Opposition unity: 2024 में बीजेपी को 475 सीटों पर सीधी टक्कर देना चाहते हैं नीतीश, ये है प्लान
भाजपा के खिलाफ नीतीश कुमार विपक्षी एकता के लिए जिस योजना पर काम कर रहे हैं, वह बहुत ही महत्वपूर्ण है। अगर उसमें उन्हें सफलता मिल गई तो भाजपा की राह आसान नहीं रहेगी।

बिहार के मुख्यमंत्री और जेडीयू नेता नीतीश कुमार की पहल पर 12 जून को पटना में भाजपा विरोधी विपक्षी दलों के नेता एक मेगा पॉलिटिकल शो करने वाले हैं। नीतीश की पार्टी की ओर से पहले ही एक सीट, एक पार्टी की थ्योरी सामने लाई जा चुकी है। पटना में होने वाली इस बैठक में भाजपा को देश की अधिकतर सीटों पर सीधी टक्कर देने की इस रणनीति पर ठोस चर्चा हो सकती है।
पटना में विपक्षी दलों का शक्ति-प्रदर्शन
नीतीश कुमार पिछले साल अगस्त से ही भाजपा का साथ छोड़ने के बाद से उसके खिलाफ समान विचारधारा वाले दलों को एक खेमे में लाने की कोशिशों में जुटे हैं। उनके सामने अब उन कोशिशों को मूर्त रूप देने का असल वक्त आ चुका है। पटना में बिहार के सीएम की अगुवाई में होने वाली विपक्षी दलों की बैठक बीजेपी के खिलाफ उनका पहला ठोस शक्ति प्रदर्शन होगा।
ममता ने दिया था पटना में बैठक का सुझाव
पटना में विपक्षी दलों को जुटाने का सुझाव पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने तब दिया था, जब नीतीश इसी सिलसिले में तृणमूल सुप्रीमो से मिलने कोलकाता गए थे। लेकिन, उसके बाद टीएमसी और कांग्रेस में काफी अनबन देखने को मिली है। इससे विपक्षी एकता की कोशिशों को अमलीजामा पहनते देखना दिलचस्प हो गया है।
नीतीश के सामने चुनौतियां
इसी तरह से यूपी में अखिलेश यादव की समाजवादी पार्टी और आम आदमी पार्टी का कांग्रेस के साथ मौजूदा रिश्ता भविष्य में किस करवट लेगा, अभी तक साफ नहीं है। इनके साथ ही नीतीश के सामने बीएसपी को भी साथ लाना बहुत बड़ी चुनौती है। लेकिन, फिर भी बिहार में विपक्षी बीजेपी और सहयोगी आरजेडी के मुकाबले लगभग आधी सी पार्टी जदयू के सुप्रीमो ने अपने हौसले काफी बुलंद कर रखे हैं।
नीतीश के हौसले की वजह
इसकी वजह ये है कि वह अभी तक कांग्रेस के मल्लिकार्जुन खड़गे, राहुल गांधी, टीएमसी की ममता बनर्जी, सपा के अखिलेश यादव, एनसीपी के शरद पवार, शिवसेना (यूबीटी) के उद्धव ठाकरे, आम आदमी पार्टी के अरविंद केजरीवाल और बीजेडी के नवीन पटनायक जैसे जितने भी नेताओं से मिले हैं, उनमें से पटनायक को छोड़कर बाकी सभी ने 2024 के आम चुनाव में भाजपा-विरोधी गठबंधन के उनके विचार का समर्थन किया है। अलबत्ता इन दलों के आपसी कंफ्यूजन अपनी जगह बरकरार हैं।
जेडीयू को इन दलों से भी है उम्मीद
जेडीयू की ओर से तो यहां तक दावा किया गया है कि तेलंगाना के सीएम और भारत राष्ट्र समिति के नेता के चंद्रशेखर राव और आंध्र प्रदेश के सीएम और वाईएसआर कांग्रेस के जगन मोहन रेड्डी को भी साथ लाने की कोशिशें जारी हैं। वैसे भाजपा-विरोधी एजेंडा लेकर सबसे पहले केसीआर ही नीतीश से मिलने पटना पहुंचे थे, लेकिन कांग्रेस को लेकर उनकी चिंता ने फिलहाल उन्हें नीतीश के मंसूबों से दूर कर रखा है।
विपक्षी दलों में कांग्रेस का दावा हुआ है मजबूत
नीतीश ने जब भाजपा-विरोधी महागठबंधन का यह अभियान शुरू किया था, तब कांग्रेस तीन राज्यों राजस्थान, छत्तीसगढ़, हिमाचल प्रदेश में सत्ता में थी और बिहार में भी सरकार में शामिल थी। लेकिन, अब वह कर्नाटक में बड़ी जीत के साथ सत्ता पर काबिज हुई तो वह स्वाभाविक तौर पर विपक्षी दलों की अगुवा बनकर उभरी है और नीतीश की ओर से भी यही संकेत मिल रहे हैं।
विपक्षी दलों की बैठक में नीतीश की क्या कोशिश होगी?
अब ऐसी अटकलें हैं कि नीतीश ने कांग्रेस आलाकमान को विश्वास दिलाने की कोशिश की है कि वह उन राज्यों में विपक्षी दलों को समर्थन दे, जहां क्षेत्रीय दलों की स्थिति बुजुर्ग पार्टी की तुलना में अधिक मजबूत है। जैसे कि उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल, दिल्ली, पंजाब और बिहार। टीएमसी की ओर से यह बात सामने रखी भी गई है। इसके बदले ये दल कांग्रेस के प्रभाव वाले राज्यों में उसके लिए जी-जान लगाने को तैयार होंगे। अगर कांग्रेस और बाकी समान विचारधारा वाले भाजपा-विरोधी दलों की इस रणनीति पर सहमति बन गई तो नीतीश अपने पहले एजेंडे में सफल हो सकते हैं।
नीतीश 475 सीटों पर भाजपा को सीधी टक्कर का बना चुके हैं प्लान
जैसा कि पहले ही स्पष्ट किया गया है कि नीतीश कुमार की रणनीति ये है कि बीजेपी को लोकसभा की ज्यादातर सीटों पर सीधी लड़ाई के लिए मजबूर किया जाए। इसके लिए उन्होंने जो रणनीति तैयार की है, वह 475 सीटें हैं, जहां वह चाहते हैं कि भाजपा या एनडीए के उम्मीदवार के खिलाफ संयुक्त विपक्ष का एक प्रत्याशी ही चुनाव लड़े।
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लेकिन, नीतीश की इस रणनीति को असली चुनौती पश्चिम बंगाल, दिल्ली,पंजाब और उत्तर प्रदेश में मिलती दिख रही है। इन चारों राज्यों में कांग्रेस क्षेत्रीय दलों के सामने पूरी तरह से सरेंडर करने के लिए तैयार हो जाएगी? यह बहुत बड़ा सवाल है।












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