NIA ने 10 प्वाइंट में बताया, 83 वर्षीय फादर स्टेन स्वामी को क्यों नहीं दिया स्ट्रॉ और सिपर ?

मुंबई। तलोजा जेल में बंद 83 वर्षीय फादर स्टेन स्वामी (Stan Swamy) को जेल में सिपर और स्ट्रॉ न दिए जाने की बात सामने आई थी। मामले में राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) पर स्टेन स्वामी को सिपर और स्ट्रॉ न देने का आरोप लगा था। अब पूरे मामले में राष्ट्रीय जांच एजेंसी ने एक पत्र जारी कर जवाब दिया है कि आखिर स्टेन स्वामी को उसकी तरफ से सिपर और स्ट्रॉ क्यों नहीं दिया गया । पार्किंसन बीमारी से जूझ रहे स्वामी ने सिपर और स्ट्रॉ दिए जाने के लिए अदालत का दरवाजा खटखटाया था। मामले में एनआईए ने कोर्ट में जवाब दिया था। इसके बाद भी एजेंसी पर स्वामी को सिपर और स्ट्रॉ न दिए जाने की बात कही जा रही थी जिस पर एजेंसी ने सफाई दी है।

Stan Swamy

ट्विटर पर जारी एक पत्र में एनआईए ने कहा है कि NIA पर स्टेन स्वामी के दावे गलत और शातिरपने से पूर्ण हैं। एनआईए ने कहा कि स्टेन स्वामी के पास से उसे कोई सिपर और स्ट्रॉ नहीं मिला था ऐसे में एजेंसी स्वामी को वो नहीं दे सकती जो उसके पास है ही नहीं। एजेंसी ने कहा कि स्वामी तलोजा जेल में बंद हैं और वहां सिपर और स्ट्रॉ उपलब्ध कराना जेल प्रशासन की जिम्मेदारी है जो महाराष्ट्र सरकार के अधीन है। एनआईए ने 10 प्वाइंट में अपना जवाब दिया है।

1- आरोपी स्टेन स्वामी को सीपीआई माओवादी से संबंध रखने के साथ ही भीमा-कोरेगांव एलगार परिषद मामले में षणयंत्रकारियों के साथ मिलकर साजिश रखने के आरोप में 8 अक्टूबर 2020 को गिरफ्तार किया गया था। 31 दिसम्बर 2017 को पुणे के पास एलगार परिषद के नेताओं के भाषण के बाद बड़े पैमाने पर हिंसा भड़की थी जिसके चलते भीमा-कोरेगांव में जान-माल को नुकसान पहुंचा था।

2- स्टेन स्वामी को गिरफ्तार करने के अगले दिन 9 अक्टूबर को उन्हें मुंबई में स्पेशल कोर्ट के सामने चार्जशीट के साथ पेश किया था और कभी भी उनकी कस्टडी नहीं ली। इस दौरान सभी कानूनी औपचारिकताएं और मेडिकल परीक्षण किए गए थे। तब से स्टेन स्वामी मुंबई की तलोजा जेल में बंद हैं।

3- लगभग एक महीने बाद 6 नवम्बर को स्टेन स्वामी में एनआईए की स्पेशल कोर्ट में अपना सिपर और स्ट्रॉ दिए जाने की मांग की। (उन्होंने झूठा दावा किया कि ये चीजें एनआईए ने रख ली थीं)

4- माननीय कोर्ट ने एजेंसी से अगली तारीख में अपना जवाब पेश करने को कहा था जो कि 26 नवम्बर को तय की गई थी।

5- 26 नवम्बर को कोर्ट में दाखिल किए जवाब में एनआईए ने कोर्ट को बताया कि एनआईए ने स्वतंत्र गवाहों की मौजूदगी में अपनी तलाशी पूरी की थी और इस दौरान कोई सिपर और स्ट्रॉ नहीं मिला था।

6- माननीय कोर्ट ने स्वामी की अपील खारिज कर दी थी और तलोजा जेल प्रशासन को उन्हें सिपर और स्ट्रॉ उपलब्ध कराने के निर्देश दिए थे।

7- जैसा कि आरोपी अभी न्यायिक अभिरक्षा में है, ये मामला उनके (स्वामी) और जेल प्रशासन के बीच का है जो कि महाराष्ट्र राज्य प्रशासन के तहत आता है।

8- NIA ने कहा कि कई रिपोर्ट में ये कहा जा रहा है कि एनआईए ने स्टेन स्वामी की सिपर और स्ट्रॉ बरामद की थी और स्टेन स्वामी की सिपर और स्ट्रॉ वापस किए जाने की अपील पर NIA ने 20 दिन का समय जवाब देने में लगा दिया। ये रिपोर्ट झूठी, गलत और शातिराना तरीके से की गई हैं। एनआईए ने कोई सिपर और स्ट्रॉ बरामद नहीं किया था और न ही एजेंसी ने जवाब देने के लिए 20 दिन का समय मांगा था।

9- आरोपी स्टेन स्वामी हार्डकोर्ड सीपीओ माओवादी कार्यकर्ता है जिसके खिलाफ 7 अन्य लोगों के साथ NIA ने भीमा-कोरेगांव एलगार परिषद केस मामले में चार्जशीट दाखिल की गई थी।

10- आरोपी स्टेन स्वामी सीपीआई माओवादी कैडर के दूसरे कैडर के बीच ये बात बता रहे थे कि महाराष्ट्र और देश के अलग-अलग हिस्सों में शहरी माओवादी कार्यकर्ताओं की गिरफ्तारी ने सीपीआई माओवादी को बड़ा नुकसान पहुंचाया है। उन्हें माओवादी गतिविधियां बढ़ाने के लिए दूसरे कैडर से पैसा मिल रहा था। वे सीपीआई माओवादी के ही एक संगठन PPSC के संयोजक थे। उनके पास से प्रतिबंधित आतंकी संगठन सीपीआई माओवादी से संबंध रखने के सबूत मिले थे।

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