सीमा पर देश की रक्षा करने वाले फ्रंटलाइन जवानों की बढ़ सकती है रिटायरमेंट की उम्र, सीडीएस रावत ने बताई ये बात

New proposal to Raise the retirement age of frontline Troops: CDS Rawat

नई दिल्ली। भारतीय सेना की कई शाखाओं में अधिकारियों और जवानों के रिटायरमेंट की आयु बढ़ाने के उद्देश्य से फ्रंटलाइन के सैनिकों के कल्याण के लिए नया प्रस्ताव लाया गया। बुधवार को चीफ ऑफ डिफेंस स्टॉफ (CDS) जनरल बिपिन रावत ने बताया कि इन प्रस्तावों में समय से पहले रिटायरमेंट लेने वाले जवानों की पेंशन का पुनरीक्षण करना भी शामिल है। उन्‍होनें बताया कि कई शाखाओं में अधिकारियों और जवानों की सेवानिवृत्ति की आयु बढ़ाने के नए प्रस्तावों का उद्देश्य सीमा पर तैनात सैनिकों का कल्याण करना है।

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देश में सबसे वरिष्ठ रक्षा अधिकारी रावत ने इन प्रस्तावों के साथ कहा कि समय से पहले सेवानिवृत्ति की मांग करने वाले पेंशन कर्मियों के संशोधन सहित, केवल वे कार्मिक नाखुश हैं जो तकनीकी रूप से योग्य हैं और पूर्ण पेंशन के साथ सेवानिवृत्ति लेने के बाहर के अवसरों की तलाश करना चाहते हैं उन्हें पूरी पेंशन दी जाएगी। उन्‍होंने कहा "हालांकि, हम सक्षम सीमावर्ती सैनिकों की भलाई के बारे में अधिक चिंतित हैं, जो वास्तविक कठिनाइयों का सामना करते हैं और जिनके साहस और वीरता पर, हम सभी को गर्व महसूस करते है।" अधिकारियों और जवानों की सेवानिवृत्ति की आयु बढ़ाने और समय से पहले सेवानिवृत्ति की मांग करने वाले कर्मियों की पेंशन पात्रता में कमी के प्रस्ताव सोशल मीडिया की कुछ लोग आलोचना कर रहे हैं। इसमें सेना से सेवानिवृत्त होने वाले जवानों का समुदाय भी शामिल है। बता दें इस सप्‍ताह की शुरुआत में प्रस्ताव की जानकारी सोशल मीडिया पर लीक हो गई थी।

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      17 साल की नौकरी के बाद कम उम्र में हो जाते हैं बेरोजगार

      जनरल रावत ने कहा कि सीमावर्ती लड़ाका सैनिक सियाचिन, द्रास, तवांग, गुरेज़ और सिक्किम सीमाओं जैसी जगहों पर यूवा अपनी प्रारंभिक नौकरी का समय बिताते है जो ज्यादातर अपने परिवारों से दूर रहते है और शांति कार्यकाल के दौरान भी उन्हें ज्यादातर आंतरिक सुरक्षा या राज्य सरकार के सहायता कार्यों का कार्य दिया जाता है। रावत ने कहा 17 साल की सेवा के बाद अपेक्षाकृत कम उम्र में सेवा छोड़ने के लिए मजबूर सैनिक को प्रति माह लगभग 18,000 रुपये मिलते हैं और उसे अपने परिवार, बच्चों की शिक्षा और आवास की देखभाल करनी पड़ती है।

      क्या हमें इस प्रकार के व्यवहार को प्रोत्साहित करना चाहिए?

      सीडीएस रावत ने पूछा ऐसी परिस्थितियों में उन्हें और उनकी पत्नी को जीवनयापन के लिए दूसरी नौकरी की तलाश करनी पड़ती है। यहां तक की छोटी-मोटी नौकरी भी करना पड़ती है। बेहतर परिलब्धियां प्राप्त करने का एक तरीका विकलांगता लाभ लेना है। क्या हमें इस प्रकार के व्यवहार को प्रोत्साहित करना चाहिए?' अधिकारियों के सेवा कार्यकाल के विस्तार के मुद्दे पर, सीडीएस ने कहा कि कर्नल 54 साल की उम्र में सेवानिवृत्त होते हैं और फिर 58 साल की उम्र तक सेवा करने के बाद बेरोजगार बन कर नए रोजगार की तलाश करनी पड़ती है और उन्हें छोटी-मोटी नौकरी करनी पड़ती है। रावत ने कहा "क्या यह सेवा प्रदान करने का एक अच्छा तरीका है या हमें उन्हें रैंक के लिए सम्मान के साथ लंबे समय तक सेवा करने की अनुमति नहीं देनी चाहिए?" सीडीएस ने कहा, हम उन्हें ऐसे समय पर सेवा से बाहर नहीं कर सकते जिस समय उनके छोटे बच्चे स्कूल में पढ़ रहे हों और उन्हें अपने परिवार की देखभाल करनी हो।

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