बेंगलुरु में नए साल के जश्न में उस रात कैसे बीच सड़क तार-तार हुई इज्जत?
कई लड़के घेरा बनाकर लड़कियों के साथ बदसलूकी कर रहे थे। उन्हें धक्का दे रहे थे और छेड़छाड़ कर रही थे। उन्होंने बताया, 'लड़कियां उनके सामने गिड़गड़ा रही थीं, रो रही थीं, लेकिन वे लड़के नहीं रुके।'
नई दिल्ली। बेंगलुरु में नए साल के जश्न के दौरान लड़कियों से हुई छेड़छाड़ के मामले में अब एक के बाद एक पीड़ित और प्रत्यक्षदर्शी सामने आ रहे हैं। चर्च स्ट्रीट पर रेस्टोरेंट में अपने तीन दोस्तों के साथ गए शख्स ने वहां के माहौल की जानकारी दी। ब्रिगेड रोड पर अपनी पत्नी के साथ पहुंचे एक शख्स और भीड़ की करतूत देखी तो उनके होश उड़े हुए थे। उन्होंने कहा, 'वह जगह पूरी तरह अनजान लग रही थी। सड़क पर 17 से 25 साल के लड़के वहशी हरकतें कर रहे थे। यह सबकुछ पुलिस के सामने हो रहा था। ऐसा लग रहा था जैसे कोई वार जोन हो।'

'समस्या सिस्टम में है, सुधरने में लगेंगे सालों'
एक शख्स ने बताया कि चर्च स्ट्रीट पर बड़ी संख्या में लोग जमा थे। वे एक दूसरे पर अंडे बरसा रहे थे। कई युवक अपनी बाइक सड़क पर लगाकर रास्ता जाम कर रहे थे। वे चिल्ला रहे थे और चीख रहे थे। उन्होंने कहा, 'मैं कुछ कर नहीं सकता लेकिन मुझे लगता है कि सजा देने से कुछ हो सकता है। हम सिस्टम की समस्या की वजह से फंसे हैं और इसे बदलने में कई दशक लग जाएंगे।' उन्होंने यह भी कहा कि उन्हें दुख है कि सब कुछ उनकी आंखों के सामने हो रहा था। उन्होंने लोगों को बचाने की कोशिश की लेकिन वह ज्यादा किसी की मदद नहीं कर पाए। जैसे-जैसे भीड़ बढ़ी हालात बेकाबू होते गए और फिर पुलिस ने वहां से चले जाने को कहा।
'घेरा बनाकर लड़कियों से की बदसलूकी'
अपनी पत्नी के साथ नया साल सेलिब्रेट करने पहुंचे शख्स ने अंग्रेजी अखबार टाइम्स ऑफ इंडिया को बताया, 'वहां तीन-चार लोग बाइक पर थे। बुरी तरह गाड़ी चला रहे थे। उन्होंने हेलमेट नहीं पहन रखे थे। वे महिलाओं को गाली दे रहे थे और भद्दे कमेंट कर रहे थे। उनकी इस हरकत में ऑटो रिक्शा वाले भी शामिल हो गए। मैं और मेरी पत्नी मानते हैं कि किसी को किसी के कपड़ों पर सवाल उठाने का हक नहीं है। उन्हें अपनी मर्जी से कपड़े पहनने की आजादी है।' मौके पर मौजूद रहे लोगों ने बताया कि कई लड़के घेरा बनाकर लड़कियों के साथ बदसलूकी कर रहे थे। उन्हें धक्का दे रहे थे और छेड़छाड़ कर रही थे। उन्होंने बताया, 'लड़कियां उनके सामने गिड़गड़ा रही थीं, रो रही थीं, लेकिन वे लड़के नहीं रुके। लड़के राह चलती लड़कियों को धक्का देते थे और उनसे जबरदस्ती कर रहे थे।'












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