पिछले 5 महीनों से केंद्र से कोई बातचीत नहीं हुई, हमने सर्दी-गर्मी सही, अब बारिश भी सहेंगे- टिकैत

विवादित कृषि कानूनों पर अगले दौर की बातचीत के लिए कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तौमर से मिले आमंत्रण के बावजूद किसान नेता राकेश टिकैत ने शनिवार को कहा कि पिछले 5 महीनों से केंद्र सरकार के साथ हमारी कोई बातचीत नहीं हुई।

नई दिल्ली, 3 जुलाई। विवादित कृषि कानूनों पर अगले दौर की बातचीत के लिए कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तौमर से मिले आमंत्रण के बावजूद किसान नेता राकेश टिकैत ने शनिवार को कहा कि पिछले 5 महीनों से केंद्र सरकार के साथ हमारी कोई बातचीत नहीं हुई।

Rakesh Tikait

संसद में उठाया जाए किसानों का मुद्दा
शनिवार को इंडिया टीवी से बातचीत में किसान नेता ने कहा कि संसद के आगामी सत्र में किसानों का मुद्दा उठाया जाना चाहिए। हालांकि इस दौरान उन्होंने कहा कि किसानों का संसद का घेराव करने का कोई इरादा नहीं है।

किसी दमदार आदमी से हो बातचीत

कृषि कानूनों के मुद्दे पर सरकार के साथ अगले दौर की बातचीत पर टिकैत ने कहा कि, 'हम सरकार पर भरोसा रखते हैं। हालांकि हम चाहते हैं कि जिस किसी भी व्यक्ति को बातचीत के लिए नियुक्त किया जाए उसके पास निर्णय लेने की शक्तियां भी हों।' उन्होंने कहा कि सितंबर में हमारी बैठक होगी और फिर हम यूपी चुनाव में आगे की कार्रवाई पर फैसला लेंगे।

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आंदोलन खत्म करने पर क्या बोले टिकैत
किसानों का आंदोलन कब खत्म होगा? इस सवाल पर टिकैत ने कहा हम किसी भी हद तक जाने को तैयार हैं। हमने बहादुरी से शर्तियों का सामना किया, गर्मियों का सामना किया और इसी प्रकार अब बारिश के मौसम का भी सामना करेंगे।

संजीव बालियान से नहीं की बातचीत
मजेदार बात ये हुई कि पैनल में शामिल हुए भाजपा नेता संजीव बालियान से टिकैत ने बातचीत करने से मना कर दिया। इस दौरान बालियान ने कहा कि किसानों से पहले भी बिना शर्त के बात हुई है और किसी भी बातचीत के लिए समावेशी माहौल होना चाहिए। अब जबकि कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने फिर से चर्चा शुरू करने का आग्रह किया है, इसे शुरू किया जाना चाहिए।

इस कानून का फायदा पश्चिमी यूपी के ही किसानों को होगा
संजीव बालियान ने चर्चा के दौरान कहा कि इस कानून का पश्चिमी उत्तर प्रदेश से कोई लेना-देना नहीं है, क्योंकि हमारे यहां मंडियां नहीं हैं, गुड़ का बाजार है। अब किसान कहीं भी गुड़ बेच सकेगा। इस कानून के बाद पश्चिमी उत्तर प्रदेश के किसान को ही फायदा होगा।

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