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National Herald Case: क्या है नेशनल हराल्ड केस, जिसमें सोनिया-राहुल गांधी के खिलाफ ईडी ने दाखिल की चार्जशीट

National Herald Case: नेशनल हेराल्ड केस आज भारत की राजनीति में सबसे चर्चित और विवादास्पद मामलों में से एक है। यह मामला सीधे तौर पर देश के सबसे प्रमुख राजनीतिक परिवार 'गांधी परिवार' से जुड़ा है और देखते ही देखते ये पूरा केस उनके लिए गले की फांस बन गया। इस मामले में सत्ता,संपत्ति और राजनीति का गहरा मेल देखने को मिलता है।

इस पूरे केस की जड़ एक ऐतिहासिक अखबार और उससे जुड़ी कंपनियों से शुरू होती हैं। क्या है नेशनल हेराल्ड केस? कैसे खुली इसकी पोल और क्या है इस पूरे मामले की पृष्ठभूमि? आइए विस्तार से जानते हैं....

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National Herald Case Kya Hai? क्या है नेशनल हेराल्ड?

दरअसल, नेशनल हेराल्ड एक अखबार है जिसकी शुरुआत साल 1938 में हुई थी और इसकी स्थापना भारत के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू ने की थी। इस अखबार का उद्देश्य था भारतीय स्वतंत्रता संग्राम को बौद्धिक रूप से बल देना और लोगों में राष्ट्रीय चेतना को मजबूत करना। इस अखबार का स्वामित्व एसोसिएटेड जर्नल्स लिमिटेड (AJL) के पास था जो हिंदी में 'नवजीवन', उर्दू में 'कौमी आवाज' और इंग्लिश में 'नेशनल हेराल्ड' नामक अन्य समाचारपत्र भी प्रकाशित करता था।

साल 1956 में AJL को एक गैर-व्यावसायिक संस्था के रूप में कंपनी एक्ट की धारा 25 के तहत पंजीकृत किया गया, जिससे इसे टैक्स से छूट मिल गई लेकिन समय के साथ अखबार की लोकप्रियता और आर्थिक स्थिति गिरती चली गई। अंततः 2008 में कंपनी को भारी वित्तीय संकट का सामना करना पड़ा जिसके चलते अखबार को बंद कर दिया गया तब तक कंपनी पर लगभग 90 करोड़ रुपये का कर्ज चढ़ चुका था।

National Herald Case: यंग इंडियन की एंट्री और विवाद की शुरुआत

साल 2010 में कांग्रेस नेताओं के नेतृत्व में 'यंग इंडियन प्राइवेट लिमिटेड' नामक एक नई कंपनी का गठन किया गया। इस कंपनी के शेयर में से 76% सोनिया गांधी और 38% राहुल गांधी के पास थे और शेष 24% मोतीलाल वोरा और ऑस्कर फर्नांडिस के पास।

इसके बाद कांग्रेस पार्टी ने AJL को दिया गया 90 करोड़ रुपये का लोन यंग इंडियन को ट्रांसफर कर दिया। AJL की हालत इतनी खराब थी कि वह यह कर्ज नहीं लौटा पा रही थी। इसके चलते उसने अपने सारे शेयर यंग इंडियन को मात्र 50 लाख रुपये में ट्रांसफर कर दिए।

अब सारे विवाद की जड़ यहीं से शुरू हुआ और इस मामले ने तूल पकड़ी और सियासत में एक नया तूफान आया। पहली बार इस पर बीजेपी नेता सुब्रमण्यम स्वामी ने आरोप लगाया कि यंग इंडियन ने केवल 50 लाख रुपये में 90 करोड़ वसूलने का रास्ता खोज निकाला, जो कानून और नैतिकता दोनों के खिलाफ है।

कानूनी प्रक्रिया सुब्रमण्यम स्वामी ने नवंबर 2012 में दिल्ली की एक अदालत में याचिका दायर की। इसके दो साल बाद, जून 2014 में अदालत ने सोनिया गांधी, राहुल गांधी और अन्य के खिलाफ समन जारी किया। इस मामले में मनी लॉन्ड्रिंग की संभावनाएं देखते हुए प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने अगस्त 2014 में जांच शुरू की।

19 दिसंबर 2015 को दिल्ली की पटियाला हाउस कोर्ट ने गांधी परिवार के सदस्यों को नियमित जमानत दे दी। 2016 में सुप्रीम कोर्ट ने भी उनके खिलाफ चल रही कार्रवाई को रद्द करने से इंकार कर दिया, लेकिन उन्हें व्यक्तिगत पेशी से छूट दे दी गई।

2018 में दिल्ली हाई कोर्ट ने सोनिया और राहुल गांधी की उस याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें उन्होंने आयकर विभाग की जांच को चुनौती दी थी।

National Herald Case: ईडी की चार्जशीट और बढ़ती मुश्किलें

हाल ही में, प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने नेशनल हेराल्ड केस में बड़ा कदम उठाते हुए चार्जशीट दाखिल कर दी है। इस चार्जशीट में राहुल गांधी, सोनिया गांधी, सैम पित्रोदा, सुमन दुबे समेत कई अन्य कांग्रेस नेताओं के नाम शामिल हैं।

चार्जशीट दिल्ली के राउज एवेन्यू कोर्ट में पेश की गई है और अदालत ने 25 अप्रैल को मामले में संज्ञान पर बहस के लिए तारीख तय की है। इससे पहले ED ने केस से जुड़ी कुछ अचल संपत्तियों पर कब्जा करने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी थी।

National Herald Case: कांग्रेस का रुख और राजनीतिक बयानबाजी

कांग्रेस पार्टी इस पूरे मामले को राजनीतिक बदले की कार्रवाई बता रही है। पार्टी का दावा है कि यह केस केवल गांधी परिवार और कांग्रेस की छवि को धूमिल करने का प्रयास है। पार्टी ने यह भी कहा है कि नेशनल हेराल्ड से जुड़ी संपत्तियाँ जनसेवा के लिए थीं और उन्हें बेचा या निजी लाभ के लिए इस्तेमाल नहीं किया गया। वहीं बीजेपी का कहना है कि यह एक स्पष्ट भ्रष्टाचार और मनी लॉन्ड्रिंग का मामला है, जिसमें कानून के दायरे में निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।

25 अप्रैल को अदालत इस चार्जशीट पर संज्ञान लेगी। इसके बाद तय होगा कि मामले में अगला कदम क्या होगा-क्या आरोप तय होंगे, या कुछ आरोपियों को राहत मिलेगी? यह देखना दिलचस्प होगा कि भारत की राजनीति में यह मामला किस दिशा में जाता है।

नेशनल हेराल्ड केस केवल एक वित्तीय लेनदेन या संपत्ति विवाद नहीं है, बल्कि यह भारत की दो सबसे बड़ी राजनीतिक पार्टियों-कांग्रेस और बीजेपी-के बीच चल रहे लंबे राजनीतिक संघर्ष का एक अहम अध्याय है। यह मामला आज एक राष्ट्रीय बहस का केंद्र बन चुकी हैं।

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