मुमकिन नहीं लगता पंडितों को कश्मीर में बसाना

नई दिल्ली( विवेक शुक्ला) कश्मीरी पंडितों की वापसी के मामले पर मुख्यमंत्री मुफ्ती मोहम्मद सईद कह रहे हैं कि उनके लिए अलग कॉलोनियां नही बसाई जाएंगी। यानी कि वे मान रहे हैं कि राज्य में कश्मीरी पंडितों को फिर से बसाना आसान नहीं है।

No separate clusters for settlement of Kashmiri Pandits in J-K

राज्य विधानसभा में आज कश्मीरी पंडितों के लिए रहने की अलग से व्यवस्था करने के सवाल पर तग़ड़ा बवाल मचा। सदन को सईद का कहना था कि पंडितों को कम्पोजिट कल्चर में यानी साथ रहना होगा।हालांकि सईद के बायन पर हंगामा शुरू हो गया।

वरिष्ठ चिंतक अवधेश कुमार मानते हैं कि सईद का विचार किसी ढंग से ऐसा नहीं है जो कि अनपेक्षित हो। जानकार कहते हैं कि पंडितों को फिर से राज्य में बसाना केन्द्र और राज्य सरकार के लिए चैलेंज है।

बड़ा सवाल

अब सवाल यह है कि क्या केन्द्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने उनसे कहा था कि आप इनके लिए अलग कॉलोनी बनवाइए? दूसरी बात आप कश्मीरी पंडितों को बसाना चाहते हैं तो उनसे भी उनकी राय ली जाएगी या नहीं? किसी को जबरन तो नहीं बसाया जा सकता?

साथ-साथ रहे दोनों

कश्मीर मामलों के जानकार कहते हैं कि एक मुख्यमंत्री के नाते मुफ्ती को यह संदेश देना ही था वो कश्मीर घाटी में हिन्दू मुसलमानों को एक साथ रहने देने के पक्षधर हैं। किसी भी संतुलित राज्य में यही होगा। पंडित मुफ्ती साहब की बात मानने को तैयार हैं। पर मुफ्ती इस पर काम तो आरभ करें।

मत परवाह करो उनकी

कश्मीर घाटी में पंडितों और मुसलमानों के साथ-साथ रहने पर हुर्रियत के नेता विरोध भी जताने लगे हैं। उनका यह काम है। उनहें गंभीरता से लेने की जरूरत नहीं है। अलगाववादी इसे गाजा पट्टी आदि बताकर गलत दिशा दे रहे हैं। कश्मीर भारत का अंग था, है और रहेगा। अलगाववादियों के लिए तो यह भारत का अंग ही नहीं है, इसलिए देश की सरकार उनकी बात पर ध्यान क्यों दे?

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