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NEET UG Paper Leak: सुप्रीम कोर्ट में अभी जारी है जिरह, लाखों छात्र कर रहे फैसले का इंतजार

NEET UG Paper Leak case: राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा स्नातक (NEET-UG) से संबंधित 40 से अधिक याचिकाओं पर गुरुवार 18 जुलाई को सुप्रीम कोर्ट सुनवाई कर रहा है। इस सुनवाई के बाद नीट यूजी 2024 पर सुप्रीम कोर्ट अपना अंतिम फैसला भी सुना सकता है कि पुन: परीक्षा होगी या नहीं?

पूरे नीट यूजी पेपर लीक मामले की सुनवाई चीफ जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ की अध्यक्षता में तीन जजों की बेंच कर रही है। 11 बजकर 15 मिनट पर शुरू हुई। सुप्रीम कोर्ट ने नीट को बड़ा आदेश देते हुए कहा कि शनिवार 12 बजे तक परीक्षा की पूरी जानकारी ऑनलाइन की जाए।

NEET UG Paper Leak case

सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ की कोर्ट ने कहा कि पुन: परीक्षा पर तभी विचार केवल तभी किया जा सकता है, जब यह साबित हो जाए कि परीक्षा में बड़े पैमाने पर 'गड़बड़ी' हुई है। याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ वकील नरेंद्र हुड्डा ने जिरह की।

उन्होंने कोर्ट के समक्ष कहा कि सरकारी मेडिकल कॉलेजों में 56000 सीटें हैं और प्राइवेट मेडिकल कॉलेजों में 52 हजार। कुल 1 लाख 8 हजार मेडिकल की सीट है। अगर नीट री-एग्जाम होता है तो 23 लाख के लिए नहीं, 1 लाख 8 हजार कुल संख्या होगी।

इसपर चंद्रचूड़ की कोर्ट ने कहा, केवल इसलिए कि 23 लाख उम्मीदवारों में से केवल 1 लाख को प्रवेश मिलेगा, हम Re NEET Exam का आदेश नहीं दे सकते। पुन: परीक्षा केवल ठोस आधार पर होनी चाहिए। इसपर वरिष्ठ वकील हूडा ने सुप्रीम कोर्ट से कहा कि बेदाग और दागियों को अलग-अलग कर पाना संभव नहीं है।

इतना ही नहीं, हुड्डा ने कोर्ट में दलील दी कि 'एनटीए और सरकार नीट 2024 में मार्क्स ज्यादा मिलने के दो कारण दे रही है, पहला तो सिलेबस में कटौती और दूसरा ज्यादा कैंडिडेट्स। लेकिन ये पूरा सच नहीं है। सिलेबस घटाया गया, तो बढ़ाया भी गया था। मैं बढ़े हुए पोर्शन दिखा सकता हूं।

कोर्ट को बताया गया कि केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने कथित नीट-यूजी पेपर लीक और कदाचार पर दूसरी स्थिति रिपोर्ट प्रस्तुत की है। अदालत ने जांच में गोपनीयता बनाए रखने की आवश्यकता पर जोर दिया। इसने याचिकाकर्ता से बड़े पैमाने पर पेपर लीक को साबित करने के लिए सबूत भी मांगे, जो परीक्षा रद्द करने को उचित ठहराए।

इसपर वकील नरेंद्र हुड्डा ने सुप्रीम कोर्ट में कहा कि 'वो ट्रंक जिसमें नीट के पेपर थे, 3 मई को हजारीबाग में ई-रिक्शा पर खुले में घूमता मिला था। इसे स्कूल के प्रिंसिपल ने रिसीव किया था। सीबीआई ने प्रिंसिपल को अरेस्ट किया है। लेकिन एनटीए एफिडेविट में इसका जिक्र नहीं है।'

इतना ही नहीं, वकील का कहना है कि प्रश्नपत्रों के परिवहन में तब समझौता हुआ जब 6 दिनों तक पेपर एक निजी कूरियर कंपनी के हाथों में थे और पेपर को हजारीबाग में ई-रिक्शा में ले जाया जा रहा था। समाचार एजेंसी एएनआई की खबर के मुताबिक, याचिकाकर्ताओं के वकील हुड्डा ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि लीक हुए पेपर का प्रसार 3 मई से ही शुरू हो गया था।

उन्होंने कहा कि टेलीग्राम वीडियो से मिले साक्ष्यों से पता चलता है कि हल किए गए पेपर 4 मई को प्रसारित किए जा रहे थे। कहा कि एनटीए कोर्ट को भटका रही है। जो डेट और समय वो दिखा रहे हैं वो टेलीग्राम चैनल में अपीयर नहीं होते। CJI डीवाई चंद्रचूड़ ने कहा कि किसी के ऐसा करने का उद्देश्य NEET परीक्षा को राष्ट्रीय स्तर पर तमाशा बनाना नहीं है।

लोग पैसे के लिए ऐसा कर रहे थे। इसलिए, यह परीक्षा को बदनाम करने के लिए नहीं था और कोई व्यक्ति पैसे कमाने के लिए ऐसा कर रहा था, जो अब स्पष्ट है। CJI ने कहा कि आपके अनुसार छात्रों को सुबह 10.15 बजे पेपर मिला। इसमें 180 प्रश्न हैं। क्या यह संभव है कि सुबह 9.30 से 10.15 बजे के बीच कोई समस्या हल करने वाला होगा और 45 मिनट में छात्रों को उसका हल दे देगा?

इसके जवाब में सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि पेपर हल करने वाले 7 लोग थे और उन्होंने 25-25 प्रश्न हल किए। सीजेआई ने कहा कि यह पूरी परिकल्पना कि 45 मिनट के भीतर ही उल्लंघन हुआ और पूरा पेपर हल करके छात्रों को दे दिया गया।

सुप्रीम कोर्ट नीट मामले में आदेश जारी करते हुए कहा कि परीक्षा का पूरा रिजल्ट ऑनलाइन डाला जाए। परीक्षा केंद्र को भी जानकारी दी जाए। इतना ही नहीं, छात्रों की पहचान सार्वजनिक ना हो। कोर्ट ने शनिवार 12 बजे तक सारी जानकारी ऑनलाइन करने के लिए कहा।

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