Nepal: भारत की मदद से ऐतिहासिक मंदिरों का पुनर्निर्माण शुरू, जानिए इनके बारे में
काठमांडू, 30 जुलाई: नेपाल में 2015 में बहुत ही विनाशकारी भूकंप आया था। हजारों लोग मारे गए थे। बहुत ही बड़ी तबाही मची थी। उस कुदरती आपदा से नेपाल अभी भी पूरी तरह से उबर नहीं पाया है। नेपाल की मदद के लिए सबसे पहले हाथ बढ़ाने वालों में भारत शामिल था। उस भूकंप की त्रासदी से नेपाल को उबारने का भारतीय मिशन अभी जारी है। भारत भूकंप में बर्बाद हुए नेपाल के कई स्थलों का पुनर्निर्माण करवा रहा है। इनमें कई सांस्कृतिक धरोहर भी शामिल हैं। कई प्रोजेक्ट पर काम पूरा हो चुका है। अब ललितपुर जिले में दो ऐतिहासिक मंदिरों के पुनर्निर्माण का काम शुरू किया गया है। इस मौके पर आयोजित विशेष पूजा समारोह में काठमांडू स्थित भारतीय दूतावास के अधिकारी खुद शामिल हुए हैं।

नेपाल के स्वर्ण मंदिर का पुनर्निर्माण शुरू
नेपाल के हिरण्यवर्ण महाविहार, दिगि छेन मंदिरों के पुनर्निमार्ण का काम शुरू हो गया है। यह कार्य भारत की ओर से उपलब्ध कवाए गए फंड से हो रहा है। ये मदद हिमालय की गोद में स्थित इस देश की सांस्कृतिक धरोहरों के संरक्षण के लिए है। नेपाल में भारतीय दूतावास की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि 'महाविहार (मंदिर) का निर्माण 18.1 करोड़ रुपये (नेपाली ) में किया जा रहा है।' गुरुवार को ललितपुर में इन मंदिरों के मरम्मती के काम में हाथ लगाने से पहले स्थानीय लोगों ने 'क्षमा पूजा' का आयोजन किया। इस पूजन समारोह में काठमांडू में भारतीय दूतावास के अधिकारी, सेंट्रल लेवल प्रोजेक्ट इम्पलिमेंटेशन यूनिट और नेपाल सरकार ने हिस्सा लिया।

5 करोड़ डॉलर की सहायता दे रहा है भारत
हिरण्यवर्ण महाविहार का लोकप्रिय नाम स्वर्ण मंदिर भी है, जो कि पाटन दरबार स्क्वायर के स्मारक क्षेत्र में स्थित है। पाटन दरबार स्क्वायर ललितपुर में यूनेस्को की वर्ल्ड हेरिटेज साइट है जो कि यहां के सबसे महत्वपूर्ण बौद्ध मठ मंदिरों में से एक है। नेपाल का स्वर्ण मंदिर उन 28 सांस्कृतिक धरोहर प्रोजेक्ट में शामिल है, जिसके लिए भारत सरकार भूकंप के बाद वहां के सांस्कृतिक धरोहरों के पुनर्निमार्ण और पुनर्वास कार्यक्रम के तहत 5 करोड़ अमेरिकी डॉलर की सहायता दे रही है। ललितपुर जिले में इस तरह के तरह के 7 सांस्कृतिक धरोहर प्रोजेक्ट में पुनर्निर्माण होना है, जिनमें से 5 प्रोजेक्ट पर अभी काम चल रहा है। दरअसल, भारत और नेपाल सिर्फ पड़ोसी ही नहीं हैं, दोनों की सांस्कृतिक विरासत भी एक है और इस नजरिए से भारत की ये सहायता नेपाल के प्रति उसकी जिम्मेदारी से भी जुड़ी हुई है। (ऊपर की तस्वीरें- सौजन्य भारतीय दूतावास,काठमांडू)

नेपाल में आए भूकंप में करीब 9,000 लोगों की हुई थी मौत
गौरतलब है कि नेपाल में अप्रैल 2015 में आए 7.8 तीव्रता के विनाशकारी भूकंप ने इस देश को बुरी तरह से तबाह कर दिया था। भूकंप में करीब 9,000 लोगों की जान चली गई थी और लगभग 22,000 लोग जख्मी हो गए थे। नेपाल को तत्काल सहायता पहुंचाने में भारत सरकार सबसे आगे थी। तात्कालिक सहायता के बाद भारत लंबे समय के लिए पुनर्निमार्ण और पुनर्वास प्रोजेक्ट में भी नेपाल की सहायता कर रहा है। इसके तहत जिन मंदिरों के पुनर्निर्माण में भारत ने उसकी मदद की उनमें काठमांडू के प्रसिद्ध सेतो मछिन्द्रनाथ मंदिर भी शामिल है। यही नहीं भारत की सहायता से नेपाल के 12 जिलों में करीब 70 स्कूल और लगभग 150 स्वास्थ्य केंद्रों का भी निर्माण हो रहा है। पिछले साल नवंबर में जब भारत के विदेश सचिव हर्ष वर्धन श्रृंगला नेपाल दौरे पर गए थे तो गोरखा जिले में भारत की सहायता से बने 3 स्कूलों को उद्घाटन भी किया था।












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