राज्यपाल ने फडणवीस को क्यों दिया सरकार बनाने का न्योता? केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट में दिया ये जवाब

नई दिल्ली। महाराष्ट्र के सियासी संकट पर सुप्रीम कोर्ट में आज अहम सुनवाई हुई। सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने कहा कि वह कल 10:30 बजे फैसला सुनाएगी। आज सुप्रीम कोर्ट में शिवसेना, कांग्रेस-एनसीपी की याचिका पर सुनवाई शुरू हुई तो सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने केंद्र की तरफ से अदालत को बताया कि उनके पास मूल दस्तावेज हैं। उन्होंने कहा कि राज्यपाल ने समर्थन का पत्र मिलने के बाद ही सरकार बनाने का न्योता दिया है।

फडणवीस ने 170 विधायकों के समर्थन का पत्र सौंपा था- एसजी

फडणवीस ने 170 विधायकों के समर्थन का पत्र सौंपा था- एसजी

मामले की सुनवाई के दौरान केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी ने फडणवीस को 170 विधायकों का समर्थन पत्र देने के बाद सरकार बनाने के लिए आमंत्रित किया, राज्यपाल का इसकी काम जांच करना नहीं है। वहीं, फडणवीस की तरफ से पेश हुए एजी मुकुल रोहतगी ने कोर्ट को बताया कि 22 नवंबर की चिट्ठी में अजीत पवार ने खुद को CLP बताया और कहा कि 54 विधायकों का उनको समर्थन है। इसमें कहा गया कि वे राज्य में राष्ट्रपति शासन नहीं, बल्कि स्थाई सरकार चाहते हैं।

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    राज्यपाल ने समर्थन पत्र मिलने के बाद सरकार बनाने के लिए बुलाया- एसजी

    राज्यपाल ने समर्थन पत्र मिलने के बाद सरकार बनाने के लिए बुलाया- एसजी

    तुषार मेहता ने कोर्ट से कहा कि हमें 2-3 दिन का समय दें और हम इस याचिका पर जवाब दाखिल करेंगे। उन्होंने कहा कि राज्यपाल ने अपने पूरे विवेक से 23 नवंबर को सबसे बड़ी पार्टी को सरकार बनाने को आमंत्रित किया था। सुनवाई के दौरान केंद्र का प्रतिनिधित्व कर रहे सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने सुप्रीम कोर्ट में महाराष्ट्र के राज्यपाल बीएस कोश्यारी और मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के पत्र भी सौंपे।

    सुप्रीम कोर्ट कल सुनाएगा फैसला

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    कोर्ट में फडणवीस की तरफ से कहा गया किया कि 105 भाजपा विधायकों के अलावा, एनसीपी के 54 विधायक और 11 निर्दलीय विधायक उनका समर्थन कर रहे हैं। एनसीपी और निर्दलीय विधायकों के पत्र भी अदालत में पेश किए गए। मुकुल रोहतगी ने कहा कि विधायकों के हस्ताक्षर असली हैं। मुकुल रोहतगी ने साथ ही ये भी कहा कि अजीत पवार के पास 54 विधायकों का समर्थन था, जिसके बाद फडणवीस को राज्यपाल ने सरकार बनाने के लिए आमंत्रित किया। रोहतगी ने कोर्ट में कहा कि विधानसभा की परंपरा का पालन किया जाना चाहिए, कोर्ट फ्लोर टेस्ट के लिए राज्यपाल को कैसे आदेश दे सकता है।

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