Norovirus: केरल के वायनाड में संक्रमण की पुष्टि, इसके लक्षण, बचाव और उपचार सबकुछ जानिए
वायनाड, 12 नवंबर: केरल के वायनाड में वेटनरी एंड एनिमल कॉलेज के कुछ स्टूडेंट में अत्यधिक संक्रामक माने जाने वाले नोरोवायरस की पुष्टि हुई है। जिलाधिकारी के मुताबिक अलप्पुजा एनआईवी ने जांच के बाद इस वायरस के पाए जाने की बात कही है। जिलाधिकारी ने पानी के स्रोतों को ब्लीचिंग पाउडर से साफ करने को कहा है, ताकि बीमारी को रोका जा सके। जिलाधिकारी के अनुसार लोगों से अप्रैल तक नोरोवायरस को लेकर सचेत रहने की गुजारिश की गई है। कुछ महीने पहले इंग्लैंड में इस बीमारी के ढेर सारे मामले आए थे। बच्चों और बुजुर्गों को इससे सुरक्षित रखने की बहुत ही ज्यादा आवश्यकता है, क्योंकि इससे संक्रमित होने पर उनके ज्यादा बीमार होने की आशंका रहती है।

नोरोवायरस क्या है ?
इंग्लैंड के नेशनल हेल्थ सर्विस (एनएचएस) के मुताबिक नोरोवायरस को 'विंटर वोमिटिंग बग' भी कहा जाता है। यह बग पेट में पहुंच जाता है, जिसके चलते उल्टियां और दस्त की समस्या शुरू हो जाती है। अमेरिका के सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन (सीडीसी) के मुताबिक नोरोवायरस अत्यधिक संक्रामक वायरस है। यह वायरस किसी को भी अपनी चपेट में ले सकता है। नोरोवायरस से संक्रमित मरीज करोड़ों वायरस पार्टिकल्स छोड़ सकते हैं; और इसके कुछ ही पार्टिकल्स लोगों को बीमार कर सकता है। इसे स्टमक फ्लू या स्टमक बग भी कहते हैं।

नोरोवायरस के लक्षण क्या हैं ?
नोरोवायरस के संपर्क में आने के 12 से 48 घंटे के बाद सामान्य तौर पर लक्षण दिखने लगते हैं। इसके लक्षण-
- डायरिया
- उल्टी
- मिचली
- पेट दर्द
- अन्य लक्षण:
- बुखार
- सिर दर्द
- शरीर में दर्द

नोरोवायरस कैसे फैलता है ?
- किसी भी संक्रमित व्यक्ति के सीधे संपर्क में आने से
- संक्रमित भोजन या पानी के सेवन से
- संक्रमित व्यक्ति के साथ खाना शेयर करने या एक ही बर्तन में खाने से
- संक्रमित सतह को छूने और उसके बाद बिना हाथ धोए अपने मुंह को छूने से

नोरोवायरस से किन्हें है ज्यादा खतरा ?
नोरोवायरस से संक्रमित कोई भी व्यक्ति बहुत ज्यादा बीमार पड़ सकता है, अगर किसी को ज्यादा उल्टी और दस्त की शिकायत हुई तो। इसके चलते शरीर में पानी की कमी (डिहाइड्रेशन) हो सकती है। छोटे बच्चे, बुजुर्गों और पहले से बीमार लोगों के लिए ज्यादा सावधानी की जरूरत है।

नोरोवायरस से डिहाइड्रेशन के लक्षण
- पेशाब में कमी
- मुंह और गले का सूखना
- खड़े होने पर चक्कर आना
छोटे बच्चे के शरीर में पानी की मात्रा कम होने पर वह रोएगा या रोएगी, लेकिन आंखों से आंसू या तो नहीं आएंगे या बहुत ही कम आएंगे। वह सोए-सोए रह सकते हैं या उनमें अस्थिरता दिख सकती है। खासकर 12 महीने से कम के बच्चे का ख्याल रखना ज्यादा जरूरी है।

नोरोवायरस से बचाव
- आप अपने हाथों को साबुन और पानी से धोकर खुद को और दूसरों को इस वायरस से बचा सकते हैं
- इस वायरस से बचाव के लिए हाथ की स्वच्छता बहुत ही जरूरी है। खासकर टॉयलेट के बाद और डायपर बदलते समय इसका पूरा ख्याल रखें।
- खाना बनाने से पहले, खाने से पहले और खाने-पीने की चीजों को छूने से पहले हाथ साबुन और पानी से हमेशा साफ करें।
- दवा खाने या किसी को देने से पहले भी हाथ साफ करना ना भूलें।

नोरोवायरस का उपचार
नोरोवायरस की वजह से होने वाली बीमारी की कोई विशेष दवा नहीं है। डॉक्टरों के मुताबिक यदि आप इस वायरस से संक्रमित होते हैं तो खूब तरल पदार्थ का सेवन कीजिए, ताकि उल्टी-दस्त से होने वाली पानी की कमी की पूरी की जा सके। इससे डिहाइड्रेशन रोकने में मदद मिलेगी। क्योंकि, डिहाड्रेशन की वजह से स्थिति बिगड़ सकती है। शरीर में पानी की कमी होने पर अस्पताल में भर्ती करवाने की स्थिति पैदा हो सकती है।
अधिकतर लोग इससे 1 से लेकर 3 दिनों के भीतर ठीक हो जाते हैं। लेकिन, नोरोवायरस से लोग लंबे वक्त तक भी बीमार हो सकते हैं। इसके कई वेरिएंट हैं और एक से उबरने के बाद दूसरे से संक्रमित होने का खतरा बना रहता है। (तस्वीरें- प्रतीकात्मक)












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