पहचान छिपाने के लिए अमृतपाल सिंह ने पगड़ी उतारी, चश्मा लगाकर दिल्ली की सड़कों पर घूमता दिखा
दावा किया जा रहा कि 21 मार्च को अमृतपाल सिंह दिल्ली में था। इससे जुड़ा एक सीसीटीवी फुटेज भी सामने आया है।

अजनाला हिंसा के बाद से पंजाब पुलिस और केंद्रीय एजेसिंयों ने खालिस्तान समर्थकों पर शिकंजा कसा है। ऐसे में पुलिस की गिरफ्तारी से बचने के लिए वारिस पंजाब दे का मुखिया अमृतपाल सिंह लगातार भाग रहा। वैसे तो उसके नेपाल भागने की खबरें आ रहीं, लेकिन वो कुछ दिनों पहले दिल्ली आया था। वहां पर वो घूमता दिखा, लेकिन कोई उसे पहचान नहीं पाया। इस संबंध में एक सीसीटीवी फुटेज भी सामने आया है।
पुलिस और लोगों को चकमा देने के लिए अमृतपाल ने अपनी पगड़ी उतार दी है। वो डेनिम जैकेट और सनग्लासेस पहनकर दिल्ली की सड़कों पर घूम रहा। इस सीसीटीवी फुटेज में उसका सहयोगी पापलप्रीत सिंह भी नजर आ रहा। उसने भी अपनी पहचान छिपाने के लिए मास्क का सहारा लिया। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक ये फुटेज 21 मार्च की है, जो अब सामने आई है।
सूत्रों के मुताबिक अमृतपाल सिंह और पापलप्रीत सिंह हरियाणा के कुरुक्षेत्र के रास्ते दिल्ली आए। हालांकि पुलिस ने इस बारे में कोई जानकारी नहीं दी। किसी-किसी रिपोर्ट में कहा जा रहा कि वो दिल्ली में ही छिपा है, जबकि कुछ रिपोर्ट्स में दावा किया कि वो नेपाल में है। वहां से वो किसी दूसरे देश भागना चाहता है। इस बारे में भारतीय अधिकारियों ने नेपाली सरकार से संपर्क किया है।
सिखों के लिए पगड़ी काफी अहम
अमृतपाल सिंह खुद को कट्टर सिख बताता है। साथ ही सिखों के लिए वो अलग देश खालिस्तान की मांग भी करता है, लेकिन उसकी असलियत सामने आ गई। दरअसल सिखों में पगड़ी का खास महत्व है। कहा जाता है कि सिख सिर कटवा सकते हैं, लेकिन वो पगड़ी पर आंच नहीं आने देते। इस वजह से सोशल मीडिया पर फिर से लोग अमृतपाल पर निशाना साध रहे।
थाने में लेकर गया था गुरु ग्रंथ साहिब
वहीं अजनाला हिंसा के वक्त अमृतपाल के साथी गुरु ग्रंथ साहिब को थाने लेकर पहुंच गए थे। उस दौरान पुलिसकर्मियों ने अपनी जान पर खेल कर पवित्र ग्रंथ की रक्षा की थी। इस घटना के लिए भी धार्मिक गुरुओं ने अमृतपाल की आलोचना की थी।












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