'ना तो मंदिर और ना ही मस्जिद', बौद्ध का मठ है', ज्ञानवापी केस में धर्म गुरु ने SC में याचिका दायर कर ठोका दावा

वाराणसी की ज्ञानवापी मस्जिद मामले में गुरुवार को बड़ा मोड़ सामने आ गया। हिंदू और मुस्लिम धर्म के बीच अब एक और धर्म ने अपना दावा ठोक दिया है। बौद्ध धर्म ने सुप्रीम कोर्ट पहुंचकर दावा करते हुए कहा कि यह हमारा मठ है।

उन्होंने याचिका दायर कर कहा कि यह ना तो मंदिर और ना ही मस्जिद है, यह बौद्ध का मठ है। बौद्ध धर्म गुरु सुमित रतन भंते ने कहा कि देश में ऐसे तमाम मंदिर हैं, जो बौद्ध मठ को तोड़कर मंदिर बनाए गए हैं।

ना तो मंदिर है और ना ही मस्जिद, यह बौद्ध का मठ है

इससे पहले आज ही ज्ञानवापी मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है। उन्होंने एएसआई को विवादित ढांचे के सर्वे की इजाजत दे दी। वाराणसी जिला जज ने 21 जुलाई को एएसआई सर्वेक्षण का आदेश दिया था। लेकिन मुस्लिम पक्ष ने कोर्ट के सर्वे के फैसले को चुनौती दी थी।

इसके लिए उन्होंने पहले सुप्रीम कोर्ट फिर हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। हाईकोर्ट ने याचिका खारिज करते हुए एएसआई को सर्वे की अनुमति दे दी। एएसआई के अधिकारी ने स्पष्ट कहा है कि विवादित ढांचे के साथ कोई छेड़खानी नहीं की जाएगी। लेकिन मुस्लिम पक्ष ने यह चिंता जाहिर करते हुए कहा कि हमें लगता है मस्जिद गिर जाएगी। इस पर हाईकोर्ट ने फटकार लगाते हुए कहा था कि जब आपको एएसआई पर भरोसा नहीं है तो मेरे फैसले पर कैसे भरोसा करेंगे।

लेकिन बृहस्पतिवार को इस मामले में नया मोड़ सामने आ गया है। हिंदू और मुस्लिम पक्ष के बीच अब बौद्ध धर्म ने अपना दावा पेश किया है। बौद्ध धर्म का कहना है कि यह ना तो मंदिर है और ना ही मस्जिद है। यह बौद्ध का मठ है। इसके लिए उन्होंने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर अपना दावा पेश किया है।

इतना ही नहीं, बौद्ध धर्म गुरु ने कहा कि देश में कई ऐसे मंदिर हैं, जो बौद्ध मठों को तोड़कर बनाए गए हैं। ज्ञानवापी में पाए गए त्रिशूल और स्वस्तिक चिन्ह बौद्ध धर्म के हैं।

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