस्तान और ताजिकिस्तान के अपने समकक्षों के साथ द्विपक्षीय वार्ता करेंगे। अभी तक 7 देशों ने 10 तारीख को होने वाली वार्ता में भाग लेने की पुष्टि की है। जिसमें ईरान, रूस, उज्बेकिस्तान, कजाकिस्तान, तुर्कमेनिस्तान, ताजिकिस्तान और किर्गिस्तान शामिल हैं।
वहीं जिन 8 देशों (भारत समेत) ने सहमति जताई है, उसमें कोई भी देश तालिबान सरकार को मान्यता नहीं देता है। भारत भी मान्यता नहीं देता, जिस वजह से अफगानिस्तान को वार्ता के लिए आमंत्रित नहीं किया गया है। इससे पहले ईरान ने 2018 और 2019 में इसी तरह के प्रारूप में बैठकों की मेजबानी की थी, हालांकि उस दौरान पाकिस्तान किसी भी बैठक में शामिल नहीं हुआ था। अब भारत ने जब उसे आमंत्रण दिया तो भी उसकी ओर से इनकार कर दिया गया।
सूत्रों ने बताया कि अफगानिस्तान पर दिल्ली सुरक्षा वार्ता विदेश मंत्रालयों के नेतृत्व वाली बैठकों से अलग है। ये संवाद सुरक्षा पर केंद्रित है। जिसमें समाधान खोजने का प्रयास किया जाएगा और अफगानिस्तान से उत्पन्न खतरों पर चुनौतियों का सामना करने के लिए एक सामान्य दृष्टिकोण कैसे बनाया जाए, इस पर चर्चा होगी।












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