PoK को फिर से पाना अगला एजेंडा है- केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह बोले, जैसे Article-370 हटा ये भी होगा

नई दिल्ली, 21 नवंबर: पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (पीओके) को फिर से जम्मू और कश्मीर का हिस्सा बनाना भारत सरकार के अगले एजेंडे में है। यह बात किसी और ने नहीं, बल्कि प्रधानमंत्री कार्यालय में राज्यमंत्री डॉक्टर जितेंद्र सिंह ने कही है। उन्होंने आज एक कार्यक्रम में कहा है कि पहले ऐसे ही लोग समझते थे कि आर्टिकल-370 का खात्मा नहीं हो सकता। लेकिन, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अगुवाई में जैसे उसे खत्म किया गया, वैसे ही पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर को वापस लेने का संकल्प भी पूरा होगा। जितेंद्र सिंह खुद इस केंद्र शासित प्रदेश का प्रतिनिधित्व करते हैं और पीएमओ में अहम जिम्मेदारी संभाल रहे हैं, इसलिए उनकी बातों में काफी दम माना जा सकता है।

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    पीओके को फिर से पाना अगला एजेंडा है- केंद्रीय मंत्री

    पीओके को फिर से पाना अगला एजेंडा है- केंद्रीय मंत्री

    पाकिस्तान अधिकृत जम्मू और कश्मीर (पीओके) से विस्थापित हुए लोगों को समर्पित कार्यक्रम 'मीरपुर बलिदान दिवस' पर आयोजित एक कार्यक्रम में केंद्रीय मंत्री डॉक्टर जितेंद्र सिंह ने कहा है कि जिस नेतृत्व के पास आर्टिकल-370 हटाने की क्षमता है, उसके पास पाकिस्तान के अवैध कब्जे से पाकिस्तान अधिकृत जम्मू और कश्मीर (पीओजेके) को भी वापस हासिल करने की ताकत है। इस कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के तौर पर भाषण के दौरान केंद्रीय मंत्री बोले कि भारतीय उपमहाद्वीप का विभाजन मानवता के इतिहास में सबसे बड़ी त्रासदी है और बोले कि भारत ने इस बंटवारे को झेला है और जम्मू और कश्मीर ने अपने पुराने राज्य के एक हिस्से को पाकिस्तान के हाथों गैर-कानूनी तौर पर गंवाकर दूसरी त्रासदी झेली है। पीएमओ में राज्य मंत्री ने साफ तौर पर कहा है कि 'पाकिस्तान अधिकृत जम्मू और कश्मीर (पीओजेके) को फिर से प्राप्त करना एजेंडे में अगला है।'

    'जैसे आर्टिकल-370 हटा वैसे ये भी होगा'

    'जैसे आर्टिकल-370 हटा वैसे ये भी होगा'

    उन्होंने कहा कि हमेशा ऐसा माना जाता था कि आर्टिकल 370 को कभी भी नहीं हटाया जा सकता, लेकिन पीएम नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में इसे संभव किया गया और उसी तरह से पीओजेके को फिर से पाने का संकल्प भी पूरा होगा। उन्होंने साफ किया कि यह सिर्फ एक राजनीतिक और राष्ट्रीय एजेंडा नहीं है, बल्कि मानवाधिकारों की वजह से यह एक जिम्मेदारी भी है। क्योंकि, 'पीओजेके में हमारे भाई अमानवीय हालातों में रह रहे हैं' और यहां तक कि उन्हें स्वास्थ्य और शिक्षा जैसी मूलभूत सुविधाओं से भी बेरहमी से वंचित किया गया है।

    पाकिस्तान के कब्जे में कैसे गया पीओके ?

    पाकिस्तान के कब्जे में कैसे गया पीओके ?

    जम्मू और कश्मीर के भाजपा नेता जितेंद्र सिंह के मुताबिक तत्कालीन गृहमंत्री सरदार वल्लभभाई पटेल ने 560 से ज्यादा देशी रियासतों को आजादी के समय देश के साथ एकजुट करने मेंसफलता पाई थी, लेकिन उन्हें जम्मू और कश्मीर से दूर रखा गया, क्योंकि उस समय के प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू उसे अपने तरीके से हैंडल करना चाहते थे। जम्मू-कश्मीर की उधमपुर सीट से लोकसभा सांसद सिंह ने ये भी बताया कि 1947 में जब पाकिस्तान ने जम्मू-कश्मीर पर हमला कर दिया, तब भी नेहरू वहां भारतीय सेना को उतारने से हिचकिचा रहे थे और जब सरदार पटेल ने दखल दिया तभी जाकर सिख रेजिमेंट की पहली टुकड़ी श्रीनगर में उतरी।

    निशाने पर नेहरू

    निशाने पर नेहरू

    यही नहीं, वे बोले कि सामूहिक निर्णय लेने की जगह नेहरू ने उस समय एकतरफा युद्ध विराम की घोषणा कर दी, जबकि भारतीय सेना पाकिस्तान के कब्जे से जम्मू और कश्मीर के पूरे इलाके को मुक्त ही कराने वाली थी। उन्होंने साफ तौर पर नेहरू की नीतियों पर सवाल उठाते हुए बोला कि अगर पटेल को इसमें भी फ्री हैंड मिलता तो पीओजेके कभी बनता ही नहीं। इस मौके पर दिल्ली में रह रहे पीओजेके के लोगों के लिए डोमिसाइल सर्टिफिकेट बनाने का एक कैंप भी आयोजित किया गया। मंत्री ने विस्तापित समुदाय के लोगों से कहा कि उनमें से हर कोई इस सर्टिफिकेट को प्राप्त करें, क्योंकि यह उनका अधिकार ही नहीं है, इससे उन्हें कुछ अवसर और विशेषाधिकार भी मिलता है और पहचान और सम्मान की भावना भी प्राप्त होती है।

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