अब सरकारी अधिकारियों और कर्मचारियों को सर-मैडम कहने की जरूरत नहीं, केरल की इस पंचायत की अनूठी पहल
पलक्कड़, 02 सितंबर। केरल में दो पंचायतों में सर और मैडम शब्द के इस्तेमाल से कर्मचारियों को आजादी मिल गई है। केरल के पलक्कड़ में माथुर ग्राम पंचायत राज्य का पहला गांव बन गया है जहां पर कर्मचारियों को सर और मैडम नहीं कहना पड़ेगा। अगर कोई भी जनप्रतिनिधि पंचायत के कार्यालय का दौरा करने के लिए पहुंचता है तो कर्मचारियों को सर और मैडम कहने की जरूरत नहीं पड़ेगी। अहम बात यह है कि सर और मैडम शब्द का इस्तेमाल पत्र व्यवहार के दौरान भी नहीं किया जाएगा। पंचायत के वरिष्ठ अधिकारियों को काम के लिए लिखे जाने वाले पत्र में भी सर और मैडम लिखने की जरूरत नहीं है।

लोगों को अधिकार मांगने का हक
पंचायत से लोगों को जाति प्रमाण पत्र, आय प्रमाण पत्र आदि के लिए प्रार्थना पत्र में सर मैडम लिखने की जरूरत नहीं होगी। इस तरह के किसी भी शब्द के इस्तेमाल करने की जरूरत नहीं हो जिसमे अपना काम कराने के लिए आग्रह करना पड़े। ऐसे पत्र में अपने अधिकार की मांग करने वाले शब्द का इस्तेमाल किया जा सकता है, जैसे मैं मांग करता हूं, मुझे वित्तीय मदद की जरूरत है।
सर-मैडम शब्द से मिलेगी निजात
दरअसल आधिकारिक पत्रों में जिन शब्दों को इस्तेमाल किया जाता है वह आजादी के पहले से चले आ रह हैं। जबकि आजादी के बाद अब आम नागरिकों का यह अधिकार है कि वह अपने अधिकारों की मांग के लिए अपील नहीं बल्कि मांग करें। इसी भावना के तहत इस नियम में बदलाव किया गया है। अब माथुर पंचायत में आधिकारिक फॉर्म को भी फिर से प्रिंट कराया जाएगा जिनमे इन शब्दों से निजात मिलेगी।
लोकतंत्र में जनता ही मालिक
यह फैसला पंचायत की गवर्निंग काउंसिल की बैठक के दौरान 31 अगस्त को लिया गया है। माथुर पंचायत की अध्यक्ष प्रविता मुरलीधरन ने कहा कि अगर किसी को कोई सेवा सिर्फ इसलिए मुहैया नहीं कराई जाती है क्योंकि उसने सर और मैडम करके संबोधित नहीं किया हो सीधे मुझसे शिकायत की जा सकती है। प्रविता ने कहा कि उन्हें कई बार यह बुरा लगता है कि जब कोई बुजुर्ग आता है और मुझसे कहता है कि मैड मेरी मदद कर दीजिएगा। लोग सिर्फ वही मांग रहे हैं जो उनका अधिकार है। उन्हें हमारे सामने अपने अधिकार के लिए झुकने की जरूरत नहीं है। यह उपनिवेशिक परंपरा है। अब समय आ गया है कि हम इस तरह के शब्दों का इस्तेमाल बंद करें और राजा और गुलाम की सोच से बाहर निकलें। लोकतंत्र में जनता ही मालिक है।
पलक्कड़ की सभी पंचायतों को भेजा गया निर्देश
31 अगस्त को पंचायत अध्यक्ष ने जो आदेश जारी किया है उसमे कहा गया है कि किसी को भी पंचायत के अधिकारी या कर्मचारी को सर कहने की जरूरत नहीं है। हमने भाषा अधिकारी को कहा है कि इसके लिए दूसरे शब्दों का चयन करें। तबतक लोग हमे सीधे हमारे नाम से संबोधित कर सकते हैं और जिस पद पर हम हैं उससे संबोधित कर सकते हैं। इस आदेश को पलक्कड़ के अन्य पंचायतों में भी भेज दिया गया है और इसे लागू करने के लिए कहा गया है।












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