RBI के सरप्लस देने पर बोली NCP- बैंकिंग सिस्टम को खतरे में डाल रही मोदी सरकार

नई दिल्ली, 23 मई। पिछले साल फरवरी में भारत में कोरोना महामारी की एंट्री हुई, इसके चलते सरकार को लॉकडाउन करना पड़ा। जिस वजह से केंद्र को भारी राजस्व का नुकसान हुआ था। हालांकि अनलॉक के बाद धीरे-धीरे हालात पटरी पर आ रहे थे, लेकिन कोरोना महामारी की दूसरी लहर ने अर्थव्यवस्था को फिर से बड़ा नुकसान पहुंचाया। इस संकट के बीच भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने केंद्र सरकार को 99,122 करोड़ रुपए सरप्लस ट्रांसफर करने का फैसला किया है। जिस पर अब सियासत शुरू हो गई है।

आरबीआई

मामले में NCP नेता नवाब मलिक ने कहा कि केंद्र ने RBI के रिजर्व से 1,00,000 करोड़ रुपया लिया है। ये पहली बार नहीं है, पहले भी कई बार केंद्र सरकार ने पैसे लिए हैं। जब ये पैसे मांगे जा रहे थे तब उस समय के RBI गवर्नर ने इस्तीफा दिया था। रिजर्व बैंक संकट में आ गया तो पूरा बैंकिंग सिस्टम संकट में आ जाएगा। NCP के अलावा अन्य विपक्षी दलों ने भी सरकार के इस फैसले पर सवाल उठाए थे। साथ ही मोदी सरकार की आर्थिक नीतियों को गलत बताया था।

क्या होता है सरप्लस?
आरबीआई को अपनी आय पर किसी भी तरह का इनकम टैक्स नहीं देना पड़ता। देश का शीर्ष बैंक अपनी कमाई का कुछ पैसा अपनी जरूरतें पूरी करने, जरूरी प्रावधान और जरूरी निवेश में खर्च करता है, इसके बाद जो राशि बच जाती है उसे आरबीआई का सरप्लस अमाउंट कहा जाता है। इस पैसे को उसे सरकार को देना होता है। इस बार आरबीआई के पास रिकॉर्ड सरप्लस फंड था, जिसे उनसे पिछले वर्ष गोल्ड और विदेशी मुद्रा बाजार में एक्टिव रहने के बाद कमाया था। आरबीआई ने बड़े प्रॉफिट पर डॉलर बेचे और मुद्रा बाजार में रिकॉर्ड बॉन्ड खरीदे, जिन पर अच्छा रिटर्न मिला।

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