Karnataka election: DK शिवकुमार ही नहीं , कई दिग्गज नेताओं ने भी उतारे सब्स्टीट्यूट, सता रहा है ये डर!
कर्नाटक में 10 मई को होने वाले विधानसभा चुनावों में कई दिग्गज उम्मीदवारों ने अपने विकल्प के तौर पर परिजनों के पर्चे दाखिल कराए हैं।

कर्नाटक में 10 मई को होने वाले विधानसभा चुनाव के लिए दाखिल नामांकन पत्रों की स्क्रूटनी हो रही है। राज्य में 3,600 से ज्यादा उम्मीदवारों ने कुल 5,102 नामांकन दाखिल किए हैं। भाजपा के 707, कांग्रेस के 651, जद (एस) के 455 उम्मीदवारों ने पर्चा दाखिल किया है।
इस बार चुनाव में कई उम्मीदवारों ने विकल्प के तौर पर उसी निर्वाचन क्षेत्र से अपने परिवार के सदस्यों के भी पर्चे दाखिल कराए हैं। ताकि उनका नामांकन अगर रद्द होता है। तो उस सीट से उनके परिजन चुनाव लड़ सकें। इसमें सबसे बड़ा नाम कांग्रेस राज्य चीफ डीके शिवकुमार का है।
गुरुवार को नामांकन बंद होने के कुछ घंटे पहले, कर्नाटक से एकमात्र कांग्रेस लोकसभा सदस्य डीके सुरेश ने कनकपुरा सीट से पर्चा दाखिल किया था। जहां उनके भाई और सीएम उम्मीदवार डीके शिवकुमार चुनाव लड़ रहे हैं।

कर्नाटक के इस चुनाव में सुरेश और शिवकुमार ऐसा करने वाले अकेले नहीं हैं। कांग्रेस के पूर्व मंत्री केजे जॉर्ज और सतीश जारकीहोली ने भी अपनी-अपनी सीटों से अपने परिवार के एक सदस्य का नामांकन करवाया है।
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जहां जॉर्ज के बेटे राणा ने बेंगलुरु के सर्वज्ञनगर में नामांकन दाखिल किया है। वहीं सतीश जरकीहोली की बेटी ने बेलगावी जिले के यमकनमर्दी से नामांकन दाखिल किया है। भाजपा सरकार में मंत्री के गोपालैया की पत्नी हेमलता ने भी अपने पति की सीट से पर्चा दाखिल किया है।
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कर्नाटक सरकार में मंत्री के गोपालैया बेंगलुरु में महालक्ष्मी लेआउट से बीजेपी के उम्मीदवार हैं। उनकी पत्नी पत्नी हेमलता उस सीट से बैकअप के तौर पर अपना नामाकंन दाखिल किया है। कांग्रेस के नेताओं ने बताया कि, डीके सुरेश ने "विकल्प" और "एहतियाती उपाय" के रूप में अपना पर्चा दाखिल किया है।
दरअसल कांग्रेस के नेता को इस बात का डर था कि, उन्होंने (भाजपा) राहुल गांधी को नहीं बख्शा। क्या वे मुझे बख्शेंगे? लेकिन मैं उनके सामने कभी भी आत्मसमर्पण नहीं करूंगा। उन्होंने कहा कि उनके भाई का नामांकन कांग्रेस की बैक-अप योजना का हिस्सा था क्योंकि उन्हें भाजपा की ओर से की जा रही साजिश को लेकर संदेह था।

कांग्रेस पदाधिकारियों ने कहा कि पार्टी ने सुरेश को एक अतिरिक्त बी-फॉर्म दिया है, और सुरेश ने रिटर्निंग ऑफिसर को सूचित किया है कि उनके भाई का नामांकन खारिज होने या उनके चुनाव न लड़ने की स्थिति में इस बी-फॉर्म पर विचार किया जाए।
कर्नाटक कांग्रेस लीगल सेल के दिवाकर एन ने कहा कि, इसके अलावा उम्मीदवारों के रूप में परिवार के सदस्यों को मैदान में उतारने की होड़ इस डर की वजह से पैदा होती है कि कई नेता नामांकन पत्र में हुए बदलाव को लेकर परेशान हैं। उम्मीदवारों द्वारा भरे जाने वाले नामांकन पत्रों में कुछ नए कॉलम जोड़ दिए गए हैं, और आपराधिक मामलों के बारे में अधिक जानकारी मांगी जा रही है। जो कैंडीडेट को परेशान कर रही हैं।












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