80 लाख गंवाकर युवक की पागलों सी हालत, NIMHANS के डॉक्टरों ने किया चमत्कार, कैसे हुआ ट्रेडिंग की लत का इलाज?
NIMHANS Cures Trading Addiction: बेंगलुरु के मशहूर NIMHANS (निम्हांस) अस्पताल में एक ऐसा केस आया है जिसने सबको चौंका दिया है। यहां डॉक्टरों ने एक ऐसी बीमारी का सफल इलाज किया है जिसके बारे में सुनकर ही लोग हैरान हैं। ये बीमारी कैंसर या कोई और गंभीर शारीरिक बीमारी नहीं है बल्कि ये है शेयर ट्रेडिंग की बिमारी।
जी हां, शेयर ट्रेडिंग की खतरनाक लत में फंसे एक 29 साल के युवक का सफल इलाज किया गया है। भारत में शेयर बाजार की लत का इलाज होने का यह अपनी तरह का पहला मामला है। यह केस एक उदाहरण है कि कैसे घर बैठे पैसा कमाने का सपना एक डरावनी मानसिक बीमारी बन सकता है।

आजकल के मोबाइल ऐप्स ने ट्रेडिंग को किसी वीडियो गेम जैसा बना दिया है, जिसमें युवा अपनी मेहनत की कमाई और मानसिक शांति दोनों खो रहे हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, निवेश और जुए के बीच की लकीर अब बहुत धुंधली हो गई है। आइए जानते हैं इसके इलाज से जुड़ा ये पूरा मामला...
ये भी पढ़ें: MP News: बीमारी ठीक करने का झांसा देकर लाखों की ठगी करने वाला अंतरराज्यीय गिरोह बेनकाब, दो आरोपी गिरफ्तार
80 लाख का कर्ज, एक 'स्मार्ट' निवेश जो बर्बादी बन गया
पढ़े-लिखे परिवार के 29 वर्षीय 'मिस्टर डी' ने 4 साल पहले बस थोड़ी एक्स्ट्रा इनकम के लिए शेयर बाजार में कदम रखा था। उन्हें अंदाजा भी नहीं था कि एक क्लिक से शुरू हुआ यह सफर उन्हें 80 लाख के कर्ज में डुबो देगा। वे दिन भर बस स्टॉक मार्केट के ग्राफ और लाल-हरे निशान देखते रहते थे। जैसे नशेड़ी को नशा न मिलने पर बेचैनी होती है, वैसे ही ट्रेडिंग न कर पाने पर उन्हें घबराहट होने लगती थी।
इस शख्स को जब ट्रेडिंग में घाटा हुआ तो उसे छिपाने के लिए परिवार से झूठ बोला और कर्ज चुकाने के लिए नए-नए लोन ऐप्स से पैसा उठाया। इस लत में उनकी नींद उड़ गई, दोस्तों से मिलना बंद हो गया और वे पूरी तरह अपनी डिजिटल दुनिया में खो गए।
रिकवरी का मास्टर प्लान, 10 सेशन और '4D' फॉर्मूला
जब समस्या हद से पार होने लगी तब डॉक्टर्स से संपर्क किया गया। NIMHANS के SHUT क्लिनिक (जो खास तौर पर टेक्नोलॉजी की लत छुड़ाने के लिए है) के डॉक्टरों ने पाया कि यह समस्या ठीक वैसी ही है जैसे किसी को ड्रग्स या ऑनलाइन गेमिंग की लत लग जाती है।
निमहांस, बेंगलुरु के सर्विसेज फॉर हेल्दी यूज़ ऑफ टेक्नोलॉजी (SHUT क्लिनिक) के सुब्रमण्यम सरधा, राजेश कुमार और मनोज के शर्मा ने इस मामले की जांच की, जिससे यह साबित होता है कि जबरदस्ती ट्रेडिंग करना अब सिर्फ़ एक फाइनेंशियल रिस्क नहीं है, बल्कि एक इलाज योग्य मानसिक स्वास्थ्य विकार है। डॉक्टरों ने मिस्टर डी को ठीक करने के लिए एक अनोखा रास्ता चुना।
पहले ट्रेडिंग की लत में फंसे उस व्यक्ति के फोन से ट्रेडिंग वाले सारे ऐप्स डिलीट करवा दिए गए। उनके सारे बैंक अकाउंट्स और पैसों का जिम्मा परिवार को दे दिया गया यानी की वो अपना कोई भी अकाउंट खुद मैनेज नहीं कर सकते थे। जब भी उनका मन दोबारा ट्रेडिंग करने को मचलता, उन्हें ये 4 स्टेप्स फॉलो करने को कहे गए:
- Deep Breathing: लंबी और गहरी सांस लें।
- Drink Water: एक गिलास पानी पिएं।
- Discuss: तुरंत परिवार के किसी सदस्य से बात करें।
- Delay: मोबाइल छूने के विचार को कम से कम 15 मिनट के लिए टाल दें।
एक नई शुरुआत
इलाज का नतीजा शानदार रहा। मिस्टर डी का एडिक्शन स्कोर, जो पहले 24 (बहुत गंभीर) था, वह अब घटकर सिर्फ 4 रह गया है। वे अब कर्ज के जाल से बाहर निकलकर एक सामान्य और खुशहाल जिंदगी जी रहे हैं।
डॉक्टरों का कहना है कि भारत में करीब 20 करोड़ डिमैट अकाउंट हैं और हैरानी की बात यह है कि इनमें से 75% लोग 30 साल से छोटे हैं। SEBI के हालिया डेटा से यह चिंता सही साबित होती है, जिससे पता चलता है कि पिछले कुछ सालों में F&O सेगमेंट में 93% रिटेल ट्रेडर्स को नुकसान हुआ है।
अगर आपको या आपके किसी दोस्त को ट्रेडिंग न कर पाने पर चिड़चिड़ापन होता है या आप नुकसान की भरपाई के लिए और पैसा लगा रहे हैं, तो यह आपके लिए खतरे की घंटी है।
ये भी पढ़ें: MHA ने शुरू किया डिजिटल अरेस्ट साइबर फ्रॉड नेटवर्क के खिलाफ देशव्यापी अभियान












Click it and Unblock the Notifications